इमरजेंसी अलार्म बंद, अटकी मरीजों की सांस:मरीज सांस लेने के लिए तड़पने लगे तो पता चलता है ऑक्सीजन हुई खत्म, परिजन बदल रहे सिलेंडर

बठिंडा6 महीने पहलेलेखक: चंदन ठाकुर
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काेरोना के बढ़ते मरीजों को लेकर जहां सेहत विभाग चिंता में है ताे सरकारी अस्पताल में बने कोरोना वार्ड में दाखिल मरीजों के लिए ऑक्सीजन की कमी भी चिंता बनी हुई है। वहीं सेहत विभाग की लापरवाही के चलते कोरोना मरीजों की सांसें अटक रही हैं। कोरोना वार्ड में ऑक्सीजन खत्म होने का अलर्ट देने के लिए लगाया गया इमरजेंसी अलार्म ही बंद कर दिया है। कोरोना वार्ड के हालात ये हैं कि मरीज तड़पने लगते हैं तो पता लगता है कि ऑक्सीजन खत्म हो गई है, उसके बाद सिलेंडर बदलने की कार्रवाई शुरू की जाती है, जिसमें भी करीब 15-20 मिनट का गैप पड़ रहा है, तब तक सांसें जिंदगी व मौत के बीच अटक रही हैं। अब मरीजों के परिजनों को ही सिलेंडर बदलने पड़ रहे हैं।

53 कोरोना मरीजों की जिंदगी दांव पर

सिविल अस्पताल में इन दिनों ऑक्सीजन लेवल कम होने वाले 53 के करीब मरीजों की जिंदगी पर अस्पताल की लापरवाही भारी पड़ रही है। तलवंडी साबो के रहने वाले गुरदीप सिंह का कहना है कि उसके पिता बोघा सिंह काेरोनावार्ड में दाखिल हैं। इमरजेंसी अलार्म को बंद कर दिया है। जब तक कोरोना मरीज बेड पर तड़पने नहीं लगते तब तक सेहत कर्मी ये नहीं देखते कि ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म हो चुका है। वो और उसके चचेरा भाई गुरमीत सिंह मुलाजिम आ जाए तो ठीक है नहीं तो खुद सिलेंडर बदलते हैं।

सिलेंडर बदलने के लिए मुलाजिम तैनात हैं

कोरोना वार्ड में आक्सीजन के सिलेंडरों को बदलने के लिए कर्मचारी तैनात हैं। अगर फिर भी कोई समस्या आ रही है तो वो उसे चेक करवा लेते हैं। -डा. मनिंदरपाल सिंह, एसएमओ, सिविल अस्पताल

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