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कार्बन मोनो आक्साइड गैस से खतरा:पराली के धुएं से अस्थमा, हार्ट अटैक, कैंसर व कोरोना मरीजों को खतरा

बठिंडा4 दिन पहले
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  • धुएं से कार्बन डाई आक्साइड, कार्बन मोनो आक्साइड खतरनाक गैस निकलती हैं, अगले कुछ महीने ज्यादा एहतियात बरतनी होगी

इस समय कोरोना अपने चरम पर है। यदि इस बीच पराली का धुआं आया तो कोरोना संक्रमण का दायरा बढ़ सकता है। पराली के धुएं से कार्बन डाई आक्साइड, कार्बन मोनो आक्साइड जैसी कई हानिकारक गैसें निकलती हैं। ये सांस लेने के दौरान शरीर के अंदर जाती हैं और फेफड़े व हृदय को नुकसान पहुंचाती हैं।

जिन लोगों में अभी बिना लक्षण के कोरोना की पुष्टि हो रही है, इन लोगों को अभी होम आइसोलेशन में ही इलाज की सुविधा प्रदान की जा रही है, लेकिन पराली जलने से बिना लक्षण वाले कोरोना मरीजों में भी संक्रमण लक्षण के साथ तेजी से उभर कर सामने आएंगे। हृदय रोग, अस्थमा और लंग के मरीजों में संक्रमण का खतरा पांच गुना तक बढ़ेगा। इस दौरान यदि व्यक्ति कोरोना संक्रमित हुआ तो उसे डबल नुकसान झेलना पड़ सकता है। लोगों को अगले कुछ महीने ज्यादा एहतियात बरतनी होगी।

वहीं सिविल अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन नए व पुराने 60 से 70 मरीज सांस की बीमारी से पीड़ित मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे है। इसी तरह कोरोना संक्रमित लगभग 100 से अधिक मरीज सांस की बीमारी से ग्रस्त हैं। ऐसे में यदि पराली जली तो धुएं से उनकी जान को खतरा बढ़ जाएगा। जिला प्रशासन की ओर से किसानों को जागरूक करने के साथ-साथ पराली को जलाने से रोकने के लिए जिले में नोडल अधिकारी तैनात कर दिए हैं। अधिकारियों का दावा है कि पराली को जलाने से रोकने के लिए हर तरह से खेतों पर नजर रखी जाएगी। 2007 में ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पराली जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन इस पर कभी गंभीरता से अमल नहीं हुआ।

इन बीमारियों का खतरा

प्रदूषित कण मानव शरीर में जाकर खांसी को बढ़ाते हैं। अस्थमा, डायबिटीज के मरीजों को सांस लेना दूभर हो जाता है। फेफड़ों में सूजन सहित टांसिल्स, इंफेक्शन, निमोनिया और हार्ट की बीमारियां जन्म लेने लगती हैं। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा परेशानी होती है। इतना ही नहीं, वायु प्रदूषण की वजह से डिप्रेशन और कैंसर तक होने का खतरा रहता है। ऐसे में सेहत विभाग ने आम लोगों से अपील कि जितना हो सके, घर के अंदर ही रहें। प्रदूषण की इस गंभीर स्थिति की वजह से पिछले कुछ दिनों में सरकारी अस्पतालों में अस्थमा और सांस से संबंधित मरीजों वृद्धि हुई है। सेहत विभाग का मानना है कि इस समय प्रदूषण गंभीर श्रेणी में है, इसलिए बाहर जाने से बचें।

घर से मास्क लगाकर निकलें, गर्भवती महिलाएं बाहर न जाएं

एमडी मेडिसन डॉ. रमनदीप गोयल का कहना है कि पराली का धुंआ अस्थमा, हार्ट अटैक, कैंसर मरीजों के अलावा कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए भी घातक है। बुजुर्ग (जिन्हें अस्थमा या सांस से जुड़ी कुछ बीमारी है) दवा और इन्हेलर रेगुलर लेते रहें। साथ ही निमोनिया वैक्सीनेशन भी जरूर करवाएं। गर्भवती महिलाएं घर से बाहर निकलने से बचें और साथ ही घर में भी मास्क लगाकर रहें। छाती रोग विशेषज्ञ डाॅ. मनु गुप्ता ने बताया कि इन दिनों खेतों में जलाई जा रही पराली से कई घातक बीमारी पैदा होती है। वर्तमान में कोरोना कहर जारी है, अधिकतर कोरोना संक्रमित मरीज सांस, छाती में इंफेक्शन व ऑक्सीजन लेवल की कमी से पीड़ित है। ऐसे में कोरोना मरीजों के लिए पराली का धुंआ सबसे अधिक घातक साबित होगा। बुजुर्गों और युवाओं को खांसी जुकाम अपनी चपेट में ले रहा है।

बच्चों को बाहर जाने से रोकें : डॉ. रविकांत

सिविल अस्पताल के चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. रविकांत का कहना है कि प्रदूषण का स्तर ज्यादा हो, तो बच्चों को बाहर खेलने से रोकें। बच्चों को बाइक या स्कूटर से जाते वक्त फेस मास्क का प्रयोग करें। इन दिनों खेतों में जलाई जा रही पराली का धुंआ हर तरह के मरीजों के लिए घातक है व नई बीमारी को भी जन्म देगी। माहिर डाक्टरों के अनुसार प्रदूषित हवा के सूक्ष्म कण सांस लेते समय खून में जमा हो जाते हैं। इसके कारण अस्थमा, हार्टअटैक, कैंसर जैसी बीमारियां हो सकती हैं।

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