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यू-ट्यूब से सीखा खाद तैयार करना:बटाला के सतनाम 3 साल से घर से निकलने वाले गीले कूड़े से तैयार कर रहे खाद, प्लॉट में उगा रहे सब्जियां और फल

बटालाएक महीने पहले
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  • ड्रम में गीला कूड़ा डाल कर 40 दिन के लिए कर देते हैं बंद और खाद हो जाती है तैयार
  • घर के लिए बाहर से नहीं लाते सब्जी बटाला में 3 मोहल्लों के 11 लोग तैयार कर रहे हैं कूड़े से खाद

(जगनदीप सिंह)
बटाला में सफाई व्यवस्था के सुधार के लिए जहां नगर निगम के प्रयास जारी हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए घरों में ही गीले कूड़े से खाद तैयार कर उसका उपयोग सब्जियां उगाने और प्लांटेशन करने में कर रहे हैं। बटाला के कृष्णा नगर के रहने वाले सतनाम ने बताया कि वह पिछले 3 साल से अपने घर के ही गीले कूड़े से खाद तैयार कर रहे हैं और अपनी अमृतसर-अलीवाल बाइपास पर स्थित फैक्टरी के साथ ही उन्होंने करीब 35 मरले जगह पर सब्जियां उगाई हुई हैं, इसमें वह इस तैयार खाद को डाल देते हैं। इस खाद से तैयार सब्जियां ही वह घरों में खाते हैं।

उन्होंने ऐसा करना यू-ट्यूब से सीखा था। सतनाम ने बताया कि उन्होंने 50-50 लीटर के ड्रम लगाए हुए हैं, जिनमें वह घर में प्रयोग होने वाली सब्जियों के छिलके, फलों के छिलके, जूस निकालते वक्त निकला गुद्दा, चायपत्ती आदि चीजों को इन ड्रमों में डालकर ढक्कन बंद कर देते हैं, ताकि बदबू न आए। करीब 40 दिन के बाद इसकी खाद तैयार हो जाती है। सतनाम ने बताया कि उन्होंने बैंगन, संतरे, पपीते, नींबू, हल्दी आदि सब्जियां उगाई हुई हैं। इसके साथ मौसमी सब्जियां भी उगाई जाती है। घर के लिए बाहर से सब्जी लानी नहीं पड़ती। इसके अलावा उन्होंने वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी लगाया हुआ है, ताकि बारिश के पानी का प्रयोग खेती में ही किया जा सके। इससे पानी की भी बचत होती है।

एनजीओ की मदद से लोगों को करेंगे जागरूक : कोऑर्डिनेटर अजय कुमार
चंडीगढ़ से बटाला में ड्यूटी दे रहे स्वच्छ भारत के प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर अजय कुमार ने बताया कि बटाला के धर्मपुरा कलोनी, गुरु तेग बहादुर कॉलोनी और कृष्णा नगर के करीब 11 लोग हैं, जो अपने घरों में ही गीले कूड़े से खाद तैयार कर रहे हैं।

ये लोग अपने घरों में ही ड्रमों में किचन वेस्ट को डाल देते हैं और इसे ढक देते हैं। हर 5 दिन के बाद इस वेस्ट को हिलाना पड़ता है। बाद में इस वेस्ट को खुली जगह में सुखाने के बाद खाद तैयार हो जाती है। उन्होंने बताया कि वह कई एनजीओ से मिल रहे हैं, ताकि उनके साथ इस संबंधी अन्य लोगों को भी जागरूक किया जा सके। इसके अलावा इससे संबंधी एक मॉडल भी तैयार किया जा रहा है, ताकि लोगों को घरों से निकलते वेस्ट के दोबारा उपयोग के बारे में बताया जा सके।

होम कंपोस्टिंग करने वालों के बनाएंगे व्हाट्सएप ग्रुप
प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर अजय कुमार ने बताया कि विभाग की तरफ से होम कंपोस्टिंग करने वालों की लिस्टें मंगवाई जा रही हैं। क्योंकि पूरे पंजाब में होम कंपोस्टिंग करने वालों की पहचान कर उनके नंबरों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाया जा रहा है। इस ग्रुप में ये लोग अपने-अपने अनुभव शेयर करेंगे। इसके अलावा बटाला में पता चला है कि ओर भी लोग होम कंपोस्टिंग कर रहे हैं, इनकी पहचान भी की जा रही है। होम कंपोस्टिंग करने से शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार होगा। स्वच्छता रैंकिंग भी सुधरेगी।

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