एक दिवसीय सत्संग का आयोजन:व्यक्ति जिस सुख को सांसारिक वस्तुओं में खोज रहा वह उसके भीतर ही मौजूद

कोटकपूरा2 महीने पहले
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गांव बरगाड़ी में सत्संग में प्रवचन करती साधवी रीतू भारती, (दाएं) पंडाल में मौजूद श्रद्धालुगण। - Dainik Bhaskar
गांव बरगाड़ी में सत्संग में प्रवचन करती साधवी रीतू भारती, (दाएं) पंडाल में मौजूद श्रद्धालुगण।

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा फरीदकोट के गांव बरगाड़ी में एक दिवसीय सत्संग का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान साध्वी रितु भारती ने बताया कि आज का मनुष्य सुख की तलाश में रात-दिन भाग रहा है, लेकिन फिर भी उसे वह सुख नहीं मिल पाता है।

इसके पीछे कारण यह है कि वह गलत दिशा में भाग रहा है। ऐसा लगता है जैसे किसी व्यक्ति की कोई वस्तु कमरे के अंदर खो गई हो और वह उसे बाहर खोजता है, तो वह वस्तु उसे कभी नहीं मिलेगी। इसी प्रकार आज का व्यक्ति जिस सुख को सांसारिक वस्तुओं में खोजता है, वह सुख वास्तव में उसके भीतर है। ईश्वर सुख का सबसे बड़ा स्रोत है।

और वह ईश्वर मनुष्य के भीतर निवास करता है। इसलिए जब भी इंसान सुख की तलाश में बाहर भागता है तो उसे निराशा भाव कि दुख ही मिलता है। इसलिए संत महापुरुष कहते हैं, सुख न तो घर में है और न ही उसको छोड़ देने में है। संत की शरण में जाने से सुख मिलता है।

क्योंकि एक सच्चा संत हमारे जीवन को ईश्वर से जोड़ता है। वह हमें अपने भीतर उतार के भगवान के दर्शन कराता है और भगवान के दर्शन से हमारे सभी कष्ट समाप्त हो जाते हैं। अतः सुखी होने के लिए हमें एक ऐसे गुरु की तलाश करनी होगी जो हमें ईश्वर के साकार रूप से जोड़े।

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