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ग्रहों की चाल:सूर्य के मिथुन राशि में आने से शुरू होता है बारिश का मौसम

होशियारपुरएक महीने पहले
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पूरा दिन नमक खाए बिना व्रत रखने से हर तरह की परेशानी होती है दूर - Dainik Bhaskar
पूरा दिन नमक खाए बिना व्रत रखने से हर तरह की परेशानी होती है दूर
  • सूर्य के राशि परिवर्तन से बदलती है ऋतुएं, साल में बारह बार होती है संक्राति

सूर्य ने वृष से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश किया। ऐसी मान्यता है कि मिथुन राशि में प्रवेश के बाद बारिश की ऋतु शुरू हाे जाती है। सूर्य के राशि परिवर्तन से ही ऋतुएं बदलती हैं। साथ ही एक साल में 12 बार संक्रांति पड़ती हैं।

सूर्य देवता को ही ज्योतिष का जनक माना गया है। ये सभी ग्रहों के राजा हैं। इस ग्रह की स्थिति से ही कालगणना की जाती है। दिन-रात से लेकर महीने, ऋतुएं और सालों की गणना सूर्य के बिना नहीं की जा सकती।

हर महीने जब सूर्य राशि बदलता है तो मौसम में बदलाव होने लगते हैं। जिससे ऋतुएं भी बदलती हैं। इसी वजह से सूर्य की स्थिति महत्वपूर्ण मानी जाती है। सूर्य के मिथुन राशि में आने के बाद ही बारिश का मौसम शुरू होता है।

संक्रांति पर्व पर सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए

इस पर्व पर सूर्योदय से पहले उठकर तीर्थ स्नान करना चाहिए। ऐसा न कर पाए तो घर पर ही पानी में गंगाजल की कुछ बूंदें मिलाकर नहा लेना चाहिए। इससे तीर्थ स्नान का पुण्य मिलता है। इसके बाद उगते हुए सूरज को प्रणाम करें। फिर अर्घ्य दें। उसके बाद धूप-दीप दिखाएं और आरती करें। आखिरी में फिर से सूर्य देवता को प्रणाम करें और 7 बार प्रदक्षिणा करें। यानी एक ही जगह पर खड़े होकर 7 बार परिक्रमा करते हुए घूम जाएं।

पूजा के बाद वहीं खड़े होकर श्रद्धा के मुताबिक, दान करने का संकल्प लें और दिन में जरूरतमंद लोगों को खाना और कपड़ों का दान करें। हो सके तो इस दिन व्रत भी कर सकते हैं। पूरे दिन नमक खाए बिना व्रत रखने से हर तरह की परेशानियां दूर होती हैं और मनोकामना पूरी होती है।

ध्यान रखने वाली बातें

  • सूर्य पूजा के लिए तांबे की थाली और तांबे के लोटे का इस्तेमाल करें।
  • थाली में लाल चंदन, लाल फूल और घी का दीपक रखें। दीपक तांबे या मिट्टी का हो सकता है।
  • अर्घ्य देते वक्त लोटे के पानी में लाल चंदन मिलाएं और लाल फूल भी डालें।
  • ऊँ घृणि सूर्यआदित्याय नमः मंत्र बोलते हुए अर्घ्य दें और प्रणाम करें।
  • अर्घ्य वाले पानी को जमीन पर न गिरने दें।
  • किसी तांबे के बर्तन में ही अर्घ्य गिराएं। फिर उस पानी को किसी ऐसे पेड़-पौधे में डाल दें। जहां किसी का पैर न लगे।
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