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वेस्ट नहीं बेस्ट है पराली:होशियारपुर में धान की रोपाई ना छोड़ी तो खत्म हो जाएगा धरती का पानी

होशियारपुर12 दिन पहले
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  • जिले में धान का रकबा 60 हजार एकड़, वाटर लेवल 30 की जगह 90 फीट पर पहुंच चुका

(शिव कुमार बावा) पंजाब में अगर धान की बिजाई को न रोका गया तो आने वाले 10 सालों में पंजाब में पानी पूरी तरह से खत्म हो जाएगा। सूबे के मालवा और माझा में हालात खराब चल रहे हैं। पानी का भूगर्भ जल स्तर बहुत नीचे गिर चुका है। फिलहाल दोआबा में हालात कुछ ठीक हैं।

लेकिन जिस तरीके से दोआबा में किसान धान की बिजाई को तरजीह दे रहे हैं उसे देखकर लगता है कि अगर धान की बिजाई को न रोका गया तो जमीन के नीचे का पानी खत्म हो जाएगा। धान पंजाब की फसल नहीं है लेकिन यहां के किसानों ने इसको अपना लिया है।

होशियारपुर में धान की रोपाई के कारण पानी नीचे गिर चुका है, बावजूद इसके किसान रोपाई कर रहे हैं। पंजाब के कंडी इलाके में भी किसान धान की रोपाई प्राथमिकता से कर रहे हैं। होशियारपुर में किसानों ने पी आर 121 और 122 किस्म का धान लगाया है। इस बार जिले में धान का रकबा 60 हजार एकड़ है।

खेतीबाड़ी विभाग सूबे के किसानों से धान की जगह मक्की की फसल लगाने पर दे रहा है जोर

बरसात न होने, नहरों और ट्यूबवेलों में पानी की कमी के कारण जिले का खेतीबाड़ी विभाग किसानों को धान की रोपाई न करने के लिए जागरूक करता रहता है। उनको प्रेरित करता रहा है कि वह धान की जगह मक्की की रोपाई पर जोर दें। जिला खेतीबाड़ी अफसर डा. विनय कुमार ने बताया कि जिले में पानी का स्तर बहुत नीचे चला गया है।

विभाग की कोशिश है कि किसान धान की जगह आगे भी मक्की की फसल को ही तरजीह दें। जिला खेतीबाड़ी अफसर डॉ विनय ने बताया कि जिला होशियारपुर में धान हर साल 75000 हेक्टेयर रकबे में धान की रोपाई होती रही है। इस बार विभाग ने इसको घटाकर 65000 हेक्टेयर कर दिया है। इसका यही कारण है कि जिले में धरती के नीचे पानी का स्तर बहुत नीचे गिर गया है। पहले पानी करीब 30 से 25 फीट नीचे था, अब लेवल 60 से 90 फीट नीचे गिर गया है। चो और नहरों में पानी नहीं है जिस कारण किसानों को सिर्फ ट्यूबवेलों से सिंचाई करनी पड़ती है।

होशियारपुर अब धान की रोपाई के अनकूल नहीं रहा
जिला होशियारपुर में धान की रोपाई को किसानों ने ना रोका तो कुछ ही सालों में यहां धरती के निचला पानी खत्म हो सकता है। किसानों को धान की रोपाई की जगह मक्की के लिए जागरूक किया जा रहा है। डॉ जसवीर सिंह ने बताया कि जिले के सभी चो जहां कभी भी पानी खत्म नहीं होता था लेकिन अब डैमों में पानी जमा हो जाने के कारण चो सूख चुके है। पानी का स्तर चो सूखने के कारण नीचे गिर गया है। उन्होंने बताया कि दूसरा कारण बरसात भी पहले जैसे नहीं पड़ रही।

होशियारपुर में 85000 हेक्टेयर में होती है मक्की की फसल

खेतीबाड़ी अफसर डॉ विनय कुमार ने बताया कि पंजाब समेत जिला होशियारपुर का इलाका धान की फसल के लिए अनकूल नहीं रहा लेकिन धान की जगह अगर मक्की को तरजीह दी जाए तो किसानों को काफी मुनाफा हो सकता है जिसके लिए विभाग किसानों को गांव-गांव जाकर जागरूक कर रहा है।

उन्होंने बताया कि होशियारपुर में मक्की की फसल 85000 हेक्टेयर रकबे में होती है जिसमें 56000 हेक्टेयर साओनी और 20000 हेक्टेयर में हरी छल्ली होती है। पंजाब सरकार मक्की के बीज पर प्रति किलोग्राम 90 रुपए सबसिडी दे रही है। उन्होंने किसानों से स्कीम का लाभ उठाने को कहा है।

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