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जागरुकता:पशुओं पर रसायनों का प्रयोग करके मक्खी भगाने से दूध पर पड़ता है हानिकारक प्रभाव

हाजीपुरएक महीने पहले
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  • पशुओं को मक्खी से बचाव के कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने दिया प्रशिक्षण
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पशुपालकों को मक्खी से होने वाली परेशानियों से बचाने के लिए रसायनिक विधि का प्रयोग नहीं करना चाहिए, इससे दुधारू पशु के दूध और सेहत पर प्रभाव पड़ता है। इसके पशुपालक वगैर किसी प्रकार के खर्च के घ आसानी मक्खी से पशु को बचाया जा सकता है। ये बातें कृषि विज्ञान केंद्र, वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ. नरेंद्र कुमार ने पशुपालकों को प्रशिक्षण देते हुए कही। प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन स्थानीय बखरी बरई एवं फरीदपुर गांव में किया गया है।

उन्होंने पशुपालकों को प्रशिक्षण देते हुए कहा कि पुराने विधि से मक्खी को भगाने में काफी परेशानी होती है। इससे मजदूर खर्च भी बढ़ता था। जबकि नई पद्धति में बथान में सिर्फ एक रस्सी को बांध देने से मक्खियां पूरी तरह समाप्त हो जाती है। मवेशी के शरीर पर बैठने वाली मक्खी स्वतः ही बथान में लटकाते गए गए रस्सी पर बैठ कर चिपक जाती है। रस्सी पर बैठी मक्खी चिपकने के बाद उड़ नहीं पाती है। जिससे भूख के कारण वह मर जाती हैं। मक्खी मर जाने से उसका का प्रजनन रुक जाता है और मक्खी की संख्या बहुत हद तक कम हो जाती है।

मक्खी भगाने के लिए नहीं कर रसायनिक दवा का छिड़काव
डॉ. नरेंद्र कुमार ने बताया कि किसी भी तरह का रासायनिक पदार्थ का प्रयोग मक्खी को नियंत्रण करने लिए बथान में नहीं करना चाहिए। पशुपालकों को प्रैक्टिकली रूप से जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि रस्सी विधि से मक्खी भगाने का प्रयोग करने से डेयरी फार्म या बथान कुछ दिन के बाद बिल्कुल साफ हो जाता है। मक्खी नहीं के बराबर दिखाई पड़ती है। इस प्रकार पशुओं को होने वाली परेशानी से बचाया जा सकता है। बरसात के दिनों में मक्खियों को कंट्रोल करना अत्यंत लाभकारी और अत्यधिक आसान है, जिससे पशुओं में कई तरह की बीमारियां फैलने की संभावना अत्यधिक होती है।

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