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तीसरी लहर से बच्चों को बचाना होगा:अस्पताल में दवाएं हैं, लेकिन 48 फीसदी स्पेशलाइज्ड टेक्नीकल स्टाफ की कमी

बठिंडा9 दिन पहलेलेखक: संजय मिश्रा
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स्टाफ की कमी पूरी करना होगा बड़ा चैलेंज - Dainik Bhaskar
स्टाफ की कमी पूरी करना होगा बड़ा चैलेंज
  • स्टाफ के अभाव में ही 29 वेंटीलेटर प्राइवेट अस्पतालों को सौपें गए थे

बठिंडा में दूसरी लहर में कोरोना संक्रमण की रफ्तार अब कुछ धीमी पड़ती नजर आ रही है। वहीं तीसरी लहर की आशंका ने दिल्ली से लेकर सभी राज्यों की सरकार को बुरी तरह जकड़ा हुआ है तथा इसमें सबसे अधिक बच्चों के प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की गई है, लेकिन सरकारी तंत्र के हालात देखें तो तीसरी लहर में बच्चों की सुरक्षा करने को सेहत विभाग के पास हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर बेहद कमजोर नजर आ रहा है जिसमें चिकित्सकों और संसाधनों की कमी बेहद चिंता का विषय है।

हालात यह हैं कि टेक्नीकल स्टाफ के अभाव में पीएम केयर फंड से कोरोना संक्रमण में गंभीर मरीजों के इलाज के लिए जिला अस्पताल को भेजे 29 वेंटीलेटर अपर्याप्त स्टाफ के कारण निजी अस्पतालों को सौंप दिए गए थे जिसके बाद ही कहानी सभी को अच्छी तरह से मालूम है। मानक के अनुसार सीएचसी व पीएचसी स्तर पर एक-एक बालरोग विशेषज्ञ जरूरी है। ऐसे में तीसरी लहर में चिकित्सकों और संसाधनों की कमी परेशानी का कारण बन सकती है जबकि जिले में 48 फीसदी स्टाफ कम है।

विभाग का दावा : स्टाफ भर्ती प्रक्रिया शुरू हो गई है

तीसरी संभावित लहर के मद्देनजर सरकारों की नजर जिलों में वूमेन एंड चिल्ड्रन अस्पतालों पर टिकी हुई है, लेकिन असलियत यह है कि राज्य में शायद ही कोई ऐसा सिविल अस्पताल होगा जहां किसी तरह की कमी मौजूद नहीं हो। बठिंडा के वूमेन एंड चिल्ड्रन अस्पताल में स्टाफ संबंधी पड़ताल करने पर पता लगा कि अस्पताल में इन दिनों 6 शिशु रोग माहिर डाक्टर ड्यूटी कर रहे हैं, जबकि विभाग की ओर से करीब 12 मेडिकल ऑफिसरों की नियुक्ति की गई है।

ऐसे में पड़ताल में यह सामने आया कि 6 मेडिकल आफिसर वूमेन एंड चिल्ड्रन में ड्यूटी की बजाय सिविल अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड व अन्य स्थानों पर तैनात किए गए हैं। चिल्ड्रन अस्पताल में करीब 33 स्टाफ नर्स की पोस्ट हैं जबकि वर्तमान में मात्र 22 स्टाफ नर्स ही तैनात हैं।

इसमें भी अधिकांश स्टाफ नर्स की ड्यूटी इन दिनों कोविड वैक्सीनेशन कैंपों में लगी हुई है। इसी तरह सिविल अस्पताल सहित पूरे जिले के सीएचसी और पीएचसी में डॉक्टरों के 48 प्रतिशत पद रिक्त हैं जबकि लेबोरेटरी टेक्नीशियन की 65 प्रतिशत, स्टाफ नर्स की 52 प्रतिशत और दर्जा चार कर्मचारियों के 53 प्रतिशत पद रिक्त हैं जिसे भरने को सरकार कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। वहीं अधिकारियों के अनुसार सरकार व विभाग की ओर से स्टाफ भर्ती प्रक्रिया शुरू हो गई है। जिसमें 432 डॉक्टरों की नियुक्ति की जा रही है।

क्या कहते हैं सिविल सर्जन

कोरोना संक्रमण की चपेट में आने से प्रभावित बच्चों को दाखिल कर इलाज के लिए अलग-अलग तरह की करीब 300 बेड का आइसोलेशन वार्ड तैयार करने का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया गया है। इसमें आईसीयू, ऑक्सीजन बेड व बिना ऑक्सीजन बेड शामिल होगा। ताकि तीसरी लहर में किसी प्रकार की अचानक कोई कमी ना आए।

डा. तेजवंत ढिल्लों, सिविल सर्जन, बठिंडा

बच्चों के लिए 300 बेड के अस्पताल की बन रही योजना

कोरोना संक्रमण की चपेट में आने से प्रभावित बच्चों को दाखिल कर इलाज के लिए अलग-अलग तरह की करीब 300 बेड का आइसोलेशन वार्ड तैयार करने का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया गया है। इसमें आईसीयू, ऑक्सीजन बेड व बिना ऑक्सीजन बेड शामिल होगा।

सिविल अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड बनाने की तैयारी शुरू हो गई हैं, सिविल अस्पताल में करीब 200 बेड तथा रिफाइनरी के नजदीक बन रहे कोविड सेंटर में 100 बेड का आइसोलेशन वार्ड बनाया जा रहा है।

इसी तरह जरूरत अनुसार आईसीयू वेंटीलेटर व अन्य सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। संसाधनों को सही तरह से चलाने के लिए ट्रेंड स्टाफ भी तैनात किए जाएंगे। वहीं कुछ दिनों में सिविल अस्पताल में नया ऑक्सीजन प्लांट भी शुरू हो जाएगा। अस्पताल के सभी वार्ड को ऑक्सीजन प्वाइंट से जोड दिया जाएगा।

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