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वतन पर मिटने वाले हमेशा जिंदा रहते हैं:शहीद की पत्नी बोली-लै सोनू मेरा आखिरी सैल्यूट स्वीकार कर लै राती तूं साडे नाल गल्ल कीती ते अज्ज तिरंगे ’च लिपट के आ गयां

बटाला2 महीने पहले
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  • .राजौरी में गोलीबारी में शहीद हुए हरचोवाल के जवान का सैन्य सम्मान के साथ संस्कार
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लै सोनू मेरा आखिरी सलूट स्वीकार कर लै, रात ही तू गल कीती अज तू तिरंगे च लिपट के आ गया, राती तू झूठ बोलेया कि मैं ठीक आं। यह बात शहीद गुरचरण सिंह उर्फ सोनू की पत्नी रणजीत कौर ने चिता को मुखाग्नि देते हुए कही। वीरवार को जम्मू-कश्मीर के जिले राजौरी में भारत-पाक सीमा पर पाकिस्तान की ओर से तोड़े गए सीजफायर के दौरान शहीद हुए 28 वर्षीय गुरचरण सिंह का पार्थिव शरीर जब गांव हरचोवाल में पहुंचा तो पूरे इलाके में गमगीन माहौल हो गया।

गुरचरण सिंह 14 पंजाब रेजिमेंट में तैनात थे। शहीद के दो बच्चे हैं, इनमें एक बेटी और 6 महीने का बेटा शामिल है। हलका विधायक बलविंदर सिंह लाडी ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा जो भी सहायता होगी, शहीद परिवार को दी जाएगी। शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंदर सिंह विक्की ने कहा कि हमारी भारतीय सेना में इतनी ताकत है कि अगर पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो भारतीय सेना पाकिस्तान का नाम नक्शे से मिटा देगी। उन्होंने सरकार से मांग की कि शहीद गुरचरण सिंह के नाम पर गांव में यादगारी गेट बनाकर शहीद का सम्मान किया जाए।

पिता बोले-रात को बेटे ने फोन पर मांगी थी बच्चों की फोटो

शहीद गुरचरण सिंह के पिता सलविंदर सिंह ने बताया कि गत रात परिवार के साथ फोन पर हुई बात में गुरचरण सिंह कह रहा था कि उसे बच्चों को देखने का बहुत मन है, इसलिए वह उन दोनों की फोटो उसे भेजें। उन्होंने बताया कि गुरचरण सिंह जनवरी महीने में छुट्‌टी पर आया था और 13 जनवरी को लोहड़ी का त्योहार मनाने के बाद वापस ड्यूटी पर गया था। वीरवार को राजौरी से एयर लिफ्ट कर तिबड़ी कैंट में गुरचरण सिंह का पार्थिव शरीर लाया गया, यहां उसे सेना की गाड़ी में गांव हरचोवाल पहुंचाया गया। तिबड़ी कैंट से आई 18 पंजाब रेजिमेंट की अगुवाई लेफ्टिनेंट राहुल सोमना कर रहे थे। अंतिम दाह-संस्कार से पहले फौजी जवानों ने शस्त्र उल्टे कर बैंड की माध्वी धुन के साथ शहीद को सलामी और श्रद्धांजलि दी। 

पत्नी पुलिस में हवलदार, बहन एएसआई

शहीद के 6 महीने के बेटे अगमजोत सिंह ने नन्हे हाथों से शहीद पिता की चिता को मुखाग्नि दी तो श्मशानघाट में हर आंख नम हो उठी। इसके बाद सरकारी सम्मानों से शहीद गुरचरण सिंह का गांव में अंतिम दाह संस्कार कर दिया गया। शहीद गुरचरण सिंह के पिता सलविंदर सिंह भी रिटायर्ड फौजी हैं। शहीद की पत्नी रणजीत कौर बटाला पुलिस में हवलदार हैं और बहन जसबीर कौर एएसआई है। वहीं, उनके परिवार में मां पलविंदर कौर तथा एक ओर बहन गुरशरनप्रीत कौर भी है।

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