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आभार जताया:श्री गुरु तेग बहादुर ने धर्म के लिए दी कुर्बानी युवा करें शिक्षाओं पर अमल : डॉ. मनजिंदर

मुकंदपुर13 दिन पहले
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स्थानीय अमरदीप सिंह शेरगिल मेमोरियल कॉलेज में प्रिंसिपल डॉ. गुरजंट सिंह की अगुवाई में गुरु तेग बहादर जी की बाणी में दवंद मुक्तता और गुरमति संगीत के योगदान विषय पर वेबिनार करवाया गया। गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉ. जसपाल सिंह की रहनुमाई में आयोजित वेबिनार में गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी अमृतसर के स्कूल ऑफ पंजाबी स्ट्डीज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मनजिंदर सिंह, म्यूजिकल वोकल के हेड ऑफ द डिपार्टमेंट प्रोफेसर शमशाद अली शामिल हुए।

इतिहास विभाग की प्रभारी डॉ. चरनजीत कौर ने बताया कि वेबिनार में वक्ताओं ने गुरु तेग बहादर जी की शख्सियत पर जानकारी दी। डॉ. मनजिंदर सिंह ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी की मानवाधिकारों और धर्म के लिए दी गई कुर्बानी याद दिलाती है कि हम उनकी शिक्षाओं पर अमल करें। उनकी बाणी में दवंदों की पहचान मुक्ति पाने की जानकारी भी दी गई।

उन्होंने मानव विज्ञान, धरातल तथा ब्रह्मांडी धरातल को उदाहरणें देकर श्रोताओं को समझाया। इसके बाद प्रोफेसर शमशाद अली ने बताया कि गुरमति संगीत भारतीय संगीत का अंश होते हुए भी अलग है। उन्होंने रागों की तरतीब के फलसफे को समझाने की कोशिश की कि कैसे गुरु अरजन देव जी ने पहला राग श्री और अंतिम राग प्रभाती रखा और दसवें पातशाह ने 31वां राग जैजैवंती अंकित किया। जिस में गुरु तेग बहादर साहिब की बाणी दर्ज की गई है। इसी तरह राग जैजैवंती की महत्ता बताते हुए उन्होंने राग जैजैवंती में एक शब्द और राग सारंग में एक शब्द का गायन भी किया। वेबिनार के अंत में कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. गुरजंट सिंह ने सभी वक्ताओं व गणमान्यों का आभार जताया।

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