कलानौर का शिव मंदिर:ज्योतिर्लिंगों के बाद देश में कैलाश काशी, कलानौर सबसे प्रमुख मंदिर

गुरदासपुर6 दिन पहले
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जिले में कलानौर के शिव मंदिर का इतिहास सदियों पहले का है। ज्योतिर्लिंगों के बाद भगवान शंकर के सबसे प्रमुख 3 मंदिरों में कैलाश, काशी और कलानौर के मंदिर की मान्यता है। मंदिर का इतिहास बादशाह अकबर से भी जुड़ा है। कहा जाता है कि 1556 में अकबर यहां आए थे। घोड़ों के तबेले में जब भी कोई घोड़ा जाता, लंगड़ाकर बाहर निकलता था। यह देख जमील खान नामक सैनिक ने बादशाह को सूचित किया। अकबर खुद यहां आए और सैनिकों को खुदाई करने का आदेश दिया।

5-7 फीट तक खुदाई के बाद सैनिकों को धड़ की आकृति वाला विशाल पत्थर दिखाई दिया। खुदाई जारी रहने पर आकाशवाणी हुई, मैं शिव हूं। यहां मंदिर बनाया जाए। बादशाह अकबर ने तब यहां कच्चा मंदिर बनवाया था। बाद में अफगानिस्तान जाने के दौरान महाराजा रंजीत सिंह के बेटे खड़क सिंह को भगवान शिव ने सपने में दर्शन देकर पक्का मंदिर बनाने का निर्देश दिया था।

मंदिर तक कैसे पहुंचें श्रद्धालु

गुरदासपुर से 26 किमी. दूर कलानौर तक जाने के लिए बस में 30 रुपए किराया लगता है। मंदिर सुबह 4 से लेकर रात 8:30 बजे तक खुला रहता है। दोपहर को रोज लंगर लगता है। दूर से आने वाले यात्री रात को ठहरना चाहें तो पूरा प्रबंध है। महाशिवरात्रि पर यहां देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। सोमवार को शिवभक्त भांग, धतूरा, दही, कच्ची लस्सी चढ़ाकर भोलेनाथ का अभिषेक करते हैं।

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