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गुरु पूर्णिमा 24 को:गुरु पूर्णिमा का पर्व जीवन में लाता है सुख, समृद्धि और शांति

गुरदासपुर12 दिन पहले
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  • आषाढ़ मास के अंतिम शनिवार गुरु पूर्णिमा आने पर शनि देव की पूजा का विशेष योग बन रहा

गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व पंचांग के अनुसार 24 जुलाई शनिवार को आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाएगा। गुरु पूर्णिमा का पर्व जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लेकर आता है। आचार्य इंद्र दास ने बताया कि इस दिन गुरुजनों का आदर और सम्मान कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।

हिंदू धर्म में गुरु का स्थान भगवान से भी बड़ा माना गया है। गुरु ज्ञान के कारक है। बिना गुरु के ज्ञान की प्राप्ति संभव नहीं है। आचार्य बताते हैं कि इस दिन शनि देव की पूजा का विशेष योग बनने जा रहा है। वहीं शनि देव को शांत करने का एक महत्वपूर्ण योग बना हुआ है।

शुभ मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 40 मिनट से आरंभ होगा, गुरुओं की करें पूजा व उपासना, सुबह सबसे पहले सूर्य को दें अर्घ्य
आचार्य इंद्र दास ने बताया कि पंचांग के अनुसार 24 जुलाई, शनिवार को सर्वार्थ सिद्धि योग में गुरु पूर्णिमा मनाई जाएगी। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग दोपहर 12 बजकर 40 मिनट से आरंभ होगा। इस योग का समापन 25 जुलाई को प्रात 5 बजकर 39 मिनट पर होगा।

वहीं पूर्णिमा तिथि का आरंभ 23 जुलाई, शुक्रवार को प्रात: 10 बजकर 44 मिनट से 24 जुलाई, शनिवार प्रात: 8 बजकर 7 मिनट तक रहेगा। उन्होंने बताया कि गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरुजनों को समर्पित है। इस दिन गुरुओं की विशेष पूजा और उपासना की जाती है। सभी धर्मों में गुरु का विशेष दर्जा है।

गुरु के बिना ज्ञान की प्राप्ति नहीं होता है। आचार्य इंद्र दास ने बताया कि गुरु पूर्णिमा के दिन सुबह उठें, स्नान आदि करके सबसे पहले सूर्य को अर्घ्य दें। सूर्य मंत्र का जाप करें। फिर अपने गुरु का ध्यान करें। इस दिन भगवान विष्णु को जरूर पूजें, उनके अच्युत अनंत गोविंद नाम का 108 बार जाप करना न भूलें और भगवान को आटे की पंजीरी बनाकर इसका भोग लगाएं, ऐसा करने से परिवार का स्वास्थ्य उत्तम रहता है, संभव हो तो लक्ष्मी- नारायण मंदिर में कटा हुआ गोल नारियल अर्पित करें, ऐसा करने से बिगड़े कार्य बनेंगे।

वही सुख-समद्धि की प्राप्ति के लिए कुमकुम घोल लें और मुख्य द्वारा और घर के मंदिर के बाएं और दाएं तरफ स्वास्तिक बनाएं, फिर मंदिर में दीपक प्रज्वलित करें। अगर किसी की कुंडली में गुरु दोष है तो भगवान विष्णु की श्रद्धापूर्वक पूजा करें। जरूरतमंदों को दान करने से सभी कष्टों का नाश होगा। अगर कोई व्यक्ति आर्थिक तंगी से गुजर रहा हैं तो पीले अनाज, पीले वस्त्र या पीली मिठाई का भोग लगाकर जरूरतमंदों व निर्धनों को दान करें।

शनि देव की करें पूजा
आचार्य ने बताया कि शनि देव को ज्योतिष शास्त्र में न्यायाधीश माना गया है। शनि व्यक्ति को अच्छे और बुरे कर्मों के आधार पर ही फल देते हैं। शनिवार के दिन पूजा और दान करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं। इस लिए आषाढ़ मास के आखिरी शनिवार को शनि देव की पूजा का विशेष योग बना हुआ है।

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