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आवक बढ़ी:नरमे में 15 से 20 फीसदी माॅयश्चर, सीसीआई ने बठिंडा के 9 में से 7 सेंटरों पर शुरू नहीं की खरीद

बठिंडा8 महीने पहले
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  • सरकार ने 5700 रुपए प्रति क्विंटल रेट तय किया, व्यापारी 4700-4800 में खरीद कर रहे नरमा

केंद्र सरकार के आदेश के मुताबिक 1 अक्टूबर से मंडियों में नरमा की खरीद शुरु करने के एलान के बाद मंडियों में नरमे की आवक लगातार बढ़ रही है, लेकिन सरकारी खरीद एजेंसी सीसीआई (काॅटन कार्पोरेशन आफ इंडिया) ने अभी तक बठिंडा के 9 सेंटरों में 7 सेंटरों पर नरमे की खरीद शुरू नहीं की है तथा इसका कारण नरमे में मॉयश्चर यानी नमी की मात्रा 15 से 20 प्रतिशत तक होना है जिससे सीसीआई अभी नरमे की खरीद से गुरेज कर रही है।

ऐसे में किसान हाल फिलहाल फसल बेचने को प्राइवेट व्यापारियों पर निर्भर कर रहा है। नरमे का सरकार समर्थित मूल्य जहां 5725 है, वहीं मंडी में प्राइवेट ग्रुप अधिकतम 4900 से 5000 हजार तक नरमे की क्वालिटी के हिसाब से अदा कर रहे हैं। वहीं सीसीआई जिला बठिंडा के 9 सेंटर यानी मंडियों में मौड़ व संगत में नरमे की खरीद शुरू की चुकी है जबकि बाकी 7 सेंटरों पर खरीद किसी भी समय शुरू की जा सकती है, लेकिन नरमे में मॉयश्चर की अधिकता से फिलहाल सीसीआई इंतजार कर रही है।

गौरतलब है कि पिछली बार 2019 में सीसीआई ने 3.5 लाख बेल की खरीद की थी जबकि अभी तक दो दिन में 250 बेल सीसीआई ने खरीदी हैं। बठिंडा दाना मंडी में नरमा चैक कर रहे कमियों के अनुसार मंडियों में आ रहे नरमे की अलग-अलग ढेरियों में 15 से 20 प्रतिशत तक नमी पाई जा रही है जबकि नियमों के मुताबिक सीसीआई 8 से 12 फीसदी तक नमी वाले नरमे की खरीद कर सकती है।

जहां एक तरफ मंडियों में नरमे की आवक अब लगातार बढ़ रही है तथा रोजाना 1500 से 2000 क्विंटल नरमा मंडियों में पहुंच रहा है। अभी तक भी नरमा मंडी में पहुंचा है उसमें से ज्यादातर प्राइवेट व्यापारियों ने ही खरीदा है। मंडी में फसल बेचने आए किसानों ने रोष जताते हुए कहा कि सीसीआई ने अभी तक सरकारी खरीद शुरू नहीं की है जिससे उन्हें निर्धारित मूल्य से कम कीमत पर प्राइवेट व्यापारियों को फसल बेचनी पड़ रही है जबकि केंद्र सरकार द्वारा नरमे की फसल का रेट 5725 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया है, लेकिन स्थानीय मंडी में प्राइवेट व्यापारी नरमे के लिए 4700 से 5000 रुपये प्रति क्विंटल तक भाव दे रहे हैं जिससे किसानों को इच्छा के मुताबिक पैसे नहीं मिल रहे हैं।

गांव बीबीवाला के किसान नछत्तर सिंह कहते हैं कि मंडियों में सरकार द्वारा निर्धारित नरमे का रेट नहीं मिल रहा है। धान व गेंहूं की फसल की तरह नरमे की फसल पर भी एमएसपी तय होनी चाहिए, लेकिन अभी प्राइवेट व्यापारियों को ही नरमा बेचना किसानों की मजबूरी है। वहीं गांव गोबिंदपुरा के किसान सुखविंदर सिंह ने कहा कि पिछली बार नरमा 5000 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका था, इस बार भी रेट करीब वही है, जबकि सरकार को किसानों को तय रेट देना चाहिए।

अभी मौड़ व संगत में ही नरमे की खरीद हो रही
बठिंडा में नरमे के 9 सेंटर यानी 9 मंडियों में फिलहाल दो जगहों पर ही नरमे की खरीद पिछले दो दिन में शुरू हो पाई है। बठिंडा में अभी मौड़ व संगत में ही नरमे की खरीद हो रही है जबकि बठिंडा, रामपुरा, तलवंडी साबो, भुच्चो मंडी आदि में नरमे की खरीद अभी शुरू होनी है। हालांकि सीसीआई टीमें वहां विजिट कर रही हैं, लेकिन नरमे में मॉयश्चर की अधिकता के कारण यह खरीद शुरू होने में समय लग रहा है। सरकार ने मॉयश्चर की सीमा 12 फीसदी तय की है जबकि नरमे में इस समय मॉयश्चर 15 से 20 फीसदी है।
मॉयश्चर कम होने पर अन्य जगहों पर भी खरीद होगी
बठिंडा के 9 सेंटर (मंडी) में नमी की मात्रा कम आने वाले सेंटर मौड़ व संगत के अलावा तपा में नरमे की खरीद सीसीआई शुरू कर चुकी है। पिछले दो दिन में सीसीआई 250 नरमे की बेल खरीद कर चुकी है। मॉयश्चर कम होने पर अन्य जगहों पर भी खरीद होगी। नीरज कुमार, एजीएम, सीसीआई, बठिंडा

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