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प्रदोष व्रत आज:भगवान शिव के पूजन से मिलेगा आरोग्य रहने का आशीर्वाद

गुरदासपुर11 दिन पहले
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  • व्रत करने से सभी दोष खत्म होने की मान्यता, दुख-दरिद्रता रहेगी हमेशा दूर

हिंदू पंचांग में त्रयोदशी को सौभाग्यदायक तिथि माना गया है। तमाम कार्यों के लिए शुभ मानी जाने वाली इस तिथि पर भगवान शंकर और माता पार्वती की पूजा के लिए विशेष व्रत रखा जाता है, जिसे करने से सभी दोष समाप्त हो जाते हैं। इस व्रत को प्रदोष व्रत कहते हैं। प्रदोष व्रत 15 सितंबर को आ रहा है। पौराणिक मान्यता के अनुसार प्रदोष व्रत करने वाले साधक पर सदैव भगवान शिव की कृपा बनी रहती है और उसका दुख-दरिद्रता दूर होती है और कर्ज से मुक्ति मिलती है। प्रदोष व्रत में शिव संग शक्ति यानी माता पार्वती की पूजा की जाती है, जो साधक के जीवन में आने वाली सभी बाधाओं को दूर करते हुए उसका कल्याण करती हैं। आचार्य इंद्रदास ने बताया कि दिन भर शुद्ध आचरण के साथ व्रत रखें और भगवान का ध्यान करते रहें और शाम को पूजा स्थान पर उत्तर या पूर्व की दिशा में बैठ कर भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग की स्थापना करें और भगवान को गंगा जल, पुष्प, अक्षत, धतूरा, चंदन, गाय का दूध, भांग, फल और धूप आदि अर्पित करें।

इसके बाद ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करें। संभव हो तो शिव चालीसा का भी पाठ करें। पूजन के पश्चात घी के दीये से भगवान शिव की आरती करें और पूजा का प्रसाद सभी को वितरित करें। सुबह स्नान के बाद ही व्रत खोलें। प्रदोष व्रत के दिन अपना मन, वाणी निर्मल बनाए रखें। व्रत के दौरान क्रोध न करें। व्रत में शुचिता और पवित्रता का पूरा ध्यान रखें। अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखें।

व्रत से जुड़ी मान्यता, हर इच्छा होती फलित
ऐसी मान्यता है कि प्रदोष के समय भगवान शिव शंकर कैलाश पर्वत के रजत भवन में होते हैं और नृत्य कर रहे होते हैं और इस दौरान देवता भगवान के गुणों का स्तवन करते हैं। इस व्रत को करने वाले के सभी दोष समाप्त हो जाते हैं और मनुष्य का हर प्रकार से कल्याण होता है।

यह भी मान्यता है कि यदि यह व्रत सोमवार के दिन पड़ता है और जो भी इस व्रत को करता है उसकी हर इच्छा फलित होती है। यदि यह व्रत मंगलवार को है तो व्रत करने वाले को रोगों से मुक्ति मिलती है, यदि यह व्रत बुधवार को है तो सभी प्रकार की कामनाएं पूर्ण होती हैं, यदि यह व्रत वीरवार को है तो व्रत करने वाले के शत्रु का नाश होता है और सौभाग्य में वृद्धि होती है, शुक्रवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को भ्रुगुवारा प्रदोष कहा जाता है।

जीवन में सौभाग्य की वृद्धि के लिए प्रदोष व्रत किया जाता है। यदि यह व्रत शनिवार को पड़ रहा है तो पुत्र की प्राप्ति होती है और यदि यह व्रत रविवार को पड़ रहा है तो व्रत करने वाला सदा निरोग रहता है।

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