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इतिहास:अब युवा पीढ़ी घर बैठे जान सकेगी संगरूर का 200 साल पुराना इतिहास

संगरूरएक महीने पहले
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  • सुमीर फत्ता ने संगरूर के इतिहास को ‘संगरूर दैन एंड नाओ’ पुस्तक में दर्शाया, कैबिनेट मंत्री सिंगला ने किया लोकार्पण

जींद रियासत की राजधानी रहे संगरूर के पुरातन इतिहास को अब नई पीढ़ी घर बैठे ही जान सकेगी। शहर के युवा वकील सुमीर फत्ता ने ढाई वर्ष की मेहनत के बाद संगरूर के गठन से लेकर 2020 तक के संगरूर के इतिहास को एक पुस्तक में दर्शाया है। अब युवा पीढ़ी पिछले 200 वर्ष से लेकर मौजूदा समय तक की तस्वीरें व उसके इतिहास को चंद पलों में जान सकेगी।

संगरूर दैन एंड नाओ (पहले और अब) नामक इस पुस्तक में उस पुराने इतिहास की तस्वीरों को मौजूदा समय की तस्वीरों के साथ दर्शाया गया है। रविवार शाम कैबिनेट मंत्री विजय इन्दर सिंगला ने बग्गीखाना ग्राउंड में रखे एक समारोह के दौरान पुस्तक को लोक अर्पित किया।

पुस्तक में रेलवे स्टेशन संगरूर, बाग, रेस्ट हाउस, बिजली घर, नयना देवी मंदिर, ईदगाह, महल मुबारक, विक्टोरिया गोल्डन जुबली अस्पताल, चारो दरवाजे, किला मुबारक, रणबीर गंज(पुरानी मंडी), मैगजीन, रणबीर क्लब, सदर बाजार, बडा चौक, लेडी मिंटो रणबीर गल्र्स स्कूल, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, जयंती ताल, भाई मूला मंदिर(सुनाम), गुरू नानक स्कूल व गौशाला, बंबा घर, काली देवी मंदिर, घाबदां कोएठी, रणबीर सिल्वर जुबली ऑर्फन(राज हाई स्कूल), पशु अस्पताल, रणबीर कॉलेज, बग्गीखाना, क्वीन विक्टोरिया लेडीज अस्पताल, रामलीला बग्गीखाना, घंटा घर, दीवानखाना का नक्शा, शाही ड्योढ़ी, जींद रियासत की सेशन कोर्ट, जींद रियासत की हाईकोर्ट, दरबार हाल, बनासर बाग, बारादरी, देवी ताल(राज राजेश्वरी मंदिर), नाभा गेट बाजार, गंगा सागर ताल, शाही समाधें, गुरुद्वारा नानकियाना साहिब, सिनेमा की उस समय की तस्वीरों को विवरण सहित प्रकाशित किया गया है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार संगरूर की खोज संगर/सग्गू ने की थी

पौराणिक कथाओं के अनुसार संगरूर की खोज संगर/सग्गू ने की थी। जोकि मुगल सम्राट बाबर के समय का था। महाराजा सरूप सिंह ने सन 1837 में संगरूर को जींद रियासत की राजधानी घोषित किया। जिसकी स्थापना सरदार गजपत सिंह के बड़े पोते(फुलकियान के संस्थापक) द्वारा की गई थी।

इसके बाद राजा रघबीर सिंह के राज्याभिषेक के साथ ही शहर में निर्माण कार्य जोरों पर थे। उन्होंने शहर का निर्माण जयपुर की तर्ज पर करवाया। उन्होंने शहर के चारों कोनों पर चार दरवाजों का निर्माण करवाया। शहर में बाग-बगीचों का निर्माण करवाया गया। महाराजा रघबीर सिंह की मौत के बाद उनके पोते राजा रणबीर सिंह ने 60 साल तक संगरूर में राज किया।

सन 1947 में देश आजाद होने के बाद विरासतें समाप्त होनी शुरू हो गई। मौजूदा समय में शहर में पुरानी विरासतें अभी भी जीवित है। शहर में बनासर बाग, बारादरी, दरबार हाल, शाही समाधें, रणबीर क्लब, घंटा घर आदि विरासते अभी भी ज्यों की त्यों पड़ी है। सरकार इन पर करोड़ों रुपए खर्च कर इन्हें पुर्नजीवित करने की कोशिश कर रही है। हालांकि सरकारों की अनदेखी के कारण काफी विरासतें लुप्त हो गई है।

सोशल मीडिया पर भी करवाएंगे इतिहास से रूबरू : सुमीर फत्ता

एडवोकेट सुमीर फत्ता ने बताया कि उनके पिता सतिंदर कुमार फत्ता ने करीब 25-30 वर्ष पहले पुराने इतिहास से संबंधित कई तस्वीरें एकत्रित की थी। जिन्हें देखकर उसने भी ऐसी तस्वीरें जुटानी शुरू कर दी। कई इतिहासकारों की किताबें पढ़ी। करीब 3 साल की मेहनत रंग लाई और वह संगरूर के इतिहास से संबंधित किताब लिखने में कामयाब रहे। अब वह एक सोशल मीडिया चैनल के जरिए युवा पीढ़ी को पुराने इतिहास से रूबरू करवाएंगे।

इतिहास को जीवित रखने को सरकार कर रही प्रयास : सिंगला

कैबिनेट मंत्री विजय इन्दर सिंगला ने कहा कि युवा वकील का यह कार्य काफी सरहानीय है। उनके इस प्रयास से संगरूर का लुप्त हो रहा इतिहास नई पीढ़ी आराम से जान सकेगी। उन्होंने कहा कि सरकार पुरात्व इतिहास को जीवित रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।

पुरात्व इमारतों पर करीब 6.5 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। करोड़ों रुपए की लागत से मौजूदा समय में भी काम चल रहा हैै। सभी इमारतों का काम मुकम्मल होने के बाद लोग पूरे देश से लोग इन इमारतों को देखने के लिए आया करेंगे।

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