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डीसी ने की तारीफ:पराली जलाए बिना 18 एकड़ जमीन में खेती कर रहे चट्ठे नकटे गांव का किसान दलजिंदर सिंह

संगरूर5 दिन पहले
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  • आधुनिक संसाधनों के साथ गेहूं की बिजाई कर पर्यावरण को स्वच्छ रखने में दे रहे योगदान, डीसी ने की तारीफ

पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए गांव चट्ठे नकटे का किसान दलजिंदर सिंह पिछले 10 साल से पराली को आग लगाए बिना खेती कर रहे हैं। किसान दलजिंदर सिंह 18 एकड जमीन में आधुनिक संसाधनों के साथ गेहूं की बिजाई करके पर्यावरण को साफ-सुथरा रखने में अपना सहयोग डाल रहा है। डीसी रामवीर ने किसान की तारीफ करते हुए अन्य किसानों को भी पराली को बिना आग लगाए खेती करने की अपील की है। किसान दलजिंदर सिंह ने कहा कि उसने पराली की संभाल के लिए 2014 में सब्सिडी पर हैपीसीडर लेकर गेहूं की बिजाई शुरू की थी। इससे पहले वह 2010 से 2013 तक रोटावेटर से धान के खड़े अवशेष में गेहूं की बिजाई करता आ रहा है। दलजिंदर सिंह ने बताया कि 2018 में पंजाब सरकार द्वारा धान की पराली के प्रबंधन के लिए चलाई गई स्कीम क्राप रिजिडयू मैनेजमेंट के तहत रजिस्टर करवाए गए कस्टम हाइरिंग सेंटर(चट्ठे नकटे खेतीबाड़ी स्वसहायता ग्रुप) के प्रधान के तौर पर काम कर रहा है। जोकि 9 सदस्यों का ग्रुप है।

इस ग्रुप के सदस्यों द्वारा स्कीम अधीन 80 प्रतिशत उपदान पर खेती मशीनरी किसानों को वाजिब रेट पर किराए पर मुहैया करवाई जाती है। उन्होंने कहा कि पिछले सीजन दौरान 3 एकड़ रकबे में गेहूं की बिजाई मलचिंग के जरिये, 10 एकड़ रकबे में रोटावेटर के जरिये और 5 एकड रकबे में हैप्पीसीडर व आरएमबी ब्लो के जरिये की थी। उसने कहा मलचिंग के जरिये की गई गेहूं की बिजाई से उसे अच्छे नतीजे प्राप्त हुए। मलचिंग के जरिए बीजी गई गेहूं में गुल्ली डंडे की समस्या का सामना नहीं करना पड़ा और उसकी खेती लागत में भी कमी आई।

पराली जलाने से जमीन की उपजाऊ शक्ति कम होती है

मुख्य खेतीबाड़ी अधिकारी डॉ. जसविंदरपाल सिंह ग्रेवाल ने बताया कि इस बार धान के सीजन 2020 में 148 सहकारी सभाओं और कस्टम हाइरिंग सेंटरों को 80 प्रतिशत उपदान पर पराली प्रबंधन के आधुनिक संसाधन मुहैया करवाए गए है। जोकि छोटे व मध्य वर्गीय किसानों को पहल के आधार पर दिए जाएंगे।

उन्होंने कहा पराली जलाने से जमीन की उपजाऊ शक्ति कम होती है और मित्र कीटों का नुकसान होता है। पराली जलाने से पैदा हाने वाले धुएं से कई बार कीमती जान भी चली जाती है। डीसी रामवीर ने कहा कि वर्तमान में सभी किसानों को इस सोच से खेती करने की जरूरत है। जिससे मनुष्य की सेहत तंदरूस्त रहने के साथ साथ वातावरण भी साफ सुथरा रहेगा। उन्होंने किसानों को अपील की कि पराली को आग लगाए बिना गेहूं की बिजाई की जाए।

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