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मददगार कदम:खुद कोरोना मुक्त हुए तो गुरबाणी की धुन के बीच काढ़ा प्रसाद से मरीजों को कर रहे तंदरुस्त

बठिंडा9 दिन पहलेलेखक: एसएस सोनू
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सुखपाल सिद्धू अपनी पत्नी के साथ काढ़ा प्रसाद तैयार करते हुए। - Dainik Bhaskar
सुखपाल सिद्धू अपनी पत्नी के साथ काढ़ा प्रसाद तैयार करते हुए।
  • कोविड केयर सेंटर व अस्पतालों में रोज निशुल्क काढ़ा व मरीजों को ऑक्सीजन बांट रही सुख सेवा सोसायटी व वर्ल्ड कैंसर केयर टीम

पेशे से टीचर व सुखसेवा सोसायटी तथा वर्ल्ड कैंसर केयर के मेन टीम मेंबर सुखपाल सिंह सिद्धू 7 मार्च को जब कोरोना संक्रमित हुए तो उन्होंने अपने परिवार को गांव भेज दिया, लेकिन उनकी धर्मपत्नी छिंदरपाल कौर ने जाने से इनकार कर उनके साथ रहने का निर्णय लिया तथा करीब 15 दिनों तक दोनों पति-पत्नी ने कोरोना में जिंदगी का सबसे मुश्किल वक्त देखा, लेकिन आयुर्वेदिक काढ़े की जानकारी होने पर उन्होंने घर पर इसे तैयार कर सुबह व शाम खुद सेवन किया जिससे उन्हें बदत्तर हालत में भी स्वास्थ लाभ मिला व वह और उनकी पत्नी संक्रमण मुक्त हो गए, लेकिन ठीक होने के बाद उन्हें बाकी कोरोना मरीजों का ख्याल दिल में आया।

इसके लिए कुछ करने के बाबत अपनी पत्नी के अलावा टीम सदस्य राकेश नरूला, पवनप्रीत सिंह, हरप्रीत सिंह गगन व सरबजीत ग्रोवर से इस प्रोजेक्ट पर चर्चा की तथा उन्होंने भी इस काम को सेवा मानते हुए सहयोग का आश्वासन दिया तथा रोजाना पांच सदस्यीय इस टीम ने शाम 5 बजे अस्पतालों व कोविड केयर सेंटरों में काढ़ा प्रसाद का निशुल्क वितरण शुरू कर दिया व वर्तमान में बठिंडा के 6 कोविड अस्पतालों व चेरिटेबल कोविड केयर सेंटर में टीम निशुल्क करीब 150 से 160 गिलास काढ़ा स्टील कैटल में भरकर बांटने जा रहे हैं जहां लोग अब अपने मरीजों को काढ़ा देने को उनका इंतजार करते हैं।

सुखपाल सिंह सिद्धू कहते हैं कि उनकी पत्नी डटकर साथ खड़ी हो गईं व कोरोना में खुद व मुझे संभाला। ठीक होने पर अब वह रोजाना बाजार से जड़ी-बूटियां खरीदने के बाद इसे पीसकर अंगीठी पर लकड़ी की आंच में उबालकर काढ़ा बना इसका वितरण करते हैं। बकौल सुखपाल सिद्धू, जब तक बठिंडा में कोरोना खत्म नहीं होता, वह टीम सहित काढ़े की सेवा को जारी रखेंगे। वहीं टीम ने जरूरतमंद लोगों को ऑक्सीजन का भरा सिलेंडर अपनी जेब से उपलब्ध करवाने का काम भी शुरू किया है।

पॉजिटिव होने पर झेली बेहद मुश्किलें, अब दूसरों को संभाल रहे

सुखपाल सिंह सिद्धू कहते हैं कि 7 मार्च को वह व 10 मार्च को उनकी पत्नी के पॉजिटिव आने के बाद उन्होंने परिजनों व बच्चों को गांव भेज दिया तथा इस दौरान बेहद कठिन समय उन्होंने देखा। रिश्तों की असलियत का उन्हें कोरोना में पता चला जहां जान पहचान वाले लोग फोन तक करने बंद कर गए, लेकिन कई लोग उन्हें वह सामान्य जानते थे, उनसे नजदीक से जुड़ गए। सुखपाल कहते हैं कि कोरोना के 15 दिन उन्होंने व पत्नी ने बेहद बदत्तर स्थिति में काटे। सांस तक आनी बंद हो रही थी, लेकिन उनकी पत्नी ने उन्हें काढ़े का सेवन करवाया जिसका पॉजिटिव प्रभाव आया तथा वह व उनकी पत्नी जल्द ठीक हो गए।

वहीं सुखसेवा सोसायटी के अन्य सदस्य पवनप्रीत सिंह व उनकी धर्मपत्नी के पॉजिटिव आने पर काढ़ा दिया तो वह भी जल्द ठीक हुए। इसके बाद टीम अब दो माह से काढ़े का वितरण कर रही है जिसे कोविड सेंटर्स के डाक्टर्स भी सेवन करते हैं। सुखपाल सिंह ने बताया कि काढा डिलीवर करने को उनके अंकल अजीत सिंह दुआ ने एसी कार दी है जिसका पैट्रोल खर्च भी वह वहन करते हैं। उन्होंने कहा कि जड़ी-बूटियों की खरीद पर रोजाना करीब 2 हजार खर्च आता है जिसे वह चारों दोस्त आपस में शेयर करते हैं।

इन चीजों से बनता है काढ़ा
निष्काम भाव से मरीजों की सेवा में जुटे सुखपाल सिंह और छिंदरपाल कौर ने बताया कि कि काढ़ा बनाने के दालचीनी, बड़ी इलायची, छोटी इलायची, सुंड, विनक्शा, तुलसी, गिलोय, अदरक, अजवायन, सौंफ, काली मिर्च, पुदीना व कच्ची हल्दी का इस्तेमाल होता है, लेकिन इसमें चीनी या शक्कर का उपयोग बिल्कुल भी नहीं करना है। थोड़ा कड़वा लगने पर ब्राउन शूगर इस्तेमाल कर सकते हैं।

सुबह 11 बजे गुरबाणी के सानिध्य में तैयार होता है
सुखपाल बाजार से रोजाना 13 तरह की जड़ी-बूटियां खरीदकर उसे सुबह साफ कर पीसते हैं। इसके बाद लकड़ी की आंच पर उनकी पत्नी पानी में इन जड़ी-बूटियों को मध्यम आंच पर गुरबाणी के सानिध्य में करीब 4 घंटा पकाती हैं। इसके बाद काढ़ा तैयार होता है जिसे रोजाना शाम को पांच बजे वह काढ़ा मैरिटोरियस कोरोना केयर चेरिटेबल, खालसा अस्पताल, मेडीसिटी, निवारण तथा मैट्रो अस्पताल में मरीजों व उनके परिजनों को दे रहे हैं तथा जो भी मरीज उनसे यह काढ़ा ले रहे हैं, उन्होंने सभी ने सेहत में इंप्रूव किया है।

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