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हड़ताल:300 मुलाजिम अनिश्चितकालीन हड़ताल पर, 60 रूट प्रभावित, यात्रियों ने निजी बसों की छत पर किया सफर

संगरूर19 दिन पहले
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हड़ताल के कारण बसों की छतों पर सफर करने के लिए मजबूर यात्री। - Dainik Bhaskar
हड़ताल के कारण बसों की छतों पर सफर करने के लिए मजबूर यात्री।

रेगुलर करने की मांग को लेकर सोमवार को पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी के 300 कच्चे कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। 75 प्रतिशत सरकारी बसें डिपो से बाहर नहीं निकली। 80 में से 60 से अधिक रूटों पर बसें नहीं चलीं, इससे पूरा दिन यात्री भटकते रहे। सबसे अधिक परेशानी प्रतिदिन यात्रा करने वाले यात्रियों को उठानी पड़ी। हड़ताल के कारण यात्रियों ने निजी बसों की छतों या निजी वाहनों में सफर किया।

हड़ताल के कारण विभाग को करीब 13 लाख रुपए का नुक्सान हुआ। यूनियन का कहना है कि ट्रांसपोर्ट मंत्री से तीन बार बैठक हो चुकी है बावजूद इसके मांगों का कोई हल नहीं हुआ, इसके चलते उन्हें अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाना पड़ा। सोमवार से पंजाब के 29 डिपुओं में 2200 पनबस व पीआरटीसी की बसों का चक्का जाम रहा। यूनियन ने चेतावनी दी कि मंगलवार से मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह निवास के समक्ष पक्का धरना शुरू किया जाएगा। बावजूद इसके मांगों का निपटारा न हुआ तो 8 सितंबर से नेशनल हाइवे ठप किए जा सकते हैं। रोडवेज मुलाजिमों की हड़ताल के कारण यात्री घंटों बस के इंतजार में खड़े रहे।

सरकार ने न मुलाजिमों को पक्का किया न ट्रांसपोर्ट माफिया खत्म किया : यूनियन

यूनियन के राज्य नेता जतिन्द्र गिल, परमिंदर सिंह, डिपो प्रधान जसविंदर जस्सी व सुखजिंदर सिंह ने कहा कि अपनी मांगों को लेकर कर्मचारी लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे पहले 4 बार बस स्टैंड के 2-2 घंटे गेट बंद कर सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने का प्रयास किया गया है। मांगें तो क्या माननी, हड़ताल पर गए कर्मचारियों को नोटिस निकाले जा रहे हैं। कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने से पहले कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने के वायदे किए थे। न तो कर्मचारियों को पक्का किया गया और न ही ट्रांसपोर्ट माफिया को समाप्त किया गया।

कच्चे कर्मचारियों की मुख्य मांगें
पनबस व पीआरटीसी के कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए।
पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी में कम से कम 10 हजार नई बसें डाली जाएं।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला बराबर कार्य, बराबर वेतन प्रबंधन की तरफ से लागू किया जाए।
रिपोर्टों की शर्तें रद्द कर सभी कर्मचारी बहाल किए जाएं।

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