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अनूठे अंदाज में खुशी जाहिर:बेटी के जन्म से घर हुआ रोशन, ‘कुदरत’ को घर ले जाने के लिए फूलों से सजाई कार

बठिंडा12 दिन पहले
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  • सामाजिक बदलाव से धुल रहा पंजाब पर लगा कुड़ीमार का कलंक, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान से प्रेरित होकर लोगों के लिए पेश की मिसाल

(चंदन ठाकुर) पंजाब के सिर किसी समय कुड़ीमार का कलंक लगता रहा है और अक्सर कन्या भ्रूण हत्या की खबरें सुनने और देखने मिलती रही हैं। इसे सरकार का प्रयास कहें या लोगो की जागरूकता। धीरे-धीरे ही सही, लेकिन अब बेटी के पैदा होने पर भी बेटों के बराबर खुशी मनाई जा रही है।
बठिंडा के एक शख्स ने बेटी के जन्म पर अनूठे अंदाज में खुशी जाहिर की। गुरु नानक पुरा वासी नरिंदर कुमार अस्पताल में पैदा हुई बेटी को फूलों से सजी कार में घर लाए। घर में दाखिल होने से पहले रिश्तेदारों ने वो सभी रस्में निभाई जो एक लड़के के पैदा होने पर की जाती हैं। नरिंदर कुमार के घर पहला बच्चा बेटी पैदा हुई। बेटी के जन्म पर पूरे परिवार में खुशियों का माहौल है और बेटी के जन्म की खुशी में गली में मिठाइयां भी बांटी गई।

नरिंदर कुमार कहते हैं कि आज लड़की किसी भी क्षेत्र में लड़के से कम नहीं है। इसलिए लड़के और लड़की में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। लड़की को भी बराबर का दर्जा देना चाहिए। गुरु नानक पुरा के रहने वाले नरिंदर कुमार ने बताया कि वह महिलाओं का बहुत सम्मान करते हैं। जब उनकी शादी नहीं हुई तो वह परमात्मा के आगे अरदास करते थे कि शादी के बाद जब उनके घर में संतान पैदा हो वो लड़की हो।

जब उन्हें पता चला उनके घर बेटी ने जन्म लिया है ताे उनकी खुशी का कोई ठिकाना न रहा। उन्होंने बेटी के सम्मान के लिए एक कार को फूलों से सजाया और बेटी को फूलों वाली कार में घर लेकर आए और लोगों में मिठाइयां बांटीं। समाजसेवी वीनू गोयल ने कहा कि बेटा-बेटी से ही एक पूरा परिवार बनता है। बेटी के जन्म को भी परिवार की खुशियों का हिस्सा मानना चाहिए। हर पुरुष की सफलता के पीछे नारी का हाथ होता है यह पुरुष वर्ग नहीं भूले। वहीं अध्यापिका अंजू गर्ग का कहना है कि बेटियां बेटों की अपेक्षा ज्यादा भावात्मक होती हैं। बेटी के जन्म को भी परिवार की खुशियों का हिस्सा मानना चाहिए। आज समय यही कहता है। लड़का-लड़की के बीच किसी तरह का भेदभाव नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब में अब बदलाव देखने को मिल रहा है। लोग बेटों की तरह बेटियों के जन्म पर जश्न मनाने लगे हैं यह अच्छी बात है।

सो क्यों मंदा आखिए, जित जन्मे राजान : बेटी का नाम कुदरत रखा क्योंकि ये परमात्मा की देन

नरिंदर कुमार ने बताया कि जब वह बेटी को फूलों से सजी कार में अस्पताल से घर लेकर आए थे तो मोहल्ले वाले लोग पूछ रहे थे कि क्या आपके लड़का पैदा हुआ तो मैंने कहा कि हां मेरे घर लड़का पैदा हुआ है जब मोहल्ले के लोग घर आए तो उन्होंने देखकर कहा कि ये तो लड़की है तो मैंने कहा कि ये आपके लिए लड़की होगी लेकिन मेरे लिए लड़कों से भी बढ़कर है।

नरिंदर ने बताया कि श्री गुरु नानक देव जी ने कहा है कि सो क्यों मंदा आखिए, जित जन्मे राजान। यानी उन महिलाओं को क्यों बुरा कहें, जो राजाओं और शूर-वीरों-सब को पैदा करती हैं। उन्होंने बताया कि बेटी का नाम कुदरत रखा है क्योंकि ये परमात्मा की देन है। नरिंदर कुमार ने संदेश दिया लड़का-लड़की में भेदभाव नहीं करना चाहिए और कन्या भ्रूण हत्या न करें।

बेटी का जन्म होने पर जश्न मनाया, दरवाजे पर नीम बांधे

राजीव गांधी नगर के रहने वाले सुमित गर्ग ने बेटी के जन्म पर घर के मुख्य दरवाजे पर नीम बांधे। सुमित ने कहा कि लड़की-लड़का में काेई भेदभाव नहीं करना चाहिए। उन्हाेंने बेटी के जन्म पर ढोल की थाप पर जश्न मनाया और पूरे मोहल्ले में मिठाइयां भी बांटी।

पोती के जन्म पर घर के आगे बांधे नीम

समाज सेवी लाल चंद सिंह ने भी पोती के जन्म पर घर के मुख्य द्वार पर नीम बांधकर संदेश दिया कि लड़का-लड़की एक सामान हैं। इनमें कोई अंतर नहीं समझना चाहिए। लाल चंद सिंह ने बताया कि आज लड़कियां भी लड़कों के साथ कंधा मिलाकर हर फील्ड में बखूबी रोल अदा कर रही हैं।

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