कार्रवाई की मांग:एससी भाईचारे पर हमला करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करवाने का मामला, कहा- 18 को एसएसपी दफ्तर बटाला का करेंगे घेराव

गुरदासपुर2 महीने पहले
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पंचायती जमीन की डम्मी बोली का विरोध करने वाले एससी परिवारों पर जानलेवा हमला करने और जाति उत्पीड़न का गांव मसानिया ब्लाॅक बटाला जिला गुरदासपुर में पंचायती जमीन की फर्जी बोली का विरोध करने वाले एससी परिवारों और यूनियन नेताओं पर प्रशासन की मिलीभगत से जानलेवा हमला करने वाले सरपंच और उसके साथियों के विरुद्ध दर्ज मामले में इरादा कत्ल, एससी-एसटी एक्ट और महिलाओं से धक्का करने संबंधी धाराओं की वृद्धि करके हमलावरों को तुरंत गिरफ्तार करने, फर्जी बोली रद्द कर पंचायती जमीन से बनता आरक्षित हिस्से का हक हकदारों एससी परिवारों को देने और डम्मी बोली के जिम्मेवार पंचायत व ब्लाॅक विकास व पंचायत अधिकारी बटाला के अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर 18 अक्टूबर को एसएसपी दफ्तर का घेराव किया जाएगा। इस घेराव में पंजाब भर से मजदूर व अन्य इन्साफ पसंद लोग शामिल होंगे।

एसएसपी दफ्तर के घेराव के लिए पंजाब भर में तैयारियां चल रही हैं, जिसमें उसारी मिस्त्री मजदूर यूनियन द्वारा वीरवार को गांव गाहलड़ी, गुरदास नंगल, मान चोपड़ा, मीरपुर, भंगवां व पंडोरी महंता में बैठकें कर 18 अक्टूबर को एसएसपी दफ्तर बटाला के घेराव के लिए लामबंद किया गया।

इस संबंधी जोगिन्दर पाल घराला, सुखदेव सिंह ने कहा कि चाहे मुख्यमंत्री पंजाब अनुसूचित जाति से संबंधित हैं, परंतु अनुसूचित जाति परिवारों को बनते कानूनी व संविधानिक हक नहीं मिल रहे। यह हक मांगने पर उन्हें उत्पीड़न का शिकार होना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि गांव मसानिया में अपने कर्मियों को मोहरा बनाकर उच्च जाति के परिवार द्वारा ब्लाॅक अधिकारियों व उच्च जाति से संबंधित सरपंच से मिलीभगत कर 9 अगस्त को डम्मी बोली करके अनुसूचित जाति परिवारों के तीसरे हिस्से की पंचायती जमीन का हक मारने के विरुद्ध एससी परिवारों द्वारा पंचायती जमीन का हक लेने के पंचायती जमीन पर लगातार धरना शुरू किया गया था।

वहीं, कानून व विभाग की हिदायतों, नियमों की उल्लंघना करके पंचायती जमीन की की गई फर्जी बोली को रद्द कर असल हकदार को जमीन देने का मामला जिला प्रशासन सहित डायरेक्टर पेंडू विकास व पंचायत विभाग सहित 25 अगस्त को सरकार से पेंडू मजदूर यूनियन के नेताओं से चंडीगढ़ पैनल बैठक में भी उठाया गया था, लेकिन गांव के सरपंच ने अपने साथियों के साथ मिलकर और प्रशासन से मिलीभगत कर 24 सितंबर को धरनाकारी एससी परिवारों व नेताओं पर जानलेवा हमला किया था, जिन पर कार्रवाई की मांग की गई।

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