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आदेश धुएं में:इस सीजन में 300 किसानों ने जला दी नाड़, एक ही दिन में 42 पर केस, 243 किसानों के जमीन खाते में रेड एंट्री

संगरूर4 महीने पहले
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  • नाड़ जलाना सेहत व खेती के लिए घातक
  • पकड़ेे जाने पर जुर्माना भी भरना पड़ेगा
  • फिर नहीं मान रहे जिले के किसान
  • संगरूर जिले में प्रशासन ने 7 लाख 70 हजार रुपए जुर्माना भी वसूला
  • संगठनों का तर्क }नाड़ को आग लगाने के सिवाय कोई विकल्प नहीं
  • चेतावनी- प्रशासन ने कार्रवाई न रोकी तो संघर्ष करेंगे

(पुनीत गर्ग)
जिले में पाबंदी के बावजूद किसानों ने गेहूं की नाड़ को आग लगाना शुरू कर दिया है। ऐसे में इसका खतरा आम व्यक्ति के साथ कोरोना मरीज को सबसे अधिक हो सकता है। हालांकि प्रशासन मामले में सख्ती दिखाते हुए 20 मई तक 98 मामलों में 243 किसानों के जमीन खातों पर लाल एंट्री कर किसानों को 7 लाख 70 हजार रुपए तक का जुर्माना भी किया है। बावजूद नाड़ को जलाना जारी है।

गुरुवार को भी 4 मामलों में 42 किसानों को नामजद किया गया है। इनमें जसविंदर सिंह, हरजीत कौर, बलजिंदर कौर, कुलविंदर कौर, राजनप्रीत कौर, यादविंदर सिंह व परमिंदर कौर निवासी माहोराना, बलविंदर सिंह निवासी लखेवाल, नाजर सिंह निवासी लखेवाल, मीत सिंह निवासी नाभा, निशान सिंह निवासी महसमपुर, फतेह सिंह, सरदारा सिंह, , गुरबिंदर सिंह, करनबीर सिंह, सुखजिंदर सिंह सभी निवासी घुमंड सिंह वाला, नंद सिंह निवासी आलोअर्ख, बेअंत सिंह निवासी भवानीगढ़, इंदरजीत सिंह निवासी माझा, महिंदर सिंह निवासी माझा, चरणजीत कौर निवासी नकटा, गुलजार सिंह निवासी राय सिंह वाला, गुरजीत सिंह, निर्मल सिंह व नाजर सिंह निवासी संगतपुरा, हरजिंदर सिंह निवासी झनेड़ी, महलदीप सिंह निवासी घराचों, गुरमेल सिंह निवासी रामगढ़, जसप्रीत सिंह निवासी फग्गूवाला, जरनैल सिंह निवासी फग्गूवाला, दलजीत कौर, बलजिंदर सिंह, भूपिंदर सिंह, मघ्घर सिंह, जगजीत सिंह, गुरविंदर सिंह, सिमरनप्रीत सिंह, मुखत्यार सिंह, छोटा सिंह, करतार सिंह व सुखदेव सिंह निवासी लौंगोवाल, मलकीत सिंह निवासी मंडेर कलां शामिल हैं। शुक्रवार तक करीब 300 किसानों पर नाड़ जलाने का मामला दर्ज किया जा चुका है। 

किसान संगठनों की मानें तो नाड़ को आग लगाने के सिवाय उनके पास कोई विकल्प नहीं है। संगठनों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि प्रशासन ने किसानों पर कार्रवाई का सिलसिला बंद न किया तो किसान संगठन संघर्ष के लिए मजबूर होंगे।

धुएं से कोरोना के मरीजों को और भी खतरा

बता दें कि पंजाब के मुख्यमंत्री की ओर से 9 मई को एक वीडियो जारी कर पंजाब के किसानों को नाड़ को आग नहीं लगाने की अपील की गई थी। सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की ओर से कहा गया था कि कोरोना महामारी के बीच नाड़ को आग लगाना और भी खतरनाक होगा, क्योंकि कोरोना फेफड़ों की बीमारी है। आॅक्सीजन की कमी होने से फेफड़े काम नहीं करते हैं। ऐेसे में कोरोना के मरीजों को और भी खतरा हो सकता है। बच्चों और बुजुर्गों के फेफड़े कमजोर होने के कारण उन्हें अधिक खतरा हो सकता है। ऐसे में प्रशासन की ओर से भी जिले के किसानों को नाड़ नहीं जलाने की अपील की गई थी।

धान की सीधी बिजाई को पहल दें किसान, नाड़ को जलाने की जरूरत नहीं पड़ती : डीसी थोरी 
जिले की बात की जाए तो जिले में करीब 2 लाख 90 हजार हेक्टेयर रकबे में गेहूं की बिजाई की गई थी। वर्तमान समय में किसान 2 लाख 66 हैक्टेयर पर धान की बिजाई की तैयारी में जुट गया है। ऐसे में डीसी घनश्याम थोरी ने स्थानीय जिला प्रबंधकीय कांप्लेक्स में खेतीबाड़ी विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में कहा कि इस सीजन के दौरान कोरोना महामारी के कारण अन्य राज्यों से धान की पनीरी लगाने के लिए लेबर की आमद कम होने की संभावना के चलते जिले के किसानों में धान की सीधी बिजाई का रुझान बढ़ गया है। इस तकनीक से जहां धरती के निचले पानी की बचत होगी वहीं किसानों पर आर्थिक बोझ भी कम पड़ेगा। सीधी बिजाई के लिए नाड़ को जलाने की जरूरत भी नहीं पड़ती है। 

धान की परमल किस्म की सीधी बिजाई का उचित समय 1 जून से 15 जून तक  

मुख्य खेतीबाड़ी अधिकारी संगरूर डॉ. जसविंदरपाल सिंह ग्रेवाल ने कहा कि धान की परमल किस्म की सीधी बिजाई का उचित समय 1 जून से 15 जून तक है। बासमती किस्म की बिजाई के लिए उचित समय 16 जून से 30 जून तक है। उन्होंने कहा कि धान की सीधी बिजाई केवल दरमियानी और भारी जमीनों में ही की जाए। हल्की जमीन में धान की सीधी बिजाई न की जाए। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि धान की कम समय लेने वाली किस्म पीआर 121, पीआर 122, पीआर 124, पीआर 126, पीआर 127, पीआर 128, पीआर 129, पीआर 114 आदि की बिजाई की जाए। 

बिजाई से पूर्व बीज ऐसे करें तैयार 

मुख्य खेतीबाड़ी अधिकारी के अनुसार धान की सीधी बिजाई से पहले धान के 8 किलोग्राम बीज को 8 से 10 घंटे के लिए पानी में भिगोकर गीली बोरी पर बिछाया जाए। जिसके बाद 24 ग्राम स्पिं्रट 75 डब्लयू एस दवा को 80-100 मिलीलीटर पानी में घोलकर बीज को अच्छी तरह से मसले। इसके बाद बीज को छाव में सूखाने के बाद बिजाई की जाए। धान की सीधी बिजाई करने के 21 दिन बाद ही पानी लगाया जाए। ताकि धान के पौधों की जड़ अपनी ताकत बना सके। उन्होंने किसानों को अपील की कि वह धान की सीधी बिजाई के बाद खेतीबाड़ी व किसान भलाई विभाग द्वारा प्रमाणित पैडीमेथलीन 50 प्रतिशत, बिसपाईरीबैक 10 एससी, अजिमसलफूरान 50 डीएफ आदि का प्रयोग माहिरों की सिफारिश अनुसार करें। 

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