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पंजे में शहर:कांग्रेस ने 45 सीटें जीतीं, 40 नए चेहरों ने बदले समीकरण 28 महिलाएं विजेता, पहली मेयर भी हो सकती है महिला

कपूरथला19 दिन पहले
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नगर निगम में कांग्रेस की क्लीन स्वीप जीत रही है। कांग्रेस ने 50 में से 45 सीटों पर जीत का परिचम फहराने में सफल हुई है। 1 सीट पर कांग्रेस ने ड्रॉ से जीत की। एक सीट पर कांग्रेस ने 2 के अंतर से शिअद से मार खाई है। शिअद मात्र 2 सीट ही जीत सका है। शिअद हलका इंचार्ज एडवोकेट परमजीत सिंह पम्मा की पत्नी शमिंदर कौर और 3 अन्य पारिवारिक सदस्य भी हार गए हैं। पम्मा का इन 4 वार्डों में 1997 से कब्जा था। यहां से दो बार नगर कौंसिल के प्रधान बने थे। ‘आप’ और भाजपा का खाता भी नहीं खुला। 2 सीटों पर आजाद महिलाएं विजेता रहीं।

एक महिला वार्ड नंबर 38 से जीते कांग्रेस उम्मीदवार केहर सिंह की पत्नी है। पहली नगर निगम में पहला मेयर कांग्रेस का ही होगा। कौन होगा, यह अभी साफ नहीं हुआ है। मेयर कोई भी हो, शहर की सरकार में ज्यादा दबदबा महिला कैबिनेट का होगा। मेयर भी किसी महिला से बनाया जा सकता है। चुनाव में पहली बार 40 नए चेहरे जीते हैं।

इनमें 20 महिलाएं और 20 पुरुष हैं। मात्र 3 चेहरे ही दूसरी बार पार्षद बने हैं। इतना जरूर है कि इनमें ज्यादातर का पति, भाई या पत्नी पार्षद रहे है। चुनाव में अहम बात यह भी रही कि साल 2015 में शिअद से नगर कौंसिल की पहली महिला नगर कौंसिल प्रधान रही अमृतपाल कौर ने चुनाव ही नहीं लड़ा। उसका पति कांग्रेस से पार्षद जीता हैं।

साल 2015 में नगर कौंसिल के भाजपा से नगर कौंसिल के सीनियर उप-प्रधान रहे हरदियाल सिंह झीता अपने भाई जगतार सिंह से ही हार गए हैं। हरदियाल सिंह आजाद उम्मीदवार थे। चर्चा में वार्ड नंबर 32 से कांग्रेस के नरिंदर सिंह मंसू और वार्ड नंबर 8 से बिना मुकाबला विजेता रहे मुनीश अग्रवाल का नाम मेयर की दौड़ में आगे चल रहा है।

मंसू दूसरी बार जीते हैं साथ में उसका बेटा भी अलग से जीता है। मंसू राणा के राइट हैंड भी हैं। मुनीश अग्रवाल के सामने कोई उम्मीदवार नहीं था। उसके पिता मिंदरपाल अग्रवाल नगर कौंसिल के पूर्व प्रधान रहे हैं। विधायक राणा गुरजीत सिंह ने पार्षदों की पूरी टीम को बधाई दी।। वोटरों का धन्यवाद किया। राणा ने कहा कि यह जीत लोगों की है। इनकी और हाईकमान की सहमति से ही नया मेयर बनेगा।

चुनाव में सबसे बड़ा उलटफेर - 2015 में कौंसिल के सीनियर उप-प्रधान भाजपा से हरदियाल सिंह झीता थे लेकिन कांग्रेस सरकार आने पर उसे हटा दिया था। इस बार झीता वार्ड नंबर 36 से आजाद उम्मीदवार थे। उसका मुकाबला अपने भाई और कांग्रेसी उम्मीदवार जगतार सिंह के साथ था लेकिन हरदियाल सिंह झीता हार गए हैं।

वार्ड नंबर 21 में कांग्रेस की सबसे छोटी जीत- वार्ड नंबर 21 में पांच महिला उम्मीदवार थे। शिअद व कांग्रेस के उम्मीदवारों की वोट बराबर होने से मामला फंस गया। अंत कांग्रेस की जीत हुई। आजाद उम्मीदवार सोनिया को 5 वोट, आप

वार्ड नंबर 21 में पांच महिला उम्मीदवार थे। शिअद व कांग्रेस के उम्मीदवारों की वोट बराबर होने से मामला फंस गया। अंत कांग्रेस की जीत हुई। आजाद उम्मीदवार सोनिया को 5 वोट, आप
उम्मीदवार जसविंदर कौर को 11 वोट, नोटा को 5 वोट मिले। कांग्रेस उम्मीदवार जीनत और शिअद उम्मीदवार पिंकी को बराबर 259-259 वोट मिले। अंत तहसीलदार की देखकर में दोनों प्रत्याशियों की सहमति से ड्रॉ निकाला गया। ड्रॉ में कांग्रेस उम्मीदवार जीनत को विजेता घोषित कर दिया।

वार्ड 16 में कांग्रेस की सबसे छोटी हार- वार्ड नंबर 16 में कांग्रेस को सबसे छोटी हार देखनी पड़ी। यहां पर कांग्रेस के रवि इंद्रजीत सिंह को 248 वोट मिले थे। शिअद के प्रदीप सिंह को 250 वोट मिले थे। कांग्रेस की मात्र दो वोट के अंतर से ही हार हुई है। भाजपा को 85, आप को 62 और नोटा को 16 वोट मिले हैं।

वार्ड नं. 3 में कांग्रेस की सबसे बड़ी जीत-

नगर निगम चुनाव में सबसे बड़ी जीत वार्ड नंबर 3 में देखने को मिली है। कांग्रेस और शिअद में मुकाबला था। कांग्रेस से कुलवंत कौर पूर्व पार्षद मैदान में थी। शिअद से परमजीत कौर उम्मीदवार थीं। चुनाव में कांग्रेस को 1299 वोट मिले जबकि शिअद को 229 वोट ही मिले जबकि नोटा को 15 वोट मिले हैं।

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