संयुक्त किसान मोर्चा का धरना 7वें दिन में प्रवेश:मरणव्रत पर बैठे डल्लेवाल का शुगर स्तर काफी कम, डॉक्टर रख रहे नजर

फरीदकोट2 महीने पहले
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किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल से बातचीत करते प्रशासनिक अधिकारी। - Dainik Bhaskar
किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल से बातचीत करते प्रशासनिक अधिकारी।

मांगों को लेकर टेहना गांव के पास नेशनल हाइवे 54 टी पॉइंट पर संयुक्त किसान मोर्चा (गैरराजनीतिक) का लगाया धरना मंगलवार काे सातवें दिन और प्रदर्शन स्थल पर भारतीय किसान यूनियन सिधुपुर के प्रांतीय अध्यक्ष जगजीत सिंह डल्लेवाल का मरणव्रत चौथे दिन में प्रवेश कर गया।

डॉक्टराें के अनुसार, जगजीत डल्लेवाल का लगातार भूखे रहने के कारण उनका शुगर स्तर काफी कम हाे गया है। मेडिकल टीम उनके स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखे हुए है।

वहीं, प्रशासन और किसानाें के बीच बातचीत बेनतीजा रही। प्रशासन की तरफ से अमृतसर के नवनियुक्त पुलिस कमिश्नर जसकरण सिंह व फरीदकोट के एसएसपी राजपाल सिंह शामिल हुए। फरीदकाेट की डीसी डाॅ. रुही दुग्ग कुछ समय के लिए वहां गईं, लेकिन बैठक में शामिल हुए बिना लौट आईं। एसडीएम व तहसीलदार वहां दिनभर ड्यूटी पर माैजूद रहे।

दाेनाें पुलिस अधिकारी डल्लेवाल काे मरणव्रत व धरना समाप्त कर सरकार से बातचीत करने के लिए मनाते रहे, जबकि डल्लेवाल व अन्य नेता मांगें पूरी होने के लिखित आदेश जारी होने तक आंदोलन जारी रखने पर अड़े रहे। करीब ढाई घंटे चली बैठक का कोई परिणाम नहीं निकला। किसान सीएम मान से अपने बयान के लिए माफी मांगने की भी मांग कर रहे थे।

सीएम के आज फूंके जाएंगे पुतले : कोटड़ा

यूनियन के प्रांतीय महासचिव काका सिंह कोटड़ा ने कहा कि अध्यक्ष डल्लेवाल को मरणव्रत पर बैठे हुए चौथा दिन हो गया, लेकिन अभी तक सरकार का मंत्री उनके पास मांगों के संबंध में मीटिंग करने नहीं पहुंचे। एक दिन पहले स्पीकर विधानसभा कुलतार सिंह संधवां धरनास्थल पर जरूर पहुंचे थे, लेकिन इन्होंने किसानों की मांगों पर कोई बात नहीं की। गत दिनों मुख्यमंत्री ने किसानों के प्रति जिस भाषा का इस्तेमाल किया वह बहुत निंदनीय है।

इसके रोषस्वरूप 23 नवंबर को पूरे देश में किसान संगठन मुख्यमंत्री भगवंत मान के पुतले जलाएंगे और 24 नवंबर को यूनियन के नेता धरनास्थल पर पहुंचकर आगे की रणनीति पर विचार करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ तो किसानों की हितैषी बनने का दावा करती है, दूसरी ओर भगवंत मान का ऐसा बयान आना शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि किसानों के प्रति सरकार अपना रुख स्पष्ट करे।

ये हैं संयुक्त किसान मोर्चा की मांगें

किसान आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों के परिवाराें को मुआवजा एवं सरकारी नौकरी, जुमला मालकान जमीन के मालिक किसानों को उनके हक दिलाना, गुलाबी सुंडी से क्षतिग्रस्त धान का मुआवजा देना, चाइना वायरस एवं बारिश से क्षतिग्रस्त धान का मुआवजा, किसानों पर पराली के पर्चे व फर्द में रेड एंट्री रद करना, गुरु काशी विश्वविद्यालय के हजारों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले आरोपी कुलपति के खिलाफ कार्रवाई करना, बंद पड़ी चीनी मिलों को चालू करवाना, भूमि मुआवजा वितरण में कथित ठगी के आरोपी एसडीएम पर कार्रवाई करने के अतिरिक्त मुख्यमंत्री मान के किसान संघर्ष संबंधी बयान को वापस लेना व माफी मांगना इत्यादि शामिल।

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