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नशा मुक्ति:चिट्टे ने किसी को पत्नी से तो किसी को परिजनों से किया दूर, अपनों ने दिया हौसला तो 3 युवक छोड़ रहे नशा

पुनीत गर्ग | संगरूर5 दिन पहले
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कई वर्ष नशे मे चूर रहने के बाद अब युवाओं ने नशे से तौबा करने का मन बना लिया है। शौक-शौक में लगी नशे की लत में न सिर्फ लाखों रुपए तक बर्बाद कर दिए बल्कि अपनों तक ने उनका साथ तक छोड़ दिया। जब सभी ने उन्हें दुतकार दिया व जिंदगी में आगे कोई रास्ता दिखाई न दिया तो नशे से तौबा करने का मन बनाया। अब नई उम्मीद की किरण और अपनों से मिलने की चाहत के साथ शहर के महावीर चौक स्थित नशा मुक्ति केंद्र में नौजवान नशामुक्त होने के लिए जद्दोजहद कर रहें हैं। नशा मुक्ति केंद्र मे इन मरीजों को दवा के साथ साथ पाठ, योगा, काउंसलिंग के जरिए नशे से बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा है।

नशा मुक्ति केंद्र के प्रोजेक्ट डायरैक्टर मोहन शर्मा का कहना है कि लत किसी भी चीज की हो बुरी होती है। नशे की लत से आजाद होना मुश्किल जरूर है लेकिन नामुमकिन नहीं। अगर सही तरीके से कोशिश की जाए, मरीज के साथ उसके परिजनों का साथ भी मिले तो यह मुश्किल भी आसान हो जाती है। मरीजों को नशा मुक्त करने के लिए उनका आत्मविश्वास बढाना बहुत जरूरी है। इसलिए केंद्र में हर तरह की गतिविधियों का समय तय किया गया है। मरीजों के इलाज के साथ- साथ उन्हें मोमबत्ती बनाना भी सिखाया जाता है।

चार साल में पी गया 1 करोड़ रुपए का चिट्टा
गांव रामपुरा के युवक ने बताया कि उसके पिता की 2014 में मौत हो गई थी। 14 एकड़ जमीन उसके नाम हो गई। चार वर्ष पहले गांव के ही एक युवक ने उसे शौक शौक में चिट्टे का सेवन करवा दिया। धीरे धीरे हालात ऐसे हो गए थे कि प्रतिदिन 15 हजार से लेकर 20 हजार रुपए का चिट्टा पीने लगा। वह अपने आढ़ती से कभी 50 हजार तो कभी 1 लाख रुपए उधार ले लेता था। जिस कारण 37 लाख रुपए कर्ज हो गया था। जमीन बेच चुका था। इस युवक 4 साल में 1 करोड़ का चिट्टा पी गया।

11 वर्षीय बेटे ने नशा छोड़ने के लिए किया प्रेरित

युवक ने 2020 में 6 माह में दोबारा उसने आढ़ती से 13 लाख रुपए ले लिए। घर वालों को उसके चिट्टे के सेवन का पता चलने पर उन्होंने आढ़ती को पैसे देने के लिए मना कर दिया। नशा मुक्ति केन्द्र में भर्ती होने से 2 दिन पहले 20 हजार की मांग को लेकर गाडी व घर में तोड़ किया था। आखिरकार घर वालों ने उसे 20 हजार दिए। शाम होते ही खर्च कर दिए थे। अब तक वह करीब 1 करोड रुपए के चिट्टे का सेवन कर चुका है और उसके लिए 22 बीघे जमीन बेच चुका है। पत्नी रूठ कर मायके चली गई। 11 वर्षीय बेटे ने उसे चिट्टा छोड़ने के लिए प्रेरित किया।

गाड़ी, बुलेट और 10 तोले सोना बेचा

गांव भुरथला मंडेर के युवक ने बताया कि उसकी मोबाइल की दुकान थी। दुकान पर काम करते एक लड़के ने उसे चिट्टा बेचने का लालच दिया। लालच में आकर उसने लड़के को चिट्टा लाने के लिए 1 लाख रुपए दे दिए। धीरे-धीरे चिट्टा बेचते बेचते वह खुद चिट्टे का सेवन करने लगा। हालात ऐसे हो गए कि उसने चिट्टे के लिए अपनी गाडी, बुलेट मोटरसाइकिल व 10 तोले सोना बेच दिया। घर वाले चिट्टा पीने से रोकते थे तो इसलिए नाराज होकर उसने ढाई वर्ष पहले घर छोड़ दिया था। ढाई वर्ष से उसकी दुकान भी बंद पड़ी है। आखिरकार उसकी महिला दोस्त ही उसका सहारा थी। जिसने उससे कहा कि यदि वह चिट्टा छोड़ देगा तो वह उसका साथ कभी नहीं छोडे़गी। जिसके बाद चिट्टा छोडने का मन बनाया। हालात ऐसे थे कि नशा मुक्ति केन्द्र में भर्ती होने से पहले 50 हजार का मोटरसाइकिल उसने 5 हजार में गिरवी रखा। नशे की हालत में एक्सीडेंट होने पर बेहोशी की हालत में नशा मुक्ति केन्द्र में भर्ती करवाया गया।

नशे के कारण 3 माह जेल में रहा
मोगा के युवक ने बताया कि उसने 2010 में मेडिकल नशे का सेवन किया था। धीरे धीरे मेडिकल नशा मिलना बंद हो गया व चिट्टा आम मिलने लगा। चिट्टा लेने के लिए 14 किलोमीटर दूर नशे के गढ़ गांव दौला सिंह में जाना पड़ता था। तीन चार साल बाद उसके परिजनों को चिट्टे की लत का पता चल गया। जिस कारण घर में क्लेश रहने लगा। परिजनों ने उसे पैसे देने बंद कर दिए तो वह खुद चिट्टा बेचने लगा। उसकी बुआ विदेश में रहती है। हर साल एक आईफोन उसे भेज देती थी। जिसे वह बेचकर चिट्टा ले लेता था। घर में पड़े सोने के गहने तक उसने बेच दिए थे। एक बार चिट्टे का सेवन करते हुए पुलिस ने पकड लिया था। 1 लाख रुपए देकर खुद पर गोलियों का केस बनवाया। ताकि जल्द जमानत हो सके। 3 महीने जेल में भी गुजारने पडे। हालात ऐसे थे कि परिजनों के साथ प्रतिदिन मारपीट होने लगी थी। माता पिता के आंसुओं ने उसे झिझोड़ कर रख दिया और उसने नशा मुक्त होने की ठानी। अब तक वह करीब 60 लाख रुपए के नशे का सेवन कर चुका है।

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