पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

शनि त्रियोदशी व्रत आज:व्रत रखने से संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी होने की मान्यता, भोलेनाथ के साथ शनिदेव की पूजा करने से जीवन के तमाम कष्ट होते दूर

गुरदासपुर2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
आचार्य इंद्रदास ने बताया कि प्रदोष का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है। इस बार शनि त्रियोदशी व्रत 8 मई को है। - Dainik Bhaskar
आचार्य इंद्रदास ने बताया कि प्रदोष का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है। इस बार शनि त्रियोदशी व्रत 8 मई को है।
  • शिवलिंग पर 11 फूल और 11 बेलपत्र चढ़ाने पर संतान के कष्ट होते दूर

जब भी त्रियोदशी तिथि शनिवार को पड़ती है, उसे शनि प्रदोष भी कहा जाता है, क्योंकि प्रदोष व्रत हर माह के दोनों पक्षों में त्रियोदशी तिथि को ही रखा जाता है। आचार्य इंद्रदास ने बताया कि प्रदोष का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है। इस बार शनि त्रियोदशी व्रत 8 मई को है। इस दिन ही यह व्रत रखा जाएगा। इस दिन तमाम लोग अपनी इच्छापूर्ति के लिए व्रत रखते हैं। अगर आप व्रत नहीं रख सकते तो शनि त्रियोदशी के दिन भोलेनाथ के साथ शनिदेव की पूजा करने से आपके जीवन में शनि से संबंधित तमाम कष्ट दूर हो जाएंगे।

आचार्य ने बताया कि यदि आप निःसंतान हैं और संतान कामना की इच्छा रखते हैं, तो शनि त्रियोदशी के दिन किसी शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर 11 फूल और 11 बेलपत्र से बनी माला चढ़ाएं और साथ ही अगर आपकी संतान किसी गंभीर बीमारी से जूझ रही है, तो इस दिन एक पत्थर लेकर उसे काले रंग से रंगें और उसे पीपल की जड़ में रख दे। इसके बाद वहां सरसों के तेल का दीपक जलाएं और शनि मंत्र का 108 बार जाप करें। दरिद्रता दूर करने के लिए सरसों के तेल का परांठा या तेल लगी रोटी को काली गाय या काले कुत्ते को खिलाएं। वहीं, कष्टों से मुक्ति के लिए शनि त्रियोदशी के दिन एक कटोरे में सरसों का तेल निकालें और उस तेल में अपना चेहरा देख कर किसी को दान करे ऐसा करने से जीवन के तमाम कष्ट दूर होते हैं। अगर आपके शादीशुदा जीवन में कोई परेशानी चल रही है तो आप शनि त्रियोदशी के दिन काली गाय के माथे पर कुमकुम से तिलक लगाएं गाय को छूकर आशीर्वाद लें।

शुभ मुहूर्त

आचार्य ने बताया कि त्रियोदशी तिथि का आरंभ 8 मई को शाम 5 बजकर 20 मिनट से होगा। वहीं, इसका समापन 9 मई की शाम 7 बजकर 30 मिनट पर होगा। इसकी पूजा का समय 8 मई शाम 7 बजकर रात 9 बजकर 7 मिनट तक होगा।

व्रत की पूजा विधि

आचार्य ने बताया कि त्रियोदशी तिथि के दिन सूरज उगने से पहले स्नान करके साफ वस्त्र धारण कर लें व्रत का संकल्प करें। शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर अथवा घर पर ही बेलपत्र, अक्षत, दीप, धूप, गंगाजल आदि से भगवान शिव की पूजा करें। प्रदोष बेला में फिर से भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करने के बाद गंगाजल मिले हुए शुद्ध जल से भगवान का अभिषेक करें। शिवलिंग पर शमी, बेल पत्र, कनेर, धतूरा, चावल, फूल, धूप, दीप, फल, पान, सुपारी आदि अर्पित करें। इसके बाद शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।

खबरें और भी हैं...