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  • Mahasadhvi Gave Discourses In The Religious Meeting In The Local Jain Place, Do Not Be Sad After Seeing The Happiness Of Others, Pay Attention To Their Hard Work Samarth Shri

प्रवचन:स्थानीय जैन स्थानक में धर्म सभा में महासाध्वी ने किए प्रवचन, दूसरों की खुशी को देखकर न हों दुखी उनके परिश्रम पर दें ध्यान- समर्थ श्री

संगरूर2 महीने पहले
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  • आयमल की तपस्या में प्रधान विजय जैन व गायत्री जैन 69वें दिन में

स्थानीय जैन स्थानक में धर्म सभा को संबोधित करते हुए महासाध्वी समर्थ श्री जी ने कहा कि जिस तरह हर फल का अपना-अपना स्वाद होता है उसी तरह हर मनुष्य का अपना स्वभाव होता है। हमें किसी के साथ अपनी तुलना नहीं करनी चाहिए। यदि हमें तुलना करनी ही है तो दूसरे व्यक्ति के अच्छे गुणों के साथ तुलना करें। जितना समय हम दूसरों के साथ तुलना में लगा देते हैं उतना समय यदि हम अपने आप को तराशने में लगा दें तो हमारा वातावरण और भविष्य दोनों ही सुंदर बन सकते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि हमें तुलना करनी ही है तो श्रीराम, श्री कृष्ण, भगवान महावीर स्वामी द्वारा बताए गए मार्ग पर चलने की करनी होगी। जो भाई बहन चातुर्मास के शुरू से ही तपस्या कर रहे हैं उनके साथ अपनी तुलना करें ताकि हमारा भविष्य भी उज्जवल बन सके। उन्होंने कहा कि हमें दूसरों की खुशी देखकर दुखी होने की बजाए उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों व परिश्रम की तरफ ध्यान देकर उनके जैसा प्रयास करना होगा। जो प्राणी दूसरों के सुख दुख में शामिल होते हैं और भगवान महावीर स्वामी की वाणी को अपने आचरण में लाते है वह हमेशा खुश रहते हैं। सभा के महामंत्री सुनील जैन ने बताया कि चातुर्मास के शुरू से ही जैन बंधु तपस्या कर रहे हैं, जिनमें आयमल की तपस्या में प्रधान विजय जैन व गायत्री जैन 69वें दिन में प्रवेश कर गए हैं।

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