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बेअंत दर्द:मैं बच्चों के साथ पत्नी के पास जा रहा हूं, मरने के बाद किसी रिश्तेदार काे एक तिनका मत उठाने देना, घर व सामान बेचकर गुरुद्वारे को दान कर देना

बठिंडा2 महीने पहले
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  • बठिंडा में पत्नी की माैत से दुखी बेअंत ने 3 बच्चाें की हत्या कर खुद लगाया फंदा
  • पत्नी की 1 माह पहले कैंसर से हुई थी मौत, 8 पेज के सुसाइड नोट की शुरुआत कविता से की

हमीरगढ़ गांव में एक पिता ने 3 बच्चों की हत्या के बाद फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। वह महीना पहले पत्नी की मौत से परेशान था। इसका खुलासा मौके से मिले 8 पन्ने के सुसाइड नोट से हुआ। इसमें लिखा है मैं पत्नी के बिना नहीं रह सकता। अब उसी के पास जा रहा हूं। मेरे मरने के बाद किसी भी रिश्तेदार को एक तिनका मत उठाने देना।

गेहूं जानवरों काे खिला देना और सामान और घर बेचकर गुरुद्वारे को दान कर देना। घटना का पता चलते ही डीएसपी जसवीर सिंह और थाना दयालपुरा पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने चारों शवों को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में भिजवा दिया है। मृतकाें की पहचान बेअंत सिंह, 7 साल का बेटा प्रभजोत सिंह, 3 साल की बेटी खुशप्रीत कौर और सवा साल की बेटी सुखप्रीत कौर के तौर पर हुई है।

पुलिस ने पहले मृतक के खिलाफ हत्या का केस दर्ज करने के बाद पूरे मामले में धारा 174 की कार्रवाई की। बेअंत सिंह शहर में रिक्शा चलाता था। पत्नी लवप्रीत कौर की करीब एक माह पहले कैंसर से मौत हो गई थी। इसके बाद से वह मानसिक तौर पर परेशान था। वीरवार काे उसने यह कदम उठाया। इसके अलावा उसने पत्नी लवप्रीत कौर के वियोग में एक कविता भी लिखी।

सब अरदास करें, पांचों फिर से मिल जाएं...

मैं बेअंत सिंह... सत श्री अकाल। पत्नी लवप्रीत कौर से बेइंतहा प्यार था। तभी सोच लिया था कि मैं भी तेरे पीछे ही आऊंगा। भाइयो... मैंने जो करना था कर लिया। मेरी विनती है कि मेरी और मेरे बच्चों की लाशें किसी भी बहन-भाई या रिश्तेदारों को मत देना। घर में भी घुसने न देना। मेरी जगह, घर और सामान बेचकर गुरुद्वारा साहिब को दान कर देना। रिश्तेदारों को एक तिनका नहीं देना।

ससुराल को गांव में घुसने न देना। रिश्तेदार मुझे मारना चाहते थे। उनकी इच्छा पूरी हो गई। जब तक जगह नहीं बिकती तब तक मकान को ताला लगा देना। मुझे पता था मेरी मौत के बाद बच्चे उजड़ जाएंगे। इसीलिए उन्हें साथ ले जा रहा हूं। गेहूं जानवरों को डाल दें। पुण्य लगेगा। कोई रोये न सिर्फ भगवान से अरदास करना, इन पांचों को फिर से इकट्‌ठा कर दे।

पड़ोसी लखविंदर से विनती है कि जितना पैसा उन पर खर्च आएगा वो खर्च कर बाकी का पैसा जरूरतमंदो के इलाज में खर्च किए जाएं। मैं पहले भी अपने बच्चों का गला घोंट चुका हूं लेेकिन रब ने मेरा साथ नहीं दिया। आज मैंने ये काम कर ही दिया। - शुक्रिया वीरो

ये लिखी कविता

हुण आपणे हत्थी निक्कियां जींदा नूं दुख देणे पै गए लवप्रीत बिना सकदे नहीं रह अोये रब्बा सानू वी लै जाण जमदुतां नू कह ओये रब्बा बचाऊण लई मैं तो बांह ला लई पूरी बिना दस्से चली गई विच तेरी हजुरी रब्बा हुण अस्सीं सारे लभण आवांगे तेरियां रब्बा मिन्नतां करके नाल लै आवांगे दुनिया ते तां नहीं लभया उसदा टिकाणा, अखीर अस्सीं वी मौत सिख लई मन के तेरा भाणा इक ही मिन्नत करदां दातया साड्‌डी पंजयां दी इक ही बना दईं ढेरी, हमीरगढ़ वाले नू तां लोक रखणगे चेते, एहो जैहे प्यार विच नहीं हुंदे भुलेखे कर बैठा सी उहदे नाल वादे हुण पुगाउणे पै गए बेअंत हुण तां अपणे हत्थी निक्कियां जींदा नू दुख देणे पै गए

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