विरोध प्रदर्शन / केंद्र ने लेबर कानून को तीन साल के लिए सस्पेंड कर दिया मजदूर फिर से गुलामी की जिंदगी जीने को मजबूर होंगे

Center suspends labor law for three years, workers will be forced to live life of slavery again
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Center suspends labor law for three years, workers will be forced to live life of slavery again

  • श्रम कानून में संशोधन करने पर केंद्र सरकार के विरोध में यूनियन

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

संगरूर. केंद्रीय ट्रेड यूनियन और मुलाजिम फेडरेशन के आह्वान पर सीटू एटक समेत विभिन्न संघर्षशील संगठनों ने शहर में रोष मार्च कर डीसी कार्यालय के समक्ष धरना दिया। प्रदर्शनकारियों की ओर से श्रम कानून में संशोधन करने के विरोध में केन्द्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की गई। इस दौरान संगठनों ने अपनी मांगों संबंधी तहसीलदार केके मित्तल को ज्ञापन भी सौंपा गया। इस मौके एटक के जिला प्रधान सुखदेव शर्मा, सीटू के जिला प्रधान प्रिंसिपल जोगिंदर सिंह औलख, एकटू के जिला प्रधान गोबिंद्र सिंह छाजली ने कहा कि मोदी सरकार ने बिना कोई सूचना दिए एकदम लॉकडाउन कर दिया। जिसके गंभीर नतीजे गरीब व मजदूर वर्ग को भुगतने पड़े है। 

हालात ऐसे हो गए है कि मजदूर कोरोना से नहीं बल्कि भूख से मर रहा है। कोरोना महामारी की आड़ में केन्द्र सरकार ने अपने नोटिफिकेशन के द्वारा लेबर कानून को तीन साल के लिए सस्पेंड कर दिया है। ऐसा होने से इस फैसले से मजदूरों की रक्षा करने वाले कानून लागू नहीं होंगे और मजदूर फिर से गुलामी की जिंदगी जीने के लिए मजबूर होंगे। एक मार्च से डीए में किया गया इजाफा वापस ले लिया गया है। इस मौके कामरेड इंदरपाल सिंह, कामरेड भरपूर सिंह बुलापार, कामरेड स्वर्णजीत सिंह, कामरेड रणजीत सिंह राणवा, मनदीप कुमारी व अन्य मौजूद थे।

इधर, बरनाला में डीसी दफ्तर के समक्ष धरना लगा कर बड़ी संख्या में मजदूरों ने प्रदर्शन किया। इस मौके गुरमीत सिंह सुखपुरा, भोला सिंह, खुशिया सिंह ने पर संबोधित किया।  उन्होंने पीएम व प्रदेश के सीएम के नाम पर मांग पत्र देते हुए लेबर कानून में किए गए बदलाव को तुरंत रद करने की मांग की।

यूनियन ने ये मांगेंं रखीं

कम से कम श्रम 21 हजार रुपए प्रति माह किया जाए, 1 मई को जारी किया डीए सबंधी नोटिफिकेशन लागू किया जाए और 9 मई को जारी किया नोटिफिकेशन वापस लिया जाए, श्रम कानून में किए गए मजदूर विरोधी संशोधन को वापस लिया जाए। काम का समय प्रतिदिन 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे करने का नोटिफिकेशन वापस लिया जाए। मुलाजिमों और पेंशनरों का डीए फ्रीज करने का फैसला वापस लिया जाए। आउट सोर्स, ठेके पर भर्ती कच्चे मुलाजिमों को पक्का किया जाए। जनतक अदारों का निजीकरण बंद किया जाए। आंगनबाडी, आशा, मिड-डे मिल और ग्रामीण चौकीदारों समेत सभी स्कीम वर्करों को श्रम कानून समेत सभी श्रम कानूनों के घेरे में शामिल किया जाए।

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