28 छात्रों की परमिशन, भेज दिए 95 कश्मीरी / लखनपुर जाना था छोड़ने, तरनतारन से वापस बुलाया, जम्मू-कश्मीर बार्डर पर भीड़ होने पर बठिंडा लौटाया

Had to leave for Lakhanpur, called back from Tarn Taran, returned to Bathinda when there was a crowd on Jammu and Kashmir border
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Had to leave for Lakhanpur, called back from Tarn Taran, returned to Bathinda when there was a crowd on Jammu and Kashmir border

दैनिक भास्कर

Apr 23, 2020, 05:00 AM IST

बठिंडा. लॉकडाउन की वजह से बठिंडा में फंसे कश्मीरी नागरिकों को अपने घर भेजने को रवाना की गई बसें जम्मू-कश्मीर सरकार की अनुमति न मिलने की वजह से तरनतारन से ही बाद दोपहर वापस लौट आईं। रमजान का महीना अपने परिवार के साथ मनाने के लिए बठिंडा जिला प्रशासन की ओर से पीआरटीसी के सहयोग से इन्हें बुधवार को सुबह 9 बजे तहसीलदार सुखबीर सिंह बराड़ ने रवाना किया था।

बठिंडा लौटे कश्मीरी नागरिकों की नाराजगी को देखते हुए एसडीएम अमरिंदर सिंह टिवाना व तहसीलदार सुखबीर सिंह बराड़ उन्हें समझाने भी पहुंचे।  पीआरटीसी की 4 बसों व 1 कैंटर में 95 प्रवासी कश्मीरी नागरिकों को इनके घर की ओर रवाना किया गया, इन्हें लखनपुर बार्डर तक छोड़ा जाना था, बसें अभी तरनतारन पहुंचने वाली थी कि वापस आने के निर्देश जारी हुए हालांकि युवाओं ने जिद भी की लेकिन बसों को दोपहर 3 बजे बठिंडा लाया गया।

कश्मीर सरकार ने 28 छात्रों के लिए जारी किया पत्र
बठिंडा के आदेश मेडिकल कॉलेज समेत अन्य इंस्टीट्यूशंस में पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों ने कश्मीर सरकार से पत्र लिखकर उन्हें अपने घर भिजवाने के लिए प्रबंध करने का आग्रह किया था, इस पर कश्मीर सरकार की ओर से जिला बठिंडा के नाम पत्र जारी करके इन युवाओं को कश्मीर भिजवाने के प्रति आगाह किया। जिला प्रशासन ने 28 विद्यार्थियों के साथ बठिंडा कृष्णा कॉलोनी, अमरपुरा बस्ती समेत कोटशमीर में रहते प्रवासी कश्मीर के नागरिकों को भी अपने घर भिजवाने का प्रबंध कर दिया। इनमें महिलाएं व बच्चे भी शामिल हैं। इधर जेएंडके बार्डर पर पहले से ही 1500 से ज्यादा लोगों के पहुंचने का हवाला देते हुए बठिंडा से पहुंच रहे 95 कश्मीरी नागरिकों को आने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।

शादी के सीजन में करते हैं कैटरिंग का काम
कश्मीर के जिला रामबन निवासी निसार अहमद मीर, मोहम्मद इब्राहिम, बहार अहमद, परवेज, सुलजार ने कहा कि वे बठिंडा में कैटरिंग का काम करते हैं। 25 मार्च को घर जाना था पर 22 मार्च को लॉकडाउन और फिर कर्फ्यू लग गया। अब रमजान का महीना है और वे अपने परिवार के साथ मनाना चाहते हैं।

25 को कश्मीर जाने से पहले 22 को लॉकडाउन
कुछ कश्मीरी बठिंडा में शाल आदि बेचने आते हैं। रौफ अहमद ने कहा कि प्रशासन ने उन्हें सुबह 6 बजे तैयार रहने को कहा, यहां से रवाना भी हो गए पर प्रशासन का वापस आने का कॉल आया कि जेएंडके एडमिनिस्ट्रेशन परमिशन नहीं दे रहा। रौफ अहमद ने सवाल उठाया कि केवल बठिंडा से पहुंचे नागरिकों को अनुमति क्यों नहीं मिली। 

परमिशन मिलते ही भिजवाना प्रशासन की जिम्मेदारी

कश्मीर सरकार के पत्र के आधार पर इन्हें रवाना किया किया लेकिन बार्डर पर भीड़ होने की वजह से इन्हें अनुमति नहीं मिली। कश्मीर सरकार ने एक-दो दिन में रश कम होने पर बुलावा भेजने का भरोसा दिया है, इसी के आधार पर इन्हें इनके घर भिजवाने की व्यवस्था करना अब प्रशासन की जिम्मेदारी है। अमरिंदर सिंह टिवाना, एसडीएम बठिंडा

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