एमबीए बकरीवाला...:नौकरी छोड़ पाल रहा 100 से ज्यादा बकरियां, अब कमा रहा अच्छा मुनाफा

अबोहर16 दिन पहले
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बकरी पालन के धंधे के बारे में जानकारी देते गांव रामसरा के एमबीए पास राहुल कासनिया। - Dainik Bhaskar
बकरी पालन के धंधे के बारे में जानकारी देते गांव रामसरा के एमबीए पास राहुल कासनिया।

एमबीए पास नौजवान मल्टीनेशनल कंपनियाें में काम करते हैं, पर अबोहर के गांव रामसरा के राहुल कासनिया बकरी पालन से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। राहुल ने बताया कि एमबीए करने के बाद 7 साल तक नौकरी की, लेकिन वह खुद का धंधा करना चाहते थे। बस इसी इरादे से गांव आकर बकरी पालन का व्यवसाय शुरू किया और आज वह अच्छा मुनाफा कमा रहा है। उसने 2016 में बकरी पालन शुरू किया था और इस समय उनके पास 100 से ज्यादा बकरियां हैं। वह ब्रीडर के तौर पर काम कर रहा है। बकरी पालकों को अच्छी नस्ल के जानवर सप्लाई कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आज खेती के साथ-साथ सहायक व्यवसाय किसानों के लिए बहुत जरूरी हैं। बकरी पालन खेती के साथ बहुत कामयाब रहता है क्योंकि ये दोनों व्यवसाय एक-दूसरे के पूरक हैं। किसी भी सहायक धंधे में मंडीकरण बड़ी चुनौती रहता है, पर बकरी पालन में इसकी समस्या नहीं। फार्म से ही व्यापारी बकरियां खरीद ले जाते हैं। बकरियाें के दूध का मंडीकरण कर लें तो आमदन और बढ़ जाती है।

बीमारी से बचाव को बकरियों का समय पर वैक्सीनेशन जरूरी

राहुल ने बताया कि वह अपने एक सहयाेगी के साथ मिलकर काफी आसानी से 100 बकरियों को संभाल लेते हैं। बकरियों को समय पर वैक्सीनेशन करवा लेते हैं। इससे बकरियाें को किसी तरह की गंभीर बीमारी का कोई खतरा नहीं रहता है। वहीं, बकरी के लिए 15 वर्ग फीट और बकरों के लिए 30 वर्ग फीट का शेड होना चाहिए ताकि वे आसानी से रह सकें। अब वह युवाओं को बकरी और मुर्गी पालन की सिखलाई भी देता है।

युवाओं को चाहिए कि वे इस व्यवसाय को अपना आमदन बढ़ाएं। उधर, डिप्टी कमिश्नर डॉ. हिमांशु अग्रवाल ने कहा कि युवाओं को सहायक रोजगार अपनाने चाहिए। सरकार भी इसके लिए सहायता करती है। जो युवा सहायक रोजगार अपनाना चाहता है, वह सिखलाई और मार्गदर्शन के लिए पशुपालन विभाग से संपर्क कर सकता है।

सलाह-हैपी सीडर और मल्चर से पराली प्रबंधन करें किसान

कृषि विज्ञान केंद्र बोहावाल, होशियारपुर ने खेतीबाड़ी और किसान भलाई विभाग टांडा के सहयोग से पराली प्रबंधन पर गांव फिरोज रौलियां में जागरूकता कैंप लगाया। इसमें केंद्र के सहायक प्रो. डॉ. अजायब सिंह ने किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान और पराली में मौजूद तत्वों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सुपर एसएमएस, हैपी सीडर, स्मार्ट सीडर, सुपर सीडर, उल्टावां हल, मल्चर, जीरो ड्रिल और कटर के इस्तेमाल से किसान पराली का प्रबंधन कर सकते हैं। इससे जमीन की उपजाऊ शक्ति भी बढ़ेगी।

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