भाई मंगल सिंह ने कहा:महापुरुष नरम स्वभाव के होते हैं, पापी व स्वार्थी को भी पवित्र बनाने का संकल्प लेते हैं

फरीदकोट2 महीने पहले
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा गांव खारा में आयोजित किए जा रहे तीन दिवसीय सत्संग कीर्तन के पहले दिन भाई मंगल सिंह गुरबाणी कथा करते हुए कहा कि महापुरुष मक्खन के समान नरम स्वभाव वाले होते हैं। गुरु के रूप में जहां वे अपने चरणों में आए हुए महा बैरागी को गले लगाते हैं, वहीं दूसरी तरफ पापी और स्वार्थी को भी पवित्र बनाने का संकल्प लेते हैं। उनकी दया का अंत नहीं है, बल्कि वे विषयों में डूबे अहंकारी व्यक्ति के सिर को भी अपनी गोद में रखकर मोक्ष प्रदान करते हैं। इसलिए धर्म ग्रंथों में गुरु की महिमा गाई गई है। गुरु साहिबान जी के दरबार में हर पल अलौकिक लीलाएं घटती थी। कलम को क्या पता था कि क्या लिखना है जो इतिहास बन जाएगा। क्योंकि इतिहास गुरु के जाने के कुछ समय बाद नहीं बनता बल्कि इतिहास गुरु के प्रकट होने से पहले ही निर्धारित हो जाता है। वह केवल वर्तमान में खड़ा होता है। इस खेल में वे अपने लिए जीतने की चेष्टा तक नहीं करते, उनकी इच्छा सदैव यही रहती है कि जीत मेरे सेवक की हो, चाहे फूलों की माला देकर हो या कांटों का ताज पहनकर। संत महापुरुष मानवता की भलाई करने के लिए इस धरती पर अवतरित होते हैं। लेकिन फिर भी लोग बिना जाने ही उनके बारे में भला-बुरा बोलते हैं। संत महापुरुष अपना कार्य पूरा करके जब इस संसार से विदा होते हैं, तब सारा संसार उनकी वंदना करता है। संत महापुरुषों का सम्मान करते हैं तो उनकी लिखी हुई बाणी को अपने जीवन में धारण करना चाहिए। भजन संकीर्तन का गायन भाई हरि सिंह, भाई मलकीत सिंह, भाई गुरदेव सिंह ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संगत मौजूद थी।

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