विश्व दृष्टि दिवस:आंखों के बिना दुनिया का आनंद नहीं लिया जा सकता : सिविल सर्जन

कपूरथला2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
मरीजों की आंखों की जांच करते सीनियर मेडिकल अधिकारी डॉ. संदीप। - Dainik Bhaskar
मरीजों की आंखों की जांच करते सीनियर मेडिकल अधिकारी डॉ. संदीप।

आंखों के बिना इस सुंदर दुनिया का आनंद नहीं माना जा सकता। यह बात सिविल सर्जन डॉ. परमिंदर कौर ने विश्व दृष्टि दिवस के संबंध में कही। उन्होंने बताया कि एक सर्वे के मुताबिक देश में सबसे अधिक अंधापन से शिकार लोग रहते है जबकि सच्चाई यह है कि 80 फीसदी मामलों में समय रहते इलाज करवा कर इससे बचा जा सकता है।

उन्होंने लोगों को अपनी आंखों का ध्यान रखने के लिए प्रेरित किया और कहा कि इस साल का थीम भी लव यूअर आईज रखा गया है। उन्होंने लोगों को संतुलित भोजन का सेवन करने, आंखों को सूरज की सीधी रोशनी से बचाने, खतरनाक काम वाली जगहों पर आंखों को बचाने के लिए सुरक्षा चश्मा पहनने, समय-समय पर डॉक्टरी जांच करवाने के लिए प्रेरित किया।

कहा-ज्यादातर लोग मोतिया के इलाज और ऑपरेशन को लेकर जागरूक नहीं
नेशनल प्रोग्राम फॉर कंट्रोल ऑफ ब्लाइंडनेस के जिला नोडल अधिकारी व सीनियर मेडिकल अधिकारी डॉ. संदीप धवन ने बताया कि ब्लाइंडनेस का मुख्य कारण कैटरेक्ट, ग्लूकोमा, डायबिटिक रेटीनोपैथी और कार्नियल ब्लाइंडनेस है। लोगों में अंधेपन का कारण जागरुकता की कमी भी है।

ज्यादातर लोग मोतियों के इलाज और ऑपरेशन को लेकर जागरूक नहीं है। मोतियाबिंद की सर्जरी करवाने से पहले लोग इसके पकने का इंतजार करते है। जिस कारण कई बार स्थिति बदतर हो जाती है और आंखों की रोशनी चली जाती है। यहीं नहीं विटामिन-ए की कमी भी अंधेपन का कारण बनती है।

उन्होंने कोविड-19 के दौरान बच्चों की ओर से डिजीटल उपकरणों पर निर्भरता को भी आंखों की सेहत को नुक्सानदायक बताया। डिजीटल विजन सिंड्रोम से बचने के लिए कंप्यूटर और स्मार्टफोम को प्रयोग करते समय स्क्रीन से 20 इंच की दूरी पर रखे जाए। इस अवसर पर गुरजीत कैले, जसविंदर मौजूद थे।

खबरें और भी हैं...