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5 करोड़ का गबन:पूर्व बैंक मैनेजर, दो अकाउंटेंट ने कर्ज चुकाने वालों का पैसा नहीं किया जमा, डेड खातों में डालकर निकालते रहे

बटाला3 महीने पहले
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आरोपियों ने बैंक का रिकार्ड ऑफलाइन होने का फायदा उठाकर 4 साल पहले यह घोटाला किया। - Dainik Bhaskar
आरोपियों ने बैंक का रिकार्ड ऑफलाइन होने का फायदा उठाकर 4 साल पहले यह घोटाला किया।
  • केंद्रीय सहकारी बैंक की कादियां ब्रांच में 50 से अधिक किसानों के साथ धोखा, कर्ज चुकाने के बाद भी आने लगे नोटिस

केंद्रीय सहकारी बैंक की कादियां ब्रांच में 5 करोड़ रुपए का घोटाला सामने आया है। इस संबंध में जांच टीम की शिकायत पर थाना कादियां में तत्कालीन बैंक मैनेजर, 2 अकाउंटेंट के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। कुछ किसानों की कर्ज लौटाने के बाद कर्ज चुकाने के नोटिस आने की शिकायतों पर सहकारी फेडरेशन के पंजाब प्रधान सर्वजीत सिंह और बैंक के ही एक अन्य अधिकारी ने जांच की तो 5 करोड़ 16 लाख 30 हजार 200 रुपए का मिलान नहीं हो पाया।

जांच के बाद इन्होंने कादियां थाना पुलिस को बैंक के ही तत्कालीन मैनेजर कीर्तन सिंह, बैंक के 2 अकाउंटेंट प्रितपाल सिंह और विशाल कुमार के खिलाफ गबन करने के आरोप में शिकायत दर्ज करवाई। थाना कादियां के एसएचओ बलकार सिंह ने बताया कि बैंक शिकायत के अनुसार तीनों कर्मचारियों ने यह घोटाला 4 साल पहले बैंक का रिकार्ड अॉफलाइन होने का फायदा उठाकर शुरू किया। तीन साल में आरोपियों ने बैंक में करोड़ों के गबन को अंजाम दे दिया। तत्कालीन मैनेजर कीर्तन सिंह कस्बा घुमाण के गांव मंड का है।

किसी को शक न हो इसके लिए दे देते थे एनओसी, नोटिस लेकर किसान बैंक गए तो जांच कमेटी ने किया घोटाले का खुलासा

गबन की जांच के लिए बनाई टीम से मिली जानकारी के अनुसार आरोपी बैंक लिमिट पर कर्ज उठाने वालों को चूना लगाते थे। ब्याज सहित कर्ज चुकाने वाले 50 के लगभग किसानों को जब लोन से तीन-चार गुना रकम चुकाने का मुख्यालय से नोटिस मिला तो वह हक्के-बक्के रह गए। किसानों ने कर्ज ब्याज समेत चुकाने के बाद तत्कालीन बैंक मैनेजर कीर्तन सिंह की ओर से जारी एनओसी सर्टीफिकेट बैंक में जाकर दिखाया गया तो सात साल पहले हुए इस घोटाले की परतें खुलने लगीं।

एनओसी दिखाने वाले किसानों की तरफ से बैंक मुख्यालय को शिकायत की गई कि आखिर बैंक का कर्ज ब्याज सहित बरसों पहले चुकाकर अपनी जमीनों पर एनओसी लेने के बाद भी बैंक अब उन्हें कर्ज चुकाने का नोटिस क्यों दे रहा है। इस पर बैंक का मुख्यालय फौरन हरकत में आया और जांच करने के लिए कमेटी का गठन किया। बैंक के खाते खंगाले गए तो बड़ी रकम का मिलान नहीं हुआ।

आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए की जा रही छापेमारी ठिकानों पर रेड के लिए टीमें भेजीं : एसएचओ
एसएचओ बलकार सिंह ने बताया कि जांच अधिकारियों की शिकायत मिलने के बाद गबन के आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। शिकायत में दो अकाउंटेंटों प्रितपाल सिंह निवासी श्री हरगोबिंदपुर गांव भाम और विशाल निवासी बटाला धर्मपुरा का भी नाम है। उन्होंने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने टीम बना दी है और इसे आरोपियों के छिपने के संभावित ठिकानों पर छापेमारी के लिए रवाना कर दिया गया है। जल्द ही तीनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। अभी यह घोटाला और कितना बड़ा है पूछताछ के बाद ही पता चलेगा।

बैंक कंप्यूट्रीकृत हुआ तो मुख्यालय के कंप्यूटरों में दिखा कर्ज किसानों को नोटिस आने लगे तो हुआ धोखाधड़ी होने का खुलासा

सूत्रों की मानें तो जांच टीम ने पाया कि बैंक के तत्कालीन मैनेजर कीर्तन सिंह जोकि दो साल पहले रिटायर हो चुका हैं, ने बटाला में बैंक की मेन ब्रांच से खाताधारकों को लोन देने के लिए कभी पच्चीस लाख तो कभी बीस लाख की रकम ली। इन्होंने किसानों को लोन तो दिया लेकिन लौटाने पर उसे बैंक में जमा नहीं करवाया और मिलकर दोनों आरोपी साथियों के साथ बांट लिया।

इसके बदले में दोनों अरोपी अकाउंटेंट बैंक के सरकारी दस्तावेजों में गलत एंट्रियां कर देते थे। वहीं जिन किसानों ने अपनी बैंक लिमिट पर कर्ज लिया होता था, जब वह ब्याज समेत रकम को तत्कालीन बैंक मेनेजर कीर्तन सिंह को लौटाते थे तो कीर्तन सिंह उन ग्राहक किसानों को कर्ज चुकाए जाने के बाद बैंक की और से उनकी जमीनों को कर्ज मुक्त घोषित करने के लिए एनओसी जारी कर देता था और उनसे उनकी बैंक की चेकबुक ले लेता था। इसके बाद कीर्तन सिंह इन किसानों की चेकबुक का फर्जी तरीके से इस्तेमाल कर बैंक लिमिट पर लाखों रुपए कर्ज के रूप में निकालकर गबन कर जाता था।

बैंक के दोनों अकाउंटेंट साथ मिले होने के चलते गबन की रकम का अपना हिस्सा लेकर इन रुपयों को बैंक के सरकारी रिकार्ड में डेड खाते में डाल देते थे। वहीं बैंक का सारा पुरान रिकार्ड जब ऑनलाइन हुआ तो कर्ज चुकाने वाले ग्राहक बैंक के मुख्यालय के कम्यूटरों पर कर्जाई नजर आने लगे और बैंक मुख्यालय ने उन किसानों पर कर्ज चुकाने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया। घोटाले को अंजाम देने का कानूनी डंडा चलने का पता चलने के बाद से तीनों फरार हैं।

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