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विरोध:पहली बार धरने में बड़ी संख्या में आ रहे युवा, किसान यूनियन बोली-वारिसों के इंतजार में निकल गई उम्र

बठिंडाएक महीने पहले
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  • केंद्र सरकार के कृषि आर्डिनेंस बिल के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) का प्रदर्शन

पिछले सात दिनों से गांव बादल में केंद्र सरकार के कृषि आर्डिनेंस बिल के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) के आह्वान पर हजारों की संख्या में किसान गांवों से निकलकर बादल गांव में धरनास्थल पर पहंुचकर यूनियन नेताओं को सुन रहे हैंं, लेकिन इस धरने में पहली बार ऐसी बात देखने को मिली है जो पहले नजर नहीं आई तथा इससे किसान नेता तक इत्तेफाक रखते हैं और वह है बड़ी संख्या में युवाओं का शामिल होना। पहली बार युवाओं के बड़ी संख्या में शामिल होने पर किसान यूनियन नेता खुश हैं तथा इसे भविष्य के लिए अच्छा संकेत भी मानते हैं।

इस बार यूनियन नेताओं ने गांव-गांव जाकर किसानों को कृषि आर्डिनेंस से किसानों को होने वाले नुकसान की बातें साझा कीं जिसका सबसे अधिक असर युवाओं पर हुआ, इसलिए युवा धरने में शामिल होने आ रहे हैं। बकौल युवा वह स्पष्ट कहते हैं कि जमीनों से तो पहले ही मुनाफा नहीं बचा है, अब उनकी बाकी उम्मीदें भी दम तोड़ देंगी।

युवा बोले- आखिर कब तक हम चुप रहते, संघर्ष ही एकमात्र रास्ता
गांव बादल के इस धरने में स्टेज पर जहां गिनती के किसान व अन्य यूनियन के नेताओं के अलावा इक्का-दुक्का औरतें नजर आती हैं, वहीं मंच के सामने हजारों की संख्या में किसान व किसान परिवार की महिलाएं व मजदूर वर्ग में शामिल लोग भी बैठ रहे हैं जो सरकार के खिलाफ हर नारे को जबरदस्त आवाज देकर धरने को सफल बनाने के प्रयत्न में लगे हुए हैं।

धरने में अगर कोई चीज सबसे हैरान करती है तो वह वहां बड़ी संख्या में आ रहे युवा हैं जो बठिंडा, मानसा, मुक्तसर व फरीदकोट तथा बरनाला जिलों तक से इस धरने में सुबह शामिल होकर शाम को लौट रहे हैं। मोटरसाइकिल, कारों, जीपों व बसों में सवार होकर यूनियन झंडे उठाए यह युवा इस धरने की उम्र को बढ़ाने में बड़ा रोल अदा कर रहे हैं। मौड़ के एक गांव से धरने पर आए युवा मंजीत सिंह व बलकार कहते हैं कि पहले ही खेती से उनके पास कोई बचत नहीं होती है जिससे जिंदगी काटना ही मुश्किल हो गया है।

सरकार के ऐसे किसान विरोधी बिलों से तो छोटे किसान वैसे ही खत्म हो जाएंगे। सरकार के इस निर्णय का विरोध करने को वह घर से बाहर निकले हैं। वहीं बरनाला के गांव नंगल से आए राजविंदर, प्रभजोत, जसदीप व चरणदीप भी इसी उम्मीद में आए हैं ताकि उनका भविष्य सुरक्षित रह सके।

किसान नेता बोले- पहली बार युवाओं के उत्साह से मिलेगी संघर्ष को पहचान
भाकियू उगराहां के प्रांतीय सचिव शिंगारा सिंह मान ने युवाओं के पहली बार बड़ी संख्या में धरने में आने पर कहा कि उनकी उम्र यह सोचते हुए ही निकल गई कि उनका आगे संघर्ष का झंडा उठाने को कोई वारिस जन्म लेगा जो कमान संभालेगा। जो हालात थे, उससे यही लगता था कि सरकारों को कुछ करने की जरूरत नहीं होगी, अगले चंद सालों में आवाज खुद ही खत्म हो जाएगी, क्योंकि अधिकांश लोगों की आयु 60 से 70 साल हो चुकी है।

पहली बार औरतों के बड़ी संख्या के अलावा करीब 50 फीसदी युवा इस धरने में शामिल हुआ है। 523 गांवों में उनके लगाए मोर्चों से युवाओं की समझ में बात आ गई जिससे आज वह सड़क पर आ गए हैं और उन्हें इस बात की खुशी है कि किसान यूनियन का संघर्ष अब मरने वाला नहीं है, यह सरकार से अपनी बात मनवाएगा।

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