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हॉस्पिटल को अब होश कहां रौनक लाई मधुशाला:मण्डईडीह स्थित स्वास्थ्य उपकेंद्र में ताड़ीखोरों का लग रहा मजमा

हाजीपुर18 दिन पहले
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  • जिले भर में स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल यह है कि सरकारी अस्पताल की बिल्डिंग कहीं तबेला तो कहीं-कहीं शराबियों-जुआरियों के कब्जे में हैं

रोगी और रोग की नैदानिक संस्था, सेहत का मंदिर अस्पताल बीमार ही नहीं कैंसरग्रस्त हो रहे हैं। बीमारों को दवा मिले या न मिले पर प्रतिबन्ध के बाद भी, दारू जरूर सर्वसुलभ है। स्व. हरिवंश राय बच्चन की कालजयी कृति मधुशाला की यह पंक्ति-मंदिर-मस्जिद वैर कराती, मेल कराती मधुशाला के तर्ज पर क्या खूब तुकबन्दी हो रही कि हॉस्पिटल तो सुई चुभोता, सुख देती मधुशाला। दूसरी तुकबन्दी हॉस्पिटल को अब होश कहां, रौनक लाई मधुशाला।
जिला प्रशासन ने मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की
इस कोरोना महामारी ने स्वास्थ्य सेवाओं का सच बाहर ला दिया है। वैशाली जिले में हाल कहीं और बुरा है। स्वास्थ्य महकमे का दामन पर चिथड़े लटक रहे हैं। इस संकट की घड़ी में सेहत मरकज पर सवाल उठते हैं तो प्रशासनिक स्तर पर जुबानी जमा खर्च कर चिथड़े रफ़्फ़ु करने की असफल कोशिश होती है। उदाहरण बिदुपुर का चकसिकन्दर एपीएचसी है। उसकी नंगी सच्चाई सामने आई तो जिला प्रशासन ने उस पर पर्दा डालने की कोशिश की। सच को कब तक दबा कर रखा जा सकता है। जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल यह है कि सरकारी अस्पताल की बिल्डिंग कहीं तबेला तो कहीं-कहीं शराबियों-जुआरियों के कब्जे में हैं।
मेडिकल स्टाफ की ड्यूटी रजिस्टर पर ही लग जाती है
यह तस्वीर है पातेपुर के मण्डईडीह स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्र का। आजादी बाद 50 के दशक में यह उपकेंद्र बना था। लगभग 30 वर्ष से उपकेंद्र बन्द पड़ा है। मजे की बात यह कि रोस्टर के अनुसार डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ की साप्ताहिक या पाक्षिक ड्यूटी रजिस्टर पर ही लग जाती है। यहां कायदे से ताड़ीखाना चल रहा है। इलाके के ताड़ीखोरों का सुबह से शाम तक मजमा लगा रहता है। यहां अस्पताल में दवा तो मिलने का सवाल ही नहीं पर दारू मिलना सहज है। दवा-दारू, दोनों ही सहचर शब्द हैं।

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