बठिंडा डीसी दफ्तर के बाहर लगाए पराली के ढेर:प्रबंधन में सरकारी मदद न मिलने पर किरती किसान यूनियन का प्रदर्शन, कहा- 200 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से मिले बोनस

बठिंडा2 महीने पहले
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बठिंडा डीसी ऑफिस के बाहर पराली फेंकते किसान। - Dainik Bhaskar
बठिंडा डीसी ऑफिस के बाहर पराली फेंकते किसान।

पंजाब सरकार द्वारा पराली का कोई पक्का प्रबंध न करने और किसानों को कोई राहत न देने के खिलाफ किरती किसान यूनियन ने सोमवार को बठिंडा डीसी दफ्तर के बाहर पराली के ढेर लगा दिया। किसानों ने पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए रोष मार्च भी निकाला। वहीं किसानों को पराली न जलाने में मदद की मांग की गई।

किसान गुरप्रीत सिंह जयसिंह वाला ने बताया कि पंजाब सरकार द्वारा पराली जलाने पर लगाई गई रोक के चलते ही डीसी दफ्तर के आगे पराली फेंक कर रोष प्रदर्शन किया गया। जबकि किसानों को मजबूरी में पराली जलानी पड़ती है। लेकिन सरकार द्वारा कोई मदद नहीं की जाती। अगर सरकार किसानों को सुविधाएं दे, तो वे पराली नहीं जलाएंगे।

यूनियन के नेता अमरजीत सिंह हनी ने बताया कि किसान परिवार की औसत दिहाड़ी 30 रुपये प्रति परिवार पड़ती है, जिससे हिसाब लगाया जा सकता है कि किसान क्यों खुदकुशी करने को मजबूर हो रहे हैं। यहां तक कि केंद्र सरकार की ओर से पूंजीपतियों को खेती क्षेत्र में आने की छूट दी जा रही है और कृषि कानूनों को वापस नहीं लिया जा रहा।

हनी ने कहा कि पराली का प्रबंध सरकारी मदद के बिना नहीं किया जा सकता। इसके लिए सरकार को चाहिए कि 200 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से बोनस दिया जाए और जब तक सरकार सहायता नहीं देती, तब तक सरकार पराली की संभाल खुद करे। उन्होंने आने वाले दिनों में संघर्ष को ओर भी तेज करने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि सरकार खुद तो किसानों को पराली जलाने के लिए जुर्माने कर रही है। वहीं दूसरी तरफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा किसान के पक्ष में दिए फैसलों को लागू करने से भाग रही है। यहां तक कि सरकार ने पराली की संभाल के लिए मुआवजा देने का भी ऐलान किया था। लेकिन आज तक पराली न जलाने वाले किसानों को एक पैसा भी नहीं मिला।

इस मौके पर भुच्चो खुर्द के प्रधान साधा सिंह, गेला सिंह, सुखविंदर सिंह, सीरा सिंह, बख्शीश सिंह, रघवीर सिंह, अंग्रेज सिंह, बीरा सिंह, हरीपाल सिंह आदि उपस्थित थे।

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