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ठगी का मामला:2 दिन में ड्राइविंग सिखाने का करते थे दावा, रुपए 220 ऑनलाइन लेते थे, रुपए 4500 ही ठग पाए, दो अरेस्ट

होशियारपुर17 दिन पहले
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पुलिस की पकड़ में दोनों आरोपी रामकुमार और नवीन। - Dainik Bhaskar
पुलिस की पकड़ में दोनों आरोपी रामकुमार और नवीन।
  • इंस्टीट्यूट ऑफ ऑटोमेटिव एंड ड्राइविंग स्किल्स संस्था के नाम पर करते थे ठगी

2 दिन का ऑनलाइन ड्राइविंग कोर्स करवाने और सर्टीफिकेट जारी करने के नाम पर लोगों से ठगी मारने के आरोप में रामकुमार और नवीन को पुलिस ने पकड़कर उनके खिलाफ केस दर्ज किया है। 28 मई को डीसी दफ्तर की तरफ से एसएसपी को शिकायत मिली थी कि कुछ लोग इंस्टीट्यूट ऑफ ऑटोमेटिव एंड ड्राइविंग स्किल्स संस्था, जो लोगों को ड्राइविंग कोर्स करवाती है उसके नाम पर ऑनलाइन ड्राइविंग कोर्स करवाने के नाम पर ठगी कर रहे हैं।

इसकी जांच के बाद थाना सिटी में 2 ठगों रामकुमार और नवीन के खिलाफ मामला दर्ज कर उनको गिरफ्तार कर लिया। दोनों को अदालत से 2 दिन का रिमांड मिला है। दोनों लोगों को फोन कर उनसे ड्राइविंग कोर्स के नाम पर 220 रुपए ऑनलाइन करवाते थे। 10 दिन में उन्होंने लगभग 20 लोगों से 4500 रुपए की ठगी मारी थी।

10 दिन पहले बनाया प्लान, आॅनलाइन सर्टीफिकेट देने का करते थे दावा

1 आरोपी ड्राइवर तो दूसरा करता था लॉटरी का काम

पूछताछ में सामने आया कि दोनों ठग लोगों को फोन करते और ड्राइविंग कोर्स के बारे में बताते। जो लोग तैयार हो जाते वे उनको 220 रुपए ऑनलाइन भेजने को कहते। इस दौरान रामकुमार अपने आप को रेडक्रॉस का मुलाजिम बताता था। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने खुलासा किया 10 दिन पहले ही उन्होंने यह ठगी का खेल शुरू किया था और अभी सिर्फ उन्होंने 4500 रुपए ही ठगे थे कि पकड़े गए। आरोपी रामकुमार अभी कुछ महीने पहले ही बिहार से पंजाब आया था।

आरोपी रामकुमार पंजाब में ट्रक ड्राइवरी करता था और इसी दौरान उसकी मुलाकत आरोपी नवीन से हो गई, जो जालंधर के संतोखपूरा मोहल्ले का है। नवीन की बचपन में हादसे में 1 बाजू कट गई थी और वह लॉटरी का काम करता था, लेकिन काम छूटने के बाद वह बेरोजगार हो गया था। इसके चलते दोनों ने इस तरह ठगी करने की स्कीम बनाई। मामला डीसी दफ्तर तक पहुंच गया, जिसके बाद पुलिस ने उनको गिरफ्तार कर लिया।

कोविड के चलते ड्राइविंग ट्रैक बंद होने से लोगों को हुआ शक

कोरोना महामारी के चलते सरकार द्वारा पंजीकृत इंस्टीट्यूट ऑफ ऑटोमैटिव एंड ड्राइविंग स्किल्स संस्था बंद है। इसलिए जब लोगों को फोन आना शुरू हुए, तो उनको शक हुआ। दोनों आरोपियों ने खुलासा किया वह पढ़े लिखे नहीं हैं, लेकिन गूगल से काफी कुछ सीखा और वहीं से जो लोग रेडक्रॉस संस्था से जुड़े हैं, उनके नाम और मोबाइल नंबर उठाते और उनको फोन कर ठगी करते थे।

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