कोरोना इफेक्ट / मांग गिरने से 4 एकड़ में लगे कद्दू, करेला और पेठे पर चलाया टैक्टर

संगरूर में धूरी रोड पर खेतों में सब्जियों की फसल को नष्ट करता किसान सफी मोहम्म्द। संगरूर में धूरी रोड पर खेतों में सब्जियों की फसल को नष्ट करता किसान सफी मोहम्म्द।
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संगरूर में धूरी रोड पर खेतों में सब्जियों की फसल को नष्ट करता किसान सफी मोहम्म्द।संगरूर में धूरी रोड पर खेतों में सब्जियों की फसल को नष्ट करता किसान सफी मोहम्म्द।

  • मंडी में कद्दू 4 रुपए, करेला 5 और पेठा की 3 रुपए/किलाे के हिसाब से बिक्री
  • खर्च भी नहीं निकल रहा, 2 लाख का घाटा हो गया : सफी
  • शादी समारोह, पार्टी, होटल-रेस्टाेरेंट्स आदि बंद हाेने के कारण मांग में अधिक गिरावट

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:00 AM IST

संगरूर. कोराेनाकाल में सब्जियों के वाजिब दाम नहीं मिलने से किसानों को भारी नुकसान हाे रहा है। ऐसे में क्षेत्र के एक किसान ने करीब 4 एकड़ में तैयार कद्दू, करेला और पेठा को ट्रैक्टर से नष्ट कर दिया।

धूरी रोड़ के खेतों में खेती करते किसान सफी मोहम्मद के मुताबिक, वह 19 वर्षाें से ठेके पर जमीन लेकर खेती का काम करता है।

उसने 7 एकड़ में कद्दू, करेला, पेठा, खीरा, तोरी आदि की खेती की। महामारी के कारण मंडी में सब्जियों की मांग काफी कम हो गई। शादी समारोह, पार्टी, होटल-रेस्टाेरेंट्स आदि बंद हाेने के कारण मांग और अधिक गिर गई।

मंगलवार तक मंडी बंद होने के कारण और भी बुरा असर पड़ा। इससे कद्दू, करेला और पेठा के दाम भी काफी गिर गए। मंडी में वह कद्दू 4 रुपए/किलाे, करेला 5 रुपए और पेठा 3 रुपए/किलाे के हिसाब से बेच रहा है। 

सब्जी को नष्ट कर धान लगाएंगे सफी मोहम्मद

सफी मोहम्मद का कहना है कि सब्जियों की तुड़ाई का खर्च ही 2.50 रुपए/किलो तक आ रहा है। इसमें मंडी तक ढुलाई खर्च जाेड़ लिया जाए ताे उतनी कमाई हो नहीं पाती।

उसे कम से कम 2 लाख रुपए तक का घाटा उठाना पड़ा, क्योंकि वह सब्जियां बेच नहीं सका, जबकि बिजाई और जमीन के ठेके का खर्च आ चुका है।

महामारी से पहले कद्दू 15 रुपए, करेला 20 और पेठा 12 रुपए/किलाे तक होलसेल में बिका था। अब ऐसा नहीं है। ऐसे में उसने सब्जी को नष्ट कर धान की बिजाई करने का निर्णय लिया।

सब्जियों और फसलों के न्यूनतम दाम तय हों : भाकियू

भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान अमरीक सिंह गंढूआ ने कहा कि पंजाबभर में सब्जी की बिजाई करने वाले किसानों पर महामारी का असर पड़ा है।

सरकार यदि किसानों को रस्मी फसलों से बाहर निकालना चाहती है तो उसे दूसरी फसलों और सब्जियाें आदि के न्यूनतम दाम तय करने होंगे।

बिक्री में कमी के कारण मार्केट फीस में भी गिरावट

मार्केट कमेटी चेयरमैन अनिल कुमार घीचा ने बताया कि सब्जी की बिक्री कम होने के कारण मार्केट फीस में भी कमी आई है। मई में 27 प्रतिशत और जून में 10 प्रतिशत तक मार्केट फीस में कमी आई है।

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