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अपील:तीसरी लहर से निपटने के लिए विभाग की तैयारी शुरू

हाजीपुर22 दिन पहले
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  • विशेषज्ञों ने कहा-बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए घर के बड़े को टीका जरूरी, एहतियात भी बरतें

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से चल रही लड़ाई के बीच स्वास्थ्य विभाग ने संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए कमर कस चुकी है। इस लहर में सबसे अधिक बच्चों पर असर पड़ने की बात कही जा रही है। लेकिन अगर घर के बड़े लोग अधिक से अधिक संख्या में। वैक्सीन ले लें, तो बच्चों पर कोरोना संक्रमण का प्रभाव कम पड़ेगा।

कारण, यह कि बड़ों से बच्चों में संक्रमण फैलने का खतरा ज्यादा होता है। लेकिन एक बात का ध्यान रखना पड़ेगा कि बाहर जाने पर वे सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल जरूर रखें। मास्क का इस्तेमाल करें और इम्यून सिस्टम को मजबूत रखें ताकि वे कोरोना कैरियर न बनें। जब घर के बड़े लोग मास्क, सेनेटाइजेशन समेत बाकी प्रोटोकॉल का पालन करेंगे तो उससे बच्चे भी सीखेंगे और सावधानी बरतेंगे। ये बातें सिविल सर्जन डॉ. इन्द्रदेव रंजन ने बताई।
लोगों को आगे भी जागरूक रहना पड़ेगा
शिशु रोग विशेषज्ञ का मानना है कि सरकारी तैयारी अपने अनुसार ठीक है। लेकिन गांव में बच्चों को लेकर अभिभावकों को उसके लक्षणों के बारे में जागरूक रहना होगा। हल्के लक्षण दिखें, तो अस्पताल पहुंच जाएं, तो बच्चे की रिकवरी तय है। बच्चों के लिए बेड की संख्या बढ़ेगी।

भय का माहौल न बनाया जाए
साथ ही शिशु रोग विशेषज्ञ ने बताया कि बच्चों को कोरोना होने पर घबराने की जरूरत नहीं है। पेरेंट्स को यह ध्यान रखना होगा कि वह ज्यादा पैनिक क्रिएट न करें। सिर्फ समय रहते डॉक्टर से इलाज करवाएं और उनकी बताई दवा खिलाएं। एक से डेढ़ प्रतिशत बच्चों को ही वेंटिलेटर की जरूरत होती है, बाकी दवा से ही ठीक हो जाते हैं।

घरों के बड़े अगर वैक्सीन ले लें तो बच्चे और भी सुरक्षित हो जाएंगे। सदर अस्पताल के शिशु रोग विभाग चिकित्सक के मुताबिक तीसरी लहर में बच्चों पर कोरोना का असर कितना होगा, अभी कहना मुश्किल है। लेकिन एक्सपर्ट अलग-अलग रिसर्च के अनुसार बता रहे हैं कि यह ज्यादा गंभीर नहीं होगा। वैसे बच्चों की रिकवरी रेट भी ज्यादा है। हमलोगों ने अस्पताल में तैयारी शुरू कर दी है। पीकू वार्ड में 25 बेड जिसमें आक्सीजन, वेंटिलेटर समेत अन्य संसाधनों को दुरुस्त करवाया जा रहा है।

स्पष्ट नहीं कि बच्चे ज्यादा संक्रमित होंगे
कोरोना के तीसरी लहर को लेकर सरकार या किसी स्पेशलिस्ट के पास सॉलिड प्रूफ अभी नहीं है कि बच्चे ज्यादा संक्रमित होंगे। लेकिन अस्पतालों में पीकू यानी एक माह से ज्यादा उम्र वाले बच्चों के लिए आईसीयू की व्यवस्था की जा रही है। चाइल्ड स्पेशलिस्ट के मुताबिक कोरोना से बच्चों को बचाने के लिए सामान्य दिनों के अनुसार अस्पताल में मरीजों के इलाज की व्यवस्था है। इसे कोरोना के हिसाब से सब कुछ अलग करना होगा। 30 से 40 बेड के पीकू वार्ड निर्माण का भी प्रस्ताव हैं।

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