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हेल्थ:अब एमडीआर टीबी मरीजों का टैबलेट से होगा इलाज

बठिंडा11 दिन पहले
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मल्टी ड्रग रजिस्टेंस (एमडीआर) टीबी से जूझ रहे मरीजों को अब इंजेक्शन का दर्द नहीं झेलना होगा। एक गोली उन्हें अब बीमारी की गिरफ्त से बाहर निकालेगी। इलाज का यह नया पैटर्न जल्द ही पंजाब में लागू हो जाएगा। संबंधित अधिकारियों के अनुसार अक्टूबर में दिन निश्चित होते ही लांच कर दिया जाएगा। अब तक एमडीआर टीबी के मरीजों को केनामाइसिन इंजेक्शन लगाया जाता था। फिलहाल जिले में एमडीआर मरीजों की संख्या 20 है। इसके अलावा निजी अस्पताल में 285 और सरकारी अस्पताल में 1243 टीबी मरीज रजिस्टर्ड हैं। इलाज के दौरान यह इंजेक्शन मसल्स में करीब चार से छह महीने तक लगाया जाता है।

अब उन्हें बिडाक्वीन टेबलेट दी जाएगी। ये टैबलेट सिर्फ सरकारी अस्पतालों में ही उपलब्ध होगी। बाजार में यह टैबलेट नहीं मिलेगी। इस नए तरीके से इलाज को लेकर सेहत विभाग ने सभी जिला टीबी अधिकारियों को प्रशिक्षण दे दिया है। बठिंडा की जिला टीबी अफसर डाॅ. रोजी अग्रवाल का कहना है कि एमडीआर मरीज को टीबी की सामान्य दवाइयां असर नहीं करती हैं। उनके लिए अलग से दवा होती है जो काफी महंगी होती है।

गर्भवतियों व बच्चों के लिए भी है सुरक्षित
डाॅ. रोजी अग्रवाल का कहना है कि एमडीआर टीबी से जूझ रही गर्भवती महिला को यह इंजेक्शन नहीं लगा सकता। इससे गर्भ में पल रहे बच्चे पर बुरा असर पड़ सकता है। टैबलेट इंजेक्शन की तुलना में 13 प्रतिशत अधिक प्रभावी है। गर्भवती व बच्चों के लिए भी सुरक्षित है। इस टैबलेट को बाकी दवाइयों के साथ रोज लेना होगा।

छह महीने में मरीज को 188 टैबलेट दी जाएगी। इलाज का यह तरीका देश के सात राज्यों में शुरू हो रहा है। इनमें पंजाब भी शामिल है। बठिंडा में एमडीआर टीबी के 20 मरीज हैं। हर महीने 10-15 नए मरीज मिले हैं। डाॅ. रोजी अग्रवाल के मुताबिक टीबी बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है, जो हवा के जरिए एक इंसान से दूसरे में फैलती है।

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