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छठे पे-कमीशन के खिलाफ जिलेभर में 150 डॉक्टर हड़ताल पर:डॉक्टरों ने 3 दिन और बढ़ाई हड़ताल, कहा-सरकार ने मांगें नहीं मानी तो पुलिस और कोर्ट के काम करेंगे ठप, मरीज हो रहे परेशान

गुरदासपुर16 दिन पहले
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छठे पे-कमीशन को लेकर सभी विभागों की तरफ से सरकार के खिलाफ धरने लगाए जा रहे हैं। इन धरनों में सरकारी डॉक्टरों व सेहत विभाग के कर्मचारियों का धरना लगातार जारी है। एक तरफ जहां पैरामेडिकल स्टाफ की तरफ से सुबह 10 से 12 बजे तक 2 घंटे पैन डाउन हड़ताल की जा रही है। वहीं, सरकारी डॉक्टरों की तरफ से पूरी तरह से काम ठप किया गया है और इस समय सिर्फ इमरजेंसी ही चल रही है।

3 दिन सरकारी डॉक्टरों ने ओपीडी पूरी तरह से बंद कर दी थी, लेकिन इन 3 दिनों में उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके चलते उन्होंने यह हड़ताल 3 ओर दिन बढ़ा दी है। डॉक्टरों ने बताया कि जिले में 150 के करीब डॉक्टर पूरी तरह से हड़ताल पर हैं। पहले 3 दिन हम लोगों ने हड़ताल के दौरान हाजिरी नहीं लगाई, लेकिन वीरवार से शुरू होने वाली हड़ताल के दौरान वो लोग हाजिरी भी लगाएंगे और प्रदर्शन भी करेंगे।

मांग-एनपीए बहाल कर बेसिक-पे से जोड़ा जाए और बढ़ाकर 33% किया जाए

पीसीएमएस के जिला प्रधान डॉ. लव कुमार हंस ने कहा कि डाक्टरों की पढ़ाई लंबी होती है और इनकी सर्विस में एंट्री देरी से होती है इसके चलते उन्हें प्रमोशन के मौके कम मिलते हैं। इसे देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाई रिस्क अनाउंस के आर्डर दिए थे, इसे पंजाब सरकार ने नान प्रेक्टिस अलाउंस बना दिया है। इसे अब 25% से कम कर 20 % कर दिया गया है।

यह भत्ता हमारे बेसिक वेतन में जोड़ा जाता था, लेकिन अब सरकार के नए फैसले के अनुसार इसे हमारे बेसिक वेतन से अलग डी लिंक कर दिया है। इससे हर डॉक्टर को वेतन में 10 से 15 हजार का नुकसान होगा और अगर 2016 से देखा जाए तो हर डॉक्टर को 6 से 8 लाख रुपए सरकार को वापस करने पड़ेंगा, जो हमने अब तक वेतन लिया है। हम चाहते हैं कि एनपीए बहाल कर बेसिक वेतन से जोड़ा जाए और बढ़ाकर 33% किया जाए।

डॉक्टरों ने दोबारा मोर्चा खोला
सेहत मंत्री की तरफ से दिए आश्वासन पर डॉक्टरों ने पे-कमीशन के खिलाफ धरना स्थगित कर दिया था, लेकिन कमीशन की त्रुटियां दूर होती न देख जिले के समूह सरकारी डॉक्टरों के संगठनों ने सूबा सरकार के खिलाफ दोबारा मोर्चा खोल दिया है। सरकारी अस्पताल बब्बरी के परिसर में विभिन्न डॉक्टरी संगठनों जैसे पीसीएमएस एसोसिएशन, वेटनरी डॉक्टर एसोसिएशन, रूरल डॉक्टर एसोसिएशन, डेंटल डॉक्टर एसोसिएशन और आयुष डॉक्टर एसोसिएशन ने संयुक्त रूप से रोष धरना दिया।

डॉक्टरों के प्रति बेरुख सरकार
पीसीएमएस एसोसिएशन के जिला प्रधान डॉ. लव कुमार हंस ने बताया कि उनकी अब अगले 3 दिन चलने वाली हड़ताल के दौरान भी अगर सरकार ने हमारी मांगें नहीं मानी, तो उसके बाद सभी डॉक्टर पुलिस और कोर्ट से संबंधित सभी काम ठप कर देंगे। उन्होंने कहा कि पूरा देश कोरोना महामारी में बहुत से डॉक्टरों व पेरा मेडिकल कर्मियों ने पूरी तनदेही से सेवाएं दी और कईयों ने अपनी जान भी गंवाई, लेकिन सरकार ने हमारे प्रति वेतन आयोग में बेरुखी दिखाई है।

तीन दिन में करीब 1500 मरीज बिना इलाज के लौटे
सिविल अस्पताल में रोजाना 500 के करीब लोग चेकअप करवाने आते हैं। इसके चलते इन तीन दिनों में 1500 से करीब मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। बेटी की दवा लेने पहुंचे महिंदर सिंह ने बताया कि बेटी के पेट में तेज दर्द हो रहा है, लेकिन जहां पहुंचने पर पता चला कि सभी डॉक्टर हड़ताल पर हैं।

इसके चलते प्राइवेट डॉक्टर के पास जाना पड़ेगा। वहीं, गर्भवती पत्नी का चेकअप करवाने आए हरीश कुमार ने कहा कि पत्नी का चैकअप सिविल में ही चल रहा है। वो लोग गरीब परिवार से हैं और पत्नी की डिलिवरी प्राइवेट तौर पर महंगे दामों पर नहीं करवा सकता। अब उसे डॉक्टरों की हड़ताल खत्म होने का इंतजार करना पड़ेगा। अगर हड़ताल लंबा समय चली तो उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

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