शहादत:पुत्त मैं अज्ज तो शहीद दी मां हां, तेरी शहीदी ने मेरे दूध दी लाज रख लई, डीसी साहेब! मेरा पोता पिता दा बदला लैन फौज विच्च जाऊ

कपूरथला2 महीने पहले
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  • शहीद जसविंदर सिंह का पार्थिव शव गांव पहुंचा, 11 वर्षीय बेटी ने कहा-पापा सैल्यूट है आपको

साहेब... इक्क वार उठ के आवाज दे दो, नहीं रोऊंगी। तुसी मैंनू धोखा दित्ता, कल्लियां छड्ड गए ओ। यह रुद्र भरे शब्द ने शहीद जसविंदर सिंह की पत्नी सुखप्रीत कौर ने अंतिम संस्कार के मौके पर सभी को भावुक कर दिया। सुखप्रीत कौर को पति की शहीदी का आज सुबह ही बताया था। सदमे को वह सहार नही पाई। रो-रोकर बेहाल हो रही थी। बार बार पति की चिखा को खींच रही थी। रिश्तेदार और घर वाले उसे चुप तो करवाते, लेकिन खुद अपने भी आंसू नहीं रोक पाते। सुखप्रीत विरलाप में कहती है, साहेब तुसी केहा सी दीवाली ते घर आऊंगा। ऐदां आउना सी।

साहेब तुसीं धोखा दित्ता, मैंनू क्यों नई लैके गए। बीमार मां मनजीत कौर ने भी बेटे की शहीदी की खबर बुधवार सुबह ही मिली। मां कहती है पुत्त मैं अज्ज तो शहीद दी मां हां, तेरी शहीदी ने मेरे दूध दी लाज रख ली। डीसी साहेब मेरा पोता (शहीद का बेटा) बिक्रमजीत सिंह (13) भी पिता दा बदला लैन फौज विच ही जाऊ। पुत्त मैंनू तेरे ते सदा माण रहेगा। बार-बार पुत्त का मुंह बक्से से देखती, कभी रोती, फिर चुप कर जाती कि मेरा परिवार सदमे में टूट न जाए। मेरे पापा ने देश के लिए शहीदी दी है, वह अमर हुए है, आप क्यों रोते हो। शहीद जसविंदर सिंह की शहीदी पर पूरा गांव शोक में था, लेकिन उसकी 11 वर्ष की बेटी हरनूर जैसे पत्थर सी बन गई हो। कभी मां को रोते हुए चुप करवा रही थी, कभी दादी को। हरनूर से दुख व्यक्त करते कोई रिश्तेदार रोता तो आगे से हरनूर जज्बे से उनको भी हौसला दे देती। हरनूर कहती कि मेरे पापा ने देश के लिए शहीदी दी है, वह अमर हुए हैं, आप क्यों रोते हो। पापा सैल्यूट है आप को। हरनूर ने अपने पिता को अंतिम संस्कार के मौके सेल्यूट भी किया। हरनूर री आंखों से आंसू तक नहीं निकाले। लोग शहीद के दर्शकों के लिए मकान की छतों पर चढ़े हुए थे। 12 बजे पार्थिव शरीर को घर से काफिले में श्मशानघाट तक ले जाया गया। रास्ते में गांव के लोगों व रिश्तेदारों ने फूलों से वर्षा की।

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