ठगी:ग्राहक सेवा केंद्र खोलने के नाम पर कंपनी ने की ऑनलाइन धोखाधड़ी, 6 लोगों के खिलाफ केस दर्ज

कीरतपुर साहिब2 महीने पहले
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  • आईडी जेनरेशन फीस, आईडी जनरेट, ओडी अकाउंट, एग्रीमेंट करने के लिए 6,51,704 की मारी ठगी
  • कंपनी ने कहा-उक्त रकम रिफंडेबल है जोकि घंटे में वापस हो जाएगी

ग्राहक सेवा केंद्र खोलने के नाम पर प्राइवेट कंपनी ने 6,51,704 की ऑनलाइन धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है। कीरतपुर साहिब के पास पड़ते गांव बारूवाल निवासी सुरिंदर सिंह पुत्र तारा सिंह के बयानों पर पुलिस ने ऑनलाइन प्राइवेट कंपनी के 6 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है।

आरोपियों की पहचान सत्यजीत गिरी निवासी किशनपुर रोड हरीपुर मालडा, बृंदावन वीरा, ऊषा वीरा, भरत कुमार, रणजीत व पीओ के रूप में हुई है और सभी निवासी वेस्ट बंगाल के हैं। पुलिस ने उक्त ऑनलाइन प्राइवेट कंपनी के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

बेटे के लिए एक ग्राहक सेवा केंद्र खोलना चाहता था
थाना मुखी कीरतपुर साहिब सन्नी खन्ना ने बताया कि सुरिंदर सिंह पुत्र तारा सिंह निवासी गांव बरूवाल ने 12 नवंबर 2020 को एसएसपी रोपड़ को शिकायत दी थी। शिकायत में सुरिंदर सिंह ने बताया कि वह अपने अपने बेटे के लिए एक ग्राहक सेवा केंद्र खोलना चाहता था जिसके लिए उसने एसबीआई बैंक में संपर्क किया। जहां उन्होंने हमें बताया कि सरकार द्वारा प्रमाणित कुछ कंपनियां ग्राहक सेवा केंद्र खोल रहीे हैं।

इंटरनेट पर सर्च करने के दौरान कई कंपनियों के बारे में पता चला और हमने ऑनलाइन फार्म भर के ग्राहक सेवा केंद्र खोलने के लिए अप्लाई कर दिया। अगले दिन तीन विभिन्न कंपनियों ने उनसे संपर्क किया जिनमें से एक कंपनी को चुनकर उन्होंने कंपनी की मांग के अनुसार अपने बेटे के दस्तावेज स्कैन कर उन्हें भेज दिए। अगले दिन कंपनी ने 3600 रुपए आईडी जेनरेशन फीस एवं 2 हजार रजिस्ट्रेशन फीस जमा करवाने के लिए पत्र भेजा जोकि 5 सितंबर 2020 को जमा करवा दिए।

इसके बाद कंपनी ने उन्हेंं मनवीर ग्राहक सेवा प्वाइंट अलॉट कर दिया। इसके बाद कंपनी ने ओडी अकाउंट खोलने के लिए कहा। जिस पर 8 सितंबर 2020 को कंपनी के अकाउंट में 1 लाख रुपए जमा करवा दिए। ओडी अकाउंट खोलने की जानकारी देने के बाद कंपनी ने 5 साल का एग्रीमेंट करने के लिए 1 लाख 35 हजार की मांग की । इसके तहत कंपनी द्वारा 15,643 रुपए प्रति माह वेतन दिया जाना था।

इसके लिए 21 सितंबर 2020 को 1,25000 व 23 सितंबर 2020 को 10,000 उक्त कंपनी के अकाउंट में डलवा दिए। इसके बाद कंपनी ने मेरे गांव में डिवाइस स्थापित करने के लिए वेरिफिकेशन टीम गठित की। जिनके आने-जाने और रहने इसके लिए कंपनी द्वारा 65,500 की मांग की।

अपितु वेरीफिकेशन टीम कोलकाता वेस्ट बंगाल से आनी थी। इसके चलते उसने कंपनी के अकाउंट में 65,500 भेज दिए। इसके बाद कंपनी के व्यक्ति से बात की तो उसने सारे उपकरणों का जीएसटी बिल बनाकर 1,64,066 जमा करवाने के लिए कहा।

केशलैस 20% और जीएसटी 18% चार्ज लगाकर पैसे वसूले
इसके बाद कंपनी ने कुल जमा रकम पर केशलैस 20% चार्ज 63,220 रुपए, जीएसटी 18% चार्ज 68,274 रुपए, एनओसी चार्ज 75,540 रुपए उक्त पूरी राशि जमा करवाने के उपरांत ट्रांजेक्शन चार्जेस 1,28,570 जमा करवाने के लिए कहा। कंपनी ने कहा कि उक्त पूरी रकम रिफंडेबल है जोकि 1 घंटे में वापस कर दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि यह आखरी राशि है जो मैंने कंपनी के खाते में डालनी है। इसके बाद कंपनी द्वारा और कोई चार्ज नहीं लिया जाएंगा। इसके बाद 24 अक्टूबर 2020 को 60,000 और 30 अक्टूबर 2020 को 65,684 कंपनी के खाते में भेज दिए। इसके 1 घंटे बाद कंपनी ने दोबारा फोन करके कहा कि आपकी राशि ट्रांसफर नहीं हो पा रही। इसके लिए क्यू आर कोड जनरेट करना पड़ेगा। जिसके लिए 70,000 चार्जेस जमा करवाने होंगे।

अब कंपनी क्यूआर कोड की राशि जमा करवाने की बात कह रही
सुरिंदर सिंह ने कहा कि जब उक्त कंपनी से पैसे वापस मांगता हूं तो वह क्यूआर कोड की राशि जमा करवाने के बाद सारे पैसे ऑनलाइन वापस करने की बात कहते हैं। अब मुझे पूरा यकीन हो चुका है कि कंपनी फ्रॉड है इस पर कार्रवाई की जाए।

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