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राजनीति:2017 में भाजपा नेताओं के विरोध के चलते हुई थी हार इस बार लंगाह गुट की खिलाफत से निपटना होगी चुनौती

गुरदासपुर7 दिन पहले
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शिरोमणि अकाली दल बादल ने 2022 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर 64 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। इस सूची के अनुसार फिर से शिअद ने गुरबचन सिंह बब्बेहाली पर दाव खेला है। खास बात यह है कि जिला गुरदासपुर से एकमात्र विधानसभा हलका गुरदासपुर से पूर्व विधायक व जिला प्रधान बब्बेहाली को शिअद उम्मीदवार घोषित किया गया है।

अकाली दल आलाकमान ने अब तक जिला गुरदासपुर की सात विधानसभा सीटों में से एकमात्र गुरदासपुर से ही उम्मीदवार की घोषणा की है। शिअद के जिला प्रधान बब्बेहाली 3 बार अकाली दल की ओर से चुनाव लड़ चुके हैं। 2007 और 2012 में उन्हें जीत मिली थी, लेकिन 2017 में कांग्रेस उम्मीदवार बरिंदरमीत सिंह पाहड़ा ने उन्हें हरा दिया था। इससे भी खास बात यह है कि इस बार पार्टी के कुछ नेता ही उनका विरोध कर रहे थे। अभी कुछ दिन पहले ही बब्बेहाली के विरोधी माने जाते पूर्व मंत्री सुच्चा सिंह लंगाह गुट ने हनुमान चौक गुरदासपुर में विशाल रैली कर गुरदासपुर से किसी अन्य उम्मीदवार को टिकट देने की मांग की थी।

बब्बेहाली लंबे समय से राजनीति में सक्रिय
सियासी गलियारों में चर्चा है कि आलाकमान ने यह फैसला जिला में पार्टी को मजबूत बनाने और विरोधी सुरों को दबाने के लिए लिया है। वैसे भी जिले में बब्बेहाली पिछले लंबे समय से सक्रिय चल रहे हैं, उनके काम को देखते हुए भी पार्टी ने फिर से उनपर दाव खेला है। वह पिछले लंबे समय से पार्टी के जिला प्रधान भी चले आ रहे हैं।

2017 में भाजपा-शिअद का गठबंधन था, पर बीजेपी नेताओं ने विरोध में की थी रैलियां

साल 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और शिअद के गठबंधन ने मिलकर चुनाव लड़ा था। इस दौरान भाजपा नेताओं ने बब्बेहाली का खुलकर विरोध किया था। यही नहीं बब्बेहाली के विरोध में रैलियां तक कर डाली थीं। इसके चलते भी बब्बेहाली के वोट बैंक में सेंध लगी थी। यही कारण रहा कि बब्बेहाली को भीतरीघात के कारण हार का सामना करना पड़ा था। अब भाजपा से शिअद का गठबंधन टूट चुका है, इसके चलते बब्बेहाली इस बार पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरेंगे।

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