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श्री गुरु नानक देव जी के विवाह पर्व:गुरुद्वारा फलाही साहिब में लगे मेले में पहुंची 80 हजार संगत, विवाह के अगले दिन सैर के दौरान गुरु जी ने यहां पर दबाई थी फलाही की दातुन

बटाला8 दिन पहले
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बटाला में साेमवार काे मनाए गए श्री गुरु नानक देव जी के विवाह पर्व के अगले दिन बटाला से 10 किलोमीटर दूर वडाला ग्रंथियां में स्थित गुरुद्वारा श्री फलाही साहिब में भी गुरु जी की आमद को लेकर विशाल मेला लगाया गया। हालांकि पिछले साल काेराेना के चलते यहां मेला नहीं लग पाया था, लेकिन इस बार मेले में हर्षाेल्लास के साथ संगत पहुंची। मेले में बच्चाें सहित युवाओं ने झूलाें का काफी आनंद लिया। इस दौरान लंगर का प्रवाह भी निरंतर जारी रहा।

फलाही साहिब की मान्यता ,लोग प्रसाद के रूप में अपने साथ ले जाते हैं फलाही की टहनियां

गुरुद्वारा श्री फलाही साहिब श्री गुरु नानक देव जी की सैरगाह की याद दिलाता है। इतिहास के अनुसार विवाह की रस्में पूरी करने की अगली सुबह गुरु नानक देव जी सैर के लिए निकले थे। टहलते-टहलते वह काफी दूर निकल आए। उस समय उनके साथ भाई बाला व मरदाना भी थे। गुरु जी ने रास्ते में फलाही के एक पेड़ से टहनी तोड़ कर दातुन बनाई।

कहा जाता है कि गुरु जी ने दातुन करने के बाद वडाला ग्रंथियां में एक जगह जमीन में दबा दी। यहां अब तक बड़ा फलाही का पेड़ है। इसके बाद वडाला ग्रंथियां के लाेग इसे पूजने लगे। अाज इस अस्थान पर गुरुद्वारा फलाही साहिब सुशोभित है। जब बटाला में गुरु नानक देव जी का विवाह पर्व मनाने का प्रचलन शुरू हुआ, तो उसके साथ ही अगले दिन फलाही साहिब में भी मेला लगने लगा। कार सेवा वाले बाबा बस्ता सिंह जी ने इस स्थान की सेवा संभाल की और यहां पर भव्य गुरुद्वारे का निर्माण करवाया। जहां अब इस पर्व पर हजारों लोग नतमस्तक होते हैं।

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