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आयोजन:3 दिवसीय जोड़ मेला शुरू, 1 किमी लंबा नगर कीर्तन सजाया, दिनभर चले समागम

संगरूर3 महीने पहले
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20वीं सदी के महान विद्यादानी संत बाबा अतर सिंह जी महाराज श्री मस्तुआना साहिब वालों की 94वीं बरसी को समर्पित मालवा क्षेत्र का प्रसिद्ध वार्षिक जोड़ मेला शनिवार को गुरुद्वारा गुरसागर मस्तुआना साहिब में शुरू हो गया है। तीन दिन तक चलने वाले इस जोड़ मेले में पंजाब भर से लाखों की संख्या में श्रद्धालु गुरुद्वारा साहिब में नतमस्तक होंगे।

पहले दिन संत बाबा अतर सिंह जी की याद को समर्पित संगरूर के गुरुद्वारा ज्योति सरूप से भव्य नगर कीर्तन निकाला गया। कीर्तन में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने शिरकत की। नगर कीर्तन करीब एक किलोमीटर तक लंबा था। शनिवार को शहर के गुरुद्वारा ज्योति सरूप से शुरू हुए नगर कीर्तन की अगुवाई पांच प्यारों ने की।

नगर कीर्तन में गत्तका पार्टियों ने हैरतअंगेज करतब दिखाए। नगर कीर्तन छोटा चौक, बस स्टैंड, महावीर चौक, पुलिस लाईन, गांव बडरूखा से होते हुए देर शाम मस्तुआना साहिब में जाकर संपन्न हुआ। जगह-जगह पर श्रद्धालुओं ने लंगर लगाकर नगर कीर्तन का स्वागत किया।

श्री अखंड पाठ के भोग कल, संगत को गुरु शबद से जोड़ेंगे रागी

संत बाबा अतर सिंह गुरसागर मस्तुआना ट्रस्ट के प्रतिनिधि दलजीत सिंह, अकाल कॉलेज कौंसिल के प्रतिनिधि डॉ. भुपिंदर सिंह पूनिया, जसवंत सिंह खैहरा ने बताया कि 31 जनवरी को प्रसिद्ध रागी ढाडी प्रचारक संत महापुरुष संगत को गुरु शबद से जोड़ेंगे। दोपहर 2:30 से 3:30 बजे तक गुरबाणी का प्रचार होगा। 1 फरवरी को श्री अखंड पाठ साहिब के भोग डाले जाएंगे। गुरमति समागम में संगत को गुरबाणी से निहाल किया जाएगा। रविवार को संत किशन सिंह यादगारी खेल मैदान में सुबह से शाम तक धार्मिक दीवान सजाए जाएंगे।

शनिवार सुबह गुरुद्वारा गुरसागर मस्तुआना साहिब में श्री अखंड पाठ साहिब शुरू हुए। इसके साथ ही गुरमति समागम, अंतर स्कूल शबद गायन, कविशरी व दस्तार मुकाबले भी करवाए गए। संत, कथावाचक, रागी जत्थे, ढाडी जत्थों ने संगत को गुरबाणी से निहाल किया। श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में पहुंच कर सरोवर में डुबकी लगा गुरुद्वारा साहिब में माथा टेका।

इन गांवों ने लगाया लंगर
पुलिस लाइन, बडरूखां, कुनरां, दुग्गां, बहादरपुर, कांझला, पेधनी, लिदडा, पुनावाल, हरेडी, तुंगा, कलारा, उपली, चट्ठे, लखमीरवाला, ढढोगल, बालियां, बडबर, भैणी, मराज, हरीगढ़ आदि गांवों द्वारा जगह जगह पर विभिन्न तरह के लंगर लगाए गए थे। जिसमें मक्की की रोटी सरसों का साग, दही परांठा, पकौडे, देसी घी पंजीरी, जलेबिया, चाय, गन्ने का रस के लंगर शामिल थे।

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