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समस्या:इलेक्ट्रिक भट्टी का अभाव, चार गुना लकड़ियों की खपत; सुबह से शाम तक लग रही वेदियां

बठिंडा2 महीने पहले
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  • कोरोना से मौतों की संख्या बढ़ने पर रामबाग में बढ़ी संस्कारों की संख्या

कोरोना संक्रमण के इस कठिन दौर में हालत कभी इस कदर दर्दनाक होंगे, किसी ने नहीं सोचा था। सामान्य दिनों के मुकाबले 1 अप्रैल के बाद से हालात यह हो गए हैं कि शायद ही अब कोई दिन होगा जिसमें कोरोना मरीजों का अंतिम संस्कार नहीं किया गया हो। श्मशान भूमि में पहुंचने वाले शवों का आंकड़ा चार गुना बढ़ने के बाद जहां लोगों को अंतिम संस्कार के लिए इंतजार करना पड़ रहा है, वहीं 20 वेदियां भी कम पड़ने के बाद फर्श के ऊपर संस्कार करने पड़ रहे हैं।

आलम यह है कि अगर सामान्य दिनों में 12 से 15 क्विंटल तक लकड़ी लगती थी, वहीं अब आलम यह है कि रोजाना 60 से 70 क्विंटल लकड़ी की खपत होने लगी है। संस्कारों की संख्य बढ़ने के बाद लकड़ियां काटने का काम रामबाग के आरे पर अब हर रोज 7 से 8 घंटे तक लगातार चलता है, जबकि सामान्य एक सप्ताह में यह मात्र दो दिन ही चलाया जाता था।

15 अप्रैल के बाद कोरोना महामारी से मरने वालों के अलावा अन्य बीमारियों से मरने वालों की वजह से यह आंकड़ा दोगुणा तक पहुंचने को है जबकि सामान्यता पहले 6 से 7 संस्कार बमुश्किल होते थे। हालात ऐसे खराब हैं कि रामबाग में काम करने वाले कर्मी सुबह 5 बजे रामबाग में पहुंचने के बाद देर रात घर जाते हैं जिसमें उन्हें भोजन को वक्त मिल जाए तो गनीमत मानिएगा।

रोज 7 से 20 मौतें हो रहीं रामबाग पर बढ़ा दबाव
जिले में इन दिनों कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा हर रोज बढ़ रहा है। पिछले 5 दिनों से रोजाना 7 से लेकर 20 पॉजिटिव लोगों की मौत हुई है। ऐसे में इस रामबाग पर काम का बेहद दबाव बना हुआ है। जहां लकड़ी की खपत में 4 गुना की बढ़ोतरी हो चुकी है, वहीं इन दिनों प्रतिदिन 60 से 70 क्विंटल लकड़ी रोजाना अंतिम संस्कार में उपयोग हो रही है। इस कारण लकड़ी की पूर्ति की भी चिंता सताने लगी है।

किसी भी रामबाग में नहीं इलेक्ट्रिक फ्यूनरल मशीन
शहर के तीनों श्मशानघाटों में सीएनजी या इलेक्ट्रिक फ्यूनरल मशीन नहीं लगी है। लकड़ी रामबाग के पास ही स्थित लकड़ मंडी से खरीदी जाती है। अगर इलेक्ट्रिक फ्यूनरल मशीन स्थापित की जाए तो लकड़ी की खपत बेहद कम हो सकती है, लेकिन इसके अभाव में पर्यावरण पर दबाव बेहद अधिक हो रहा है। हालांकि डीएवी रोड रामबाग में मशीन है, लेकिन उसका इस्तेमाल नहीं होता है।

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