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राय:शिक्षाविद बोले- नई पॉलिसी ग्राउंड लेवल पर लागू करें तो आएंगे दूरगामी परिणाम

बठिंडाएक दिन पहले
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कैबिनेट ने नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी है, 34 साल बाद शिक्षा नीति में बदलाव किया है जोकि 21वीं सदी के वर्तमान हालातों के अनुरूप पूरी तरह से रोजगारोन्मुखी और स्किल पर केंद्रित है। देश के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि इतने बड़े स्तर पर सबकी राय ली गई है, इसके लिए 2.5 लाख ग्राम पंचायतों, 6,600 ब्लॉक्स, 676 जिलों से सलाह ली गई। नई शिक्षा नीति में किए गए बदलाव का गहन अध्ययन करके स्कूल-कॉलेज के प्रिंसिपल व वरिष्ठ शिक्षाविदों ने बच्चों में छोटी उम्र से ही स्किल भरने वाली लाभकारी नई पॉलिसी अकेले डाक्यूमेंट तक ही सीमित न रखकर समुचित तरीके से लागू करने की जरूरत पर जोर दिया।

विदेशी यूनिवर्सिटियां आने से भारतीय यूनिवर्सिटियों में भी आएगा सुधार
वयोवृद्ध शिक्षाविद प्रो. एनके गोसाई का कहना है कि नई शिक्षा नीति के अंतर्गत टॉप 100 विदेशी यूनिवर्सिटियों के भारत आने से देश की सेंट्रल, स्टेट व प्राइवेट यूनिवर्सिटियों को कंपीट करने के लिए अपना ढांचा सुधारना होगा। इससे भारतीय यूनिवर्सिटियों में अपेक्षित सुधार होने से क्वालिटी एजुकेशन के आसार बनेंगे। वहीं भारतीय छात्रों को भी विदेश की यूनिवर्सिटियों में पढ़ाई करना अपने देश में ही संभव हो सकेगा। हर बच्चे का एकेडमिक एकाउंट बनने से उसकी छोड़ी गई पढ़ाई से गैर ईयर का नुकसान नहीं होगा और वो उसे भविष्य में रेगुलर कर सकेगा और हर साल की पढ़ाई का सर्टिफिकेट मिलेगा। नई शिक्षा नीति शिक्षा और विद्या का सम्मिश्रण है जिसमें भारतीय संस्कृति के साथ-साथ आधुनिक साइंटिफिक पढ़ाई है जिसे स्वावलंबी भारत के तहत आज की जरूरतों के मुताबिक बनाया गया है।

सेमेस्टर सिस्टम से एनुअल बर्डन खत्म होगा, सोच बनेगी रोजगारपरक
डिप्टी डीईओ भूपिंदर कौर का कहना है कि नई शिक्षा नीति को बच्चों की रुचि के अनुसार पूरी तरह से फ्लेक्सिबल बनाया गया है। ग्रेजुएशन लेवल पर पढ़ाई बीच में छूट जाने पर गैर ईयर का नुकसान नहीं होगा। जितनी पढ़ाई की होगी, उसका सर्टिफिकेट मिलेगा जिससे क्रेडिट को कैरी ऑन किया जा सकेगा। वहीं छठी से वोकेशनल स्टडी से बच्चों की सोच रोजगारोन्मुखी होगी, हायर स्टडी कर पाने से वंचित विद्यार्थी भी अपनी स्किल से रोजगार के लायक बन सकेंगे। इसके अलावा बच्चे अपने प्रोफेशन के अनुरूप चुने स्ट्रीम में पढ़ाई के साथ अपना पसंदीदा सब्जेक्ट भी पढ़ सकेंगे जिससे स्टडी व इंट्रेस्ट बना रहेगा। इसके अलावा पढ़ाई पूरी तरह से टेक्निकल बेस होने से रोट लर्निंग यानी रट्टा प्रवृत्ति खत्म होगी। सबसे बड़ा फायदा स्कूल लेवल में ही सेमेस्टर सिस्टम लागू करने से होगा, बच्चों पर एनुअल बर्डन खत्म होगा।

एचईसीआई से कॉमन रूल्स बनना कॉलेजों के लिए राहत, पहले प्रबंधन को दुविधा रहती थी
डीएवी कॉलेज के प्रिंसिपल प्रवीण गर्ग का कहना है कि नई शिक्षा नीति में सिंगल रेगुलेटरी बॉडी के तौर पर हायर एजुकेशन कौंसिल आफ इंडिया का गठन करना कॉलेजों के लिए राहत भरा रहेगा जिससे देश भर के कॉलेजों के लिए कॉमन रूल्स लागू किए जा सकेंगे। यूजीसी के अलग नियम हैं जबकि एआईसीटीई के नार्म्स अलग हैं, इन दोनों के अलग-अलग ग्रेड व नार्म्स पर खरा उतरने में कॉलेज प्रबंधन में दुविधा बनी रहती है। वहीं पब्लिक व प्राइवेट शिक्षा संस्थानों का फीस स्लैब एक समान करने का नियम लाया जा रहा है और इसके लिए फीस रेगुलेटरी बनाई जाएगी। यह नियम प्राइवेट शिक्षण संस्थानों के लिए चुनौती साबित होगा, फीसें अगर पब्लिक यानी सरकारी संस्थानों के आधार पर निर्धारित की जाएंगी तो कॉलेजों के लिए स्टाफ की सेलरी देने में मुश्किलें आएंगी। विदेशों की 100 टॉप यूनिवर्सिटियों को भारत बुलाने से लोकल यूनिवर्सिटियों का भविष्य खतरे में पड़ेगा जबकि सरकार ने जीआर रेशो को 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 2035 तक 50 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि विदेशी यूनिवर्सिटियों के छात्र पढ़ाई के साथ सप्ताह में 20 घंटे तक काम भी करते हैं लेकिन हमारी भारतीय एजुकेशन पॉलिसी में ऐसा प्रावधान नहीं है।

पॉलिसी लागू होने के 5 साल में आएंगे दूरगामी परिणाम, यह अच्छी पहल
दिल्ली पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल डॉ. अरूण जी के अनुसार नई शिक्षा नीति 21वीं सदी के अनुरूप नए आइडिया पर आधारित वोकेशनल एजुकेशन व एम्प्लायमेंट ओरिएंटेड है। साइंस को मानव हित के सदुपयोग करने की जरूरत है, जबकि इन दिनों साइंस की स्टडी में टूल्स-टेक्निकल व साइंटिफिक सोच ही रहती है। स्टूडेंट साइंस, कॉमर्स, ह्यूमैनिटीज स्ट्रीम के सब्जेक्ट साझा तौर पर पढ़ने से इन स्ट्रीम में बनी विभिन्नता खत्म होगी। वहीं 5वीं तक मातृ भाषा तक पढ़ाई को तरजीह देना अच्छी पहल है लेकिन कॉमन लैंग्वेज अंग्रेजी को भी बराबर रखना चाहिए क्योंकि विदेश ही नहीं बल्कि अपने देश के अन्य राज्यों के लोगों की भाषा को समझने के लिए अंग्रेजी ही कारगर है। पॉलिसी ग्राउंड लेवल पर लागू होने के 5 साल तक इसके दूरगामी असर दिखेंगे। नई शिक्षा नीति देश के लिए बेहतर साबित होगी ऐसी हम सबको उम्मीद है।

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