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वेबिनार:बच्चों के पास डिवाइस नहीं होने से ऑनलाइन शिक्षा बाधित

हाजीपुरएक महीने पहले
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वेबिनार में डिजिटल शिक्षा की गुणवत्ता पर विचार व्यक्त करते अतिथि। - Dainik Bhaskar
वेबिनार में डिजिटल शिक्षा की गुणवत्ता पर विचार व्यक्त करते अतिथि।
  • प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता और डिजिटल शिक्षा की प्रासंगिकता विषय पर हुआ विचार-विमर्श

शिक्षा सभी के लिए संवैधानिक प्रावधान है। देश में प्रारंभिक शिक्षा की स्थिति, वर्ष 2020 में असर आदि का रिपोर्ट जारी करते हुए कहा गया है कि भारत में 4 से 8 वर्ष की आयु के लगभग 9% बच्चे किसी भी शैक्षणिक संस्थान में नहीं जाते हैं, इसी वर्ष यूनिसेफ द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में कोरोना महामारी के दौरान लगभग 15 हजार स्कूल बंद रहे, जिसका प्रभाव लगभग 25 करोड़ विद्यार्थियों पर पड़ा। हालांकि, इस दौरान सरकार द्वारा जूम कॉल, दूरदर्शन तथा अन्य डिजिटल माध्यम से बच्चों को शिक्षा प्रदान करने का प्रयास किया गया है, लेकिन यूनिसेफ की रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में लगभग 75% बच्चों के पास डिजिटल डिवाइस इंटरनेट कनेक्शन तथा अभिभावकों के पास डिजिटल शिक्षा से संबंधित जानकारी का अभाव है।

जिससे बिहार समेत पूरे भारत में डिजिटल शिक्षा से बच्चों को पढ़ाई करना एक बहुत बड़ी चुनौती है। ये बातें भारत की शिक्षा प्रणाली विषय पर आयोजित वेबिनार का संचालन करते हुए जिला युवा समन्वयक अंजली वर्मा ने कही। वेबिनार का आयोजन भारत स्काउट एवं गाइड के तत्वावधान में किया गया। वक्ताओं ने हाल में कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान 10वीं और 12वीं कक्षा की परीक्षाएं स्थगित कर दिया गया, इसी संदर्भ में भारत की शिक्षा प्रणाली विशेषकर प्रारंभिक शिक्षा की स्थिति, गुणवत्ता और डिजिटल शिक्षा की प्रासंगिकता एवं महत्व पर अपने विचार व्यक्त किये। अंत में ऋतुराज ने कहा देश में शिक्षकों की कमी पिछले साल केंद्रीय संसाधन एवं विकास मंत्री द्वारा दिए गए एक रिपोर्ट में देशभर में करीब 10 लाख शिक्षकों की कमी बताई गई है, यह चिंताजनक है।

भारत की प्राचीन शिक्षा प्रणाली थी बेहतर शिक्षा-प्रणाली
जिला संगठन आयुक्त ऋतुराज ने कहा कि भारत में प्राचीन शिक्षा प्रणाली बेहतर शिक्षा प्रणाली थी। प्राचीन काल में भारत में गुरुकुल शिक्षा पद्धति थी। विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करना चाहता है तो वह गुरु के आश्रम में आकर वहीं रहकर अपना सारा काम करते हुए शिक्षा ग्रहण करते थे। जिससे छात्रों को सबसे बड़ा फायदा यह होता था कि वह अहंकार के बिना शिक्षा ग्रहण करता था एवं संस्कार युक्त शिक्षा ग्रहण कर समाज एवं अपने देश की सेवा करता था। जिला सलाहकार प्रमोद कुमार सहनी ने कहा की शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए स्कूलों एवं सभी शैक्षणिक संस्थानों को आवश्यक संसाधनों से परिपूर्ण करते हुए भारत की शिक्षा प्रणाली को अपडेट करते रहने की आवश्यकता है।

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