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मुकाबला:शिअद का गढ़ भेदने में कांग्रेस को लग गए 14 साल, 19 साल में पहली बार हारे परमजीत सिंह पम्मा के पारिवारिक सदस्य

कपूरथला14 दिन पहले
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कपूरथला पहली बार नगर निगम बना है। अब शहर को तलाश है पहले मेयर की। कौन होगा...? इसे लेकर शहर में अभी से सभी की नजरें टिकी हैं। दौड़ में शहर से पहली बार पुरुषों से अधिक जीती कांग्रेस की 26 महिला पार्षद भी हैं। विधायक के राइट हेंड भी चर्चा में है। बिना मुकाबला विजेता भी मुकाबले में हैं। अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान को लेना हैं। लेकिन बनेगा वही, जो विधायक राणा की पारखू नजर को छूता होगा। फिलहाल मेयर चाहवानों की दौड़ में लिस्ट बहुत लंबी होने लगी है। कांग्रेस इस चुनाव में 14 साल बाद शिअद का नगर कौंसिल से गढ़ तोडने में सफल हुई है।

नगर निगम कपूरथला के पहले मेयर के लिए चार नाम आगे, पार्टी हाईकमान लेगी अंतिम फैसला - कांग्रेस ने 2017 में बिना चुनाव किए ही शिअद प्रधान को पार्टी में शामिल कर नगर कौंसिल में कब्जा जमा लिया था लेकिन कांग्रेस चुनाव में बहुमत से अब आई है। अब 45 सीटें जीती हैं। शिअद को 3 और आजाद को 2 सीटें मिली हैं। नगर निगम चुनाव में पहली बार कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला है। सबसे ज्यादा निराशाजनक हार शिअद को मिली है। शिअद का जहां 2007 से कब्जा था। वहीं, शिअद हलका इंचार्ज परमजीत सिंह पम्मा और उसका परिवार 1997 से नगर कौंसिल में 4 पार्षदों समेत लगातार जीतते आए है। पम्मा 2 बार नगर कौंसिल के प्रधान भी रहे हैं।

अब पम्मा के परिवार के 4 पारिवारिक सदस्य हार गए हैं। केवल 3 पार्षद बने हैं। राणा ने पम्मा का यह गढ़ 19 साल बाद तोड़ा है। गढ़ कैसे टूटा, कहां गलती हुई, इसे लेकर शिअद मंथन करने में जुट गया है। शिअद ने जिला शहरी प्रधान हरजीत सिंह वालिया की अगुवाई में शहर से यह पहला चुनाव लड़ा था। चुनाव में शिअद को निराशाजनक हार देखनी पड़ी। शिअद को चुनाव में 50 वार्ड से मात्र 10096 वोट ही मिले हैं। चुनाव में

आप को भी निराशाजनक हार देखनी पड़ी। आप को चुनाव में 2809 वोट मिले हैं। ऐसे में वह चौथे स्थान पर आई है। भाजपा को कृषि बिलों मुद्दा ही ले बैठा है। भाजपा से साल 2015 में 6 सीट थीं। नगर कौंसिल का सीनियर उप-प्रधान भाजपा का था। अब चुनाव में 3638 वोट ही मिले हैं। 448 वोटरों ने नोटा दबाया। कांग्रेस को 26915 वोट मिले हैं।

कौंसिल में कब कौन रहा प्रधान
साल 2002 में पहली बार विधायक बनते ही राणा गुरजीत सिंह ने कांग्रेसी नेता सुदेश कुमार को पहली बार नगर कौंसिल में अपना प्रधान बनाया था। वह साल 2007 तक प्रधान रहे।
साल 2008 में नगर कौंसिल चुनाव में शिअद ने बहुमत लेकर अपना कब्जा वापस ले लिया था। {शिअद से एडवोकेट परमजीत सिंह दूसरी बार कौंसिल प्रधान बने थे। वह 8 नवंबर 2013 तक नगर कौंसिल के प्रधान रहे। इससे पहले 1997 से 1998 तक भी पम्मा नगर कौंसिल के प्रधान पद पर थे।
2015 में नगर कौंसिल चुनाव में भी बहुमत शिअद को ही मिला था। उस समय शिअद ने अमृतपाल कौर को नगर कौंसिल की पहली महिला प्रधान बनाया था।

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